वसंत पंचमी क्या है
माघ महीने की शुक्ल पंचमी को वसंत पंचमी या ‘श्री पंचमी’ कहते हैं। सरसों के पीले खेत, आम के बौर और हल्की धूप: यह सर्दी से वसंत की ओर मुड़ने का समय है। धर्मसिंधु कहता है कि इसी दिन वसंतोत्सव का आरंभ होता है।
आज यह दिन सबसे ज़्यादा सरस्वती पूजा के लिए जाना जाता है: विद्या, संगीत और कला की देवी। स्कूल-कॉलेजों में पूजा होती है, और बहुत से परिवार इसी दिन बच्चे का अक्षरारंभ (पहली बार अक्षर लिखना) करते हैं।
तारीख कैसे तय होती है
शास्त्र (धर्मसिंधु): वसंत पंचमी में पंचमी पूर्वाह्न (दिन का पहला हिस्सा) में देखी जाती है। अगर पंचमी केवल दूसरे दिन पूर्वाह्न में हो, तो दूसरा दिन; नहीं तो पहला दिन।
यानी अगर पंचमी पहले दिन के पूर्वाह्न में है, या दोनों दिन है, तो पहला दिन लिया जाता है। हमारा कैलेंडर इसी नियम से दिन दिखाता है। पूजा का कोई ठीक मुहूर्त हम नहीं निकालते; परंपरा सुबह के समय को अच्छा मानती है।
ग्रंथ और परंपरा में पूजा
ग्रंथ (धर्मसिंधु): इस दिन रति और कामदेव की पूजा और वसंतोत्सव कहा गया है; निर्णयसिंधु भी माघ शुक्ल पंचमी को रति-काम पूजन और वसंतोत्सव बताता है। यानी पुराने ग्रंथों में यह प्रेम, सौंदर्य और ऋतु के आनंद का उत्सव है।
परंपरा: पूर्व और उत्तर भारत में यह दिन सरस्वती पूजा का बन गया। हमारी लाइब्रेरी के ग्रंथों में इस दिन सरस्वती पूजा का उल्लेख हमें नहीं मिला, इसलिए हम इसे परंपरा के रूप में लिखते हैं। दोनों बातें साथ सही हैं: ऋतु का उत्सव भी, और विद्या का आदर भी।
कथा (परंपरा): एक लोक-कथा कहती है कि सृष्टि के आरंभ में सब कुछ मौन था; ब्रह्मा की प्रार्थना पर सरस्वती वीणा लेकर प्रकट हुईं और संसार को वाणी और संगीत मिला। इसे हम परंपरा की कथा के रूप में रखते हैं।
परिवार कैसे मनाते हैं
बंगाल, ओडिशा, असम, बिहार: घर-घर और स्कूलों में सरस्वती की मूर्ति, बच्चे किताबें पूजा में रखते हैं और उस दिन पढ़ाई नहीं करते; ‘हाते-खोड़ी’ (अक्षरारंभ)। पंजाब: पीली पगड़ियाँ-दुपट्टे और पतंगबाज़ी। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश: पीले कपड़े, केसरिया मीठे चावल, और कई जगह होली की तैयारी का आरंभ (होलिका का डंडा गाड़ना)। राजस्थान: पीले फूलों की मालाएँ। संगीतकार और कलाकार अपने वाद्यों और औज़ारों की पूजा करते हैं।
सरल पूजा
- सुबह स्नान, पीले या साफ़ हल्के कपड़े।
- पूजा-स्थान पर सरस्वती का चित्र; पास में किताबें, कलम, वाद्य।
- पीले फूल, अक्षत, चंदन, और ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ या कोई सरस्वती-वंदना।
- केसरिया मीठे चावल या बूंदी का भोग।
- अक्षरारंभ: छोटे बच्चे से थाली में चावल या स्लेट पर ‘ॐ’ या अपना नाम लिखवाएँ (अपनी परंपरा से)।
कोई पैसे वाली पूजा ज़रूरी नहीं।
सुरक्षा
मौसम बदल रहा होता है: सुबह-शाम ठंड रहती है, बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएँ। पतंग उड़ाएँ तो सादा सूती धागा लें, काँच वाला मांझा नहीं, और छत की मुंडेर से दूर रहें। मूर्ति-विसर्जन घर पर या कृत्रिम कुंड में करें; नदी में जाएँ तो गहरे पानी से दूर रहें।
ePandit में
ePandit में: त्योहार का दिन हमारा कैलेंडर आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से दिखाता है। दिन एक बार उज्जैन के हिसाब से तय होता है, आपके शहर का समय अलग दिखता है। हम अभी मुहूर्त नहीं निकालते, और किसी त्योहार को किसी के लिए अच्छा या बुरा नहीं बताते।