रोहिणी का चरण 4 वृषभ 20°00′ से वृषभ 23°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
स्रोत: अवकहड़ा चक्र (परंपरा), नामाक्षर
आपकी कुंडली में
अंश
वृषभ 20°00′ – वृषभ 23°20′
निरयन अंश (राशिचक्र में)
50.000000 – 53.333333
राशि
वृषभ
नवांश राशि
कर्क
नवांश स्वामी
चंद्र
नामाक्षर
वू अवकहड़ा चक्र (परंपरा)
नक्षत्र स्वामी (विंशोत्तरी)
चंद्र
वर्गोत्तम
नहीं
इस चरण की बातें
रोहिणी का चरण 4 वृषभ 20°00′ से वृषभ 23°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)। यह चरण वृषभ राशि में आता है और इसका नवांश कर्क है, जिसके स्वामी चंद्र हैं। नक्षत्र के स्वामी चंद्र हैं, इसलिए इस चरण में जन्म होने पर पहली महादशा चंद्र की होती है। अवकहड़ा चक्र (परंपरा) में इस चरण का नामाक्षर 'वू' है।
परंपरा क्या मानती है
परंपरा मानती है कि रोहिणी का स्वभाव कोमल, स्थिर और सुंदरता को पहचानने वाला होता है। नवांश के रंग से परंपरा इस चरण में ये गुण भी देखती है: अपनापन, दूसरों की ज़रूरत समझना, परिवार और रिश्तों को जोड़कर रखना, और गहरी याददाश्त। ये बातें परंपरा की प्रवृत्तियाँ हैं, किसी व्यक्ति पर लगी मुहर नहीं; असली तस्वीर पूरी कुंडली से बनती है।
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