नवरात्रि क्या है
नवरात्रि यानी ‘नौ रातें’, देवी दुर्गा की उपासना का समय। साल में दो बड़ी नवरात्रि होती हैं: वसंत में चैत्र नवरात्रि (राम नवमी तक) और शरद में शारदीय नवरात्रि, आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक, जो सबसे ज़्यादा मनाई जाती है। धर्मसिंधु कहता है कि नवरात्र उस कर्म का नाम है जो प्रतिपदा से नवमी तक की नौ तिथियों में होता है, और इसमें पूजा मुख्य है; उपवास-जप के नियम कुल-कुल में अलग हो सकते हैं।
तारीख कैसे तय होती है
शास्त्र (धर्मसिंधु): नवरात्रि का आरंभ उस प्रतिपदा पर करें जो सूर्योदय के बाद तीन मुहूर्त (लगभग 2 घंटे 24 मिनट) रहे; यह न मिले तो दो मुहूर्त वाली पर भी। बहुत से ग्रंथों के मत से अमावस्या से जुड़ी प्रतिपदा में आरंभ नहीं किया जाता। पर अगर प्रतिपदा सूर्योदय पर एक मुहूर्त से कम हो या सूर्योदय को छुए ही नहीं, तो अमावस्या-युक्त दिन भी लिया जाता है।
नौ दिन कभी आठ या दस क्यों: नवरात्रि तिथियों से गिनी जाती है, तारीखों से नहीं। कभी कोई तिथि सूर्योदय को छुए बिना निकल जाती है (क्षय), कभी दो सूर्योदय छू लेती है (वृद्धि)। धर्मसिंधु कहता है कि तिथि घटने-बढ़ने से दिन कम-ज़्यादा हों तो पूजा उसी हिसाब से समायोजित होती है।
हमारा कैलेंडर घटस्थापना का दिन इसी नियम से दिखाता है; मुहूर्त हम अभी नहीं निकालते।
कथा: परंपरा / पुराण कथा
महिषासुर-मर्दिनी: परंपरा के अनुसार असुर महिषासुर को वरदान था कि कोई देवता या पुरुष उसे नहीं हरा पाएगा। देवताओं के तेज से देवी दुर्गा प्रकट हुईं, सबने उन्हें अपने अस्त्र दिए, और नौ दिन के युद्ध के बाद दसवें दिन देवी ने महिषासुर को हराया। यह कथा देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) में मानी जाती है, जिसका पाठ नवरात्रि में बहुत होता है।
राम: दूसरी परंपरा में श्रीराम ने रावण से युद्ध से पहले देवी की उपासना की, और दसवें दिन विजय पाई; यही विजयादशमी है। नौ दिनों में देवी के नौ रूप (शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक) पूजने की रीति भी परंपरा की है।
परिवार कैसे मनाते हैं
गुजरात: हर रात गरबा और डांडिया। बंगाल, ओडिशा, असम: षष्ठी से दशमी तक दुर्गा पूजा, पंडाल, धुनुची नृत्य। तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र: घर में सीढ़ियों पर गुड़ियों का ‘गोलू’/‘बोम्मई कोलु’; मैसूरु दसरा। उत्तर भारत: घटस्थापना, जौ बोना, रामलीला, अष्टमी-नवमी को कन्या पूजन। महाराष्ट्र: घटस्थापना और घागर फुंकणे; हिमाचल: कुल्लू दशहरा दशमी से। केरल: आखिरी तीन दिन सरस्वती पूजा और विजयादशमी पर विद्यारंभ।
सरल पूजा
- घटस्थापना: प्रतिपदा की सुबह मिट्टी के पात्र में जौ बोएँ, उस पर जल से भरा कलश, आम के पत्ते और नारियल।
- देवी का चित्र या मूर्ति, दीया (रोज़ या अखंड, अपनी सुविधा से)।
- रोज़ फूल, रोली, अक्षत, और देवी के नाम का जप या दुर्गा सप्तशती/कोई स्तुति।
- शाम को आरती।
- अष्टमी या नवमी: छोटी बच्चियों को आदर से भोजन (कन्या पूजन), जो कुल-रीति हो।
- दशमी को कलश का जल घर में छिड़कें, जौ के अंकुर बहते पानी या पौधों में।
सुरक्षा और सेहत
उपवास और सेहत: उपवास अपनी सेहत के हिसाब से रखें। डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर, गर्भावस्था, स्तनपान, बुज़ुर्ग उम्र या नियमित दवा हो तो फल, दूध या एक समय के सादे भोजन वाला हल्का रूप भी परंपरा में है। दवा का समय न बदलें। सेहत के लिए डॉक्टर ही पहला सहारा है; कोई व्रत इसकी जगह नहीं लेता। नौ दिन का व्रत लंबा होता है; बीच-बीच में पानी, नारियल पानी, फल और दही लेते रहें। पूरे नौ दिन व्रत ज़रूरी नहीं: धर्मसिंधु भी सात, पाँच, तीन, दो या एक दिन के विकल्प देता है।
अखंड दीया अकेला न छोड़ें; उसे परदों से दूर, किसी धातु की थाली में रखें। गरबा-पंडाल की भीड़ में पानी पीते रहें, बच्चों का हाथ थामें, देर रात लौटते समय सुरक्षित साथ रखें।
ePandit में
ePandit में: त्योहार का दिन हमारा कैलेंडर आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से दिखाता है। दिन एक बार उज्जैन के हिसाब से तय होता है, आपके शहर का समय अलग दिखता है। हम अभी मुहूर्त नहीं निकालते, और किसी त्योहार को किसी के लिए अच्छा या बुरा नहीं बताते।