विशाखा का चरण 4 वृश्चिक 0°00′ से वृश्चिक 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
स्रोत: अवकहड़ा चक्र (परंपरा), नामाक्षर
आपकी कुंडली में
अंश
वृश्चिक 0°00′ – वृश्चिक 3°20′
निरयन अंश (राशिचक्र में)
210.000000 – 213.333333
राशि
वृश्चिक
नवांश राशि
कर्क
नवांश स्वामी
चंद्र
नामाक्षर
तो अवकहड़ा चक्र (परंपरा)
नक्षत्र स्वामी (विंशोत्तरी)
गुरु (बृहस्पति)
वर्गोत्तम
नहीं
इस चरण की बातें
विशाखा का चरण 4 वृश्चिक 0°00′ से वृश्चिक 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)। यह चरण वृश्चिक राशि में आता है और इसका नवांश कर्क है, जिसके स्वामी चंद्र हैं। नक्षत्र के स्वामी गुरु हैं, इसलिए इस चरण में जन्म होने पर पहली महादशा गुरु की होती है। अवकहड़ा चक्र (परंपरा) में इस चरण का नामाक्षर 'तो' है।
परंपरा क्या मानती है
ज्योतिष की परंपरा विशाखा को लक्ष्य पर नज़र, लगन और धीरे-धीरे आगे बढ़ते रहने के स्वभाव से जोड़ती है। नवांश के रंग से परंपरा इस चरण में ये गुण भी देखती है: अपनापन, दूसरों की ज़रूरत समझना, परिवार और रिश्तों को जोड़कर रखना, और गहरी याददाश्त। ये बातें परंपरा की प्रवृत्तियाँ हैं, किसी व्यक्ति पर लगी मुहर नहीं; असली तस्वीर पूरी कुंडली से बनती है।
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