पुनर्वसु नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर

पुनर्वसु का चरण 1 मिथुन 20°00′ से मिथुन 23°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।

स्रोत: अवकहड़ा चक्र (परंपरा), नामाक्षर

आपकी कुंडली में

अंश
मिथुन 20°00′ – मिथुन 23°20′
निरयन अंश (राशिचक्र में)
80.000000 – 83.333333
राशि
मिथुन
नवांश राशि
मेष
नवांश स्वामी
मंगल
नामाक्षर
के
अवकहड़ा चक्र (परंपरा)

इस चरण की बातें

पुनर्वसु का चरण 1 मिथुन 20°00′ से मिथुन 23°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)। यह चरण मिथुन राशि में आता है और इसका नवांश मेष है, जिसके स्वामी मंगल हैं। नक्षत्र के स्वामी गुरु हैं, इसलिए इस चरण में जन्म होने पर पहली महादशा गुरु की होती है। अवकहड़ा चक्र (परंपरा) में इस चरण का नामाक्षर 'के' है।

परंपरा क्या मानती है

परंपरा मानती है कि पुनर्वसु का स्वभाव आशावान, सरल और उदार होता है। नवांश के रंग से परंपरा इस चरण में ये गुण भी देखती है: हिम्मत, पहल करने की आदत, साफ़ बोलना और मुश्किल घड़ी में आगे आकर ज़िम्मेदारी लेना। ये बातें परंपरा की प्रवृत्तियाँ हैं, किसी व्यक्ति पर लगी मुहर नहीं; असली तस्वीर पूरी कुंडली से बनती है।

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आधार ग्रंथ

  • अवकहड़ा चक्र (परंपरा) · नामाक्षर

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-14