मृगशिरा का चरण 1 वृषभ 23°20′ से वृषभ 26°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
स्रोत: अवकहड़ा चक्र (परंपरा), नामाक्षर
आपकी कुंडली में
अंश
वृषभ 23°20′ – वृषभ 26°40′
निरयन अंश (राशिचक्र में)
53.333333 – 56.666667
राशि
वृषभ
नवांश राशि
सिंह
नवांश स्वामी
सूर्य
नामाक्षर
वे अवकहड़ा चक्र (परंपरा)
नक्षत्र स्वामी (विंशोत्तरी)
मंगल
वर्गोत्तम
नहीं
इस चरण की बातें
मृगशिरा का चरण 1 वृषभ 23°20′ से वृषभ 26°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)। यह चरण वृषभ राशि में आता है और इसका नवांश सिंह है, जिसके स्वामी सूर्य हैं। नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं, इसलिए इस चरण में जन्म होने पर पहली महादशा मंगल की होती है। अवकहड़ा चक्र (परंपरा) में इस चरण का नामाक्षर 'वे' है।
परंपरा क्या मानती है
परंपरा मानती है कि मृगशिरा का स्वभाव जिज्ञासु और खोजी होता है। नवांश के रंग से परंपरा इस चरण में ये गुण भी देखती है: आत्मविश्वास, उदारता, नेतृत्व करने की क्षमता, और अपनी बात पर टिके रहना। ये बातें परंपरा की प्रवृत्तियाँ हैं, किसी व्यक्ति पर लगी मुहर नहीं; असली तस्वीर पूरी कुंडली से बनती है।
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