आश्लेषा नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर

आश्लेषा का चरण 1 कर्क 16°40′ से कर्क 20°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।

स्रोत: अवकहड़ा चक्र (परंपरा), नामाक्षर

आपकी कुंडली में

अंश
कर्क 16°40′ – कर्क 20°00′
निरयन अंश (राशिचक्र में)
106.666667 – 110.000000
राशि
कर्क
नवांश राशि
धनु
नवांश स्वामी
गुरु (बृहस्पति)
नामाक्षर
डी
अवकहड़ा चक्र (परंपरा)

इस चरण की बातें

आश्लेषा का चरण 1 कर्क 16°40′ से कर्क 20°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)। यह चरण कर्क राशि में आता है और इसका नवांश धनु है, जिसके स्वामी गुरु हैं। नक्षत्र के स्वामी बुध हैं, इसलिए इस चरण में जन्म होने पर पहली महादशा बुध की होती है। अवकहड़ा चक्र (परंपरा) में इस चरण का नामाक्षर 'डी' है।

परंपरा क्या मानती है

परंपरा मानती है कि आश्लेषा का स्वभाव गहरी समझ वाला और बारीकी से देखने वाला होता है। नवांश के रंग से परंपरा इस चरण में ये गुण भी देखती है: आशावाद, सच्चाई, सीखने-सिखाने की ललक, और दूसरों का हौसला बढ़ाना। ये बातें परंपरा की प्रवृत्तियाँ हैं, किसी व्यक्ति पर लगी मुहर नहीं; असली तस्वीर पूरी कुंडली से बनती है।

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आधार ग्रंथ

  • अवकहड़ा चक्र (परंपरा) · नामाक्षर

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-14