त्योहार
त्योहारों की कथा, पूजा, भोग और मंत्र।
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अक्षय तृतीया: दान और नई शुरुआत का दिन
अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल तृतीया है। निर्णय सिंधु के अनुसार वह तृतीया ली जाती है जो पूर्वाह्न में हो, और दोनों दिन हो तो दूसरा दिन; यह युगादि...
भाई दूज: बहन के घर भाई का भोजन
भाई दूज (यम द्वितीया) कार्तिक शुक्ल द्वितीया है, दिवाली का पाँचवाँ दिन। धर्मसिंधु इसकी कथा देता है: यमुना ने अपने भाई यम को इसी दिन घर बुलाक...
छठ पूजा: डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य
छठ कार्तिक शुक्ल षष्ठी का सूर्य और छठी मैया का व्रत है: चार दिन, नहाय-खाय से उषा-अर्घ्य तक। षष्ठी की शाम डूबते सूर्य को और सप्तमी की भोर उगत...
धनतेरस: दिवाली का पहला दीया
धनतेरस कृष्ण त्रयोदशी की शाम है, दिवाली के पाँच दिनों में पहली। ग्रंथ इस शाम घर के बाहर यम के निमित्त दीया रखने की बात करते हैं; परंपरा इसे...
दिवाली: अमावस्या की रात, दीयों की कतार
दिवाली अमावस्या की रात है: अमांत पंचांग में आश्विन की आखिरी रात, पूर्णिमांत में कार्तिक की। दीये और लक्ष्मी पूजा प्रदोष में होते हैं, इसलिए...
विजयादशमी: विजय का दिन
विजयादशमी या दशहरा आश्विन शुक्ल दशमी है, नवरात्रि के बाद का दिन। धर्मसिंधु के अनुसार दशमी वह ली जाती है जो अपराह्न में हो; श्रवण नक्षत्र का...
गणेश चतुर्थी: गणपति का आगमन
गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी है, जब घरों और पंडालों में गणपति की स्थापना होती है। धर्मसिंधु के अनुसार यह व्रत मध्याह्न-व्यापिनी चतुर्थ...
गोवर्धन पूजा: पर्वत, गायें और अन्नकूट
गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को, दिवाली के अगले दिन होती है: गोवर्धन पर्वत (या गोबर/अन्न से बना पर्वत), गायों और श्रीकृष्ण की पूजा, औ...
गुरु पूर्णिमा: व्यास और गुरुओं का दिन
गुरु पूर्णिमा आषाढ़ की पूर्णिमा है। धर्मसिंधु और निर्णय सिंधु इस पूर्णिमा पर व्यास-पूजा बताते हैं, और उसके लिए वह पूर्णिमा ली जाती है जो सूर...
हनुमान जयंती: भक्ति और सेवा का दिन
उत्तर भारत में हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है; कुछ क्षेत्रों में दूसरे दिन, जैसे दिवाली से पहले की कृष्ण चतुर्दशी या दक्षिण में...
होली: होलिका की अग्नि और रंगों का दिन
होली दो दिन का पर्व है: फाल्गुन पूर्णिमा की शाम होलिका दहन, और अगली सुबह रंगों की होली। धर्मसिंधु के अनुसार दहन प्रदोष-व्यापिनी और भद्रा-रहि...
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: आधी रात का जन्मोत्सव
जन्माष्टमी भाद्रपद (अमांत श्रावण) की कृष्ण अष्टमी है, श्रीकृष्ण के जन्म की रात। धर्मसिंधु के अनुसार अष्टमी वह ली जाती है जो निशीथ, यानी आधी...
करवा चौथ: चंद्रोदय तक का व्रत
करवा चौथ (धर्मसिंधु में ‘करक चतुर्थी’) कार्तिक (अमांत आश्विन) की कृष्ण चतुर्थी है। ग्रंथ के अनुसार वह चतुर्थी ली जाती है जो चंद्रोदय के समय...
महाशिवरात्रि: शिव की रात
महाशिवरात्रि माघ (पूर्णिमांत फाल्गुन) की कृष्ण चतुर्दशी की रात है। धर्मसिंधु के अनुसार वह चतुर्दशी ली जाती है जो निशीथ, यानी रात के आठवें मु...
मकर संक्रांति: सूर्य का मकर में प्रवेश
मकर संक्रांति वह दिन है जब सूर्य (निरयण गणना में) मकर राशि में प्रवेश करता है, आजकल लगभग 14 या 15 जनवरी। धर्मसिंधु के अनुसार दिन में प्रवेश...
शारदीय नवरात्रि: देवी की नौ रातें
शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक देवी की नौ रातें हैं। धर्मसिंधु के अनुसार आरंभ (घटस्थापना) उस प्रतिपदा पर होता है जो सूर्यो...
रक्षाबंधन: रक्षा-सूत्र का दिन
रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा को होता है। धर्मसिंधु के अनुसार राखी भद्रा-रहित पूर्णिमा में, अपराह्न या प्रदोष के समय बाँधी जाती है; अगर पूर्णिमा...
राम नवमी: मध्याह्न में राम-जन्म
राम नवमी चैत्र शुक्ल नवमी है, श्रीराम के जन्म का दिन और चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन। धर्मसिंधु के अनुसार श्रीराम का जन्म पुनर्वसु नक्षत्र मे...
शरद पूर्णिमा: कोजागर की रात
शरद पूर्णिमा आश्विन की पूर्णिमा है, जिसे धर्मसिंधु ‘कोजागर व्रत’ कहता है। यह वह पूर्णिमा ली जाती है जो निशीथ, यानी आधी रात, में हो। इस रात ल...
वसंत पंचमी: वसंत और विद्या का दिन
वसंत पंचमी माघ शुक्ल पंचमी है, जिसे धर्मसिंधु वसंतोत्सव का आरंभ कहता है। आज यह मुख्यतः सरस्वती पूजा का दिन है: पीले वस्त्र, किताबों-वाद्यों...