परिचय
मुंडन को शास्त्र में चूड़ाकर्म या चौल कहा गया है। इसमें बच्चे के जन्म के समय के बाल पहली बार उतारे जाते हैं। परिवार के लिए यह एक बड़ा, खुशी का दिन होता है: दादी-नानी, बुआ, मामा सब जुटते हैं।
सबसे पहले: हर परिवार की कुल-परंपरा सबसे ऊपर है। किस वर्ष, किस मंदिर में, कौन बाल पकड़ेगा, बाल कहाँ अर्पित होंगे: यह सब घर की रीति से तय होता है। कई परिवारों में बेटे और बेटी दोनों का मुंडन होता है।
कौन-सा वर्ष
मनुस्मृति (2.35) चूड़ाकर्म के लिए पहला या तीसरा वर्ष बताती है। कई परिवारों में अपनी कुल-रीति से पाँचवें वर्ष में भी मुंडन होता है। ये सब ठीक हैं; जो आपके घर में चलता आया है, वही मानें।
अगर उस समय बच्चे की तबीयत ठीक न हो, या मौसम बहुत कड़ा है, तो जल्दबाज़ी न करें। अगला अच्छा समय आता रहता है।
उत्तरायण क्यों
मुहूर्त-चिंतामणि (संस्कार-प्रकरण, श्लोक 29) मुंडन के लिए उत्तरायण को प्राथमिकता देता है। उत्तरायण वह समय है जब सूर्य मकर संक्रांति से कर्क संक्रांति तक उत्तर की ओर चलता है, मोटे तौर पर मध्य जनवरी से मध्य जुलाई।
व्यावहारिक रूप से भी, उत्तर भारत में इन महीनों का बड़ा हिस्सा मुंडन के लिए आरामदायक रहता है। पर गर्मी के कड़े दिनों में दोपहर से बचें; सिर खुला हो तो धूप सीधे न लगे।
दिन चुनते समय पंडित जी तिथि, वार और नक्षत्र भी पंचांग से मिलाते हैं; रिक्ता तिथियाँ और भद्रा आमतौर पर छोड़ी जाती हैं।
कुल-देवी का मंदिर
उत्तर भारत में बहुत से परिवार मुंडन कुल-देवी या कुल-देवता के मंदिर में करते हैं। कई जगह बाल किसी पवित्र नदी में या मंदिर में अर्पित किए जाते हैं। कुछ परिवार मन्नत के अनुसार किसी खास तीर्थ पर जाते हैं।
यात्रा हो तो बच्चे की सुविधा पहले रखें: पानी, दूध, कपड़े, और आराम का समय। भीड़ वाले दिन छोटे बच्चे के लिए थकाने वाले होते हैं।
संस्कार की शुरुआत गणेश जी के स्मरण से होती है: ॐ गं गणपतये नमः।
साफ़-सफ़ाई और बच्चे का आराम
- नया, साफ़ उस्तरा या ब्लेड हर बच्चे के लिए। नाई हाथ धोकर, साफ़ कपड़े पर काम करें।
- बच्चा पेट भरा और शांत हो। उसे गोद में आराम से पर अच्छी तरह पकड़ें ताकि अचानक हिलने से कट न लगे।
- खेलने की कोई चीज़ हाथ में दे दें, जिससे ध्यान बँटा रहे।
- कोई छोटा कट लगे तो साफ़ पानी से धोकर डॉक्टर की बताई चीज़ लगाएँ।
- कई परिवार बाद में हल्दी या चंदन का लेप लगाते हैं (लोक मान्यता)। बच्चे की त्वचा संवेदनशील हो, या सिर पर कोई दाना-फुंसी हो, तो पहले डॉक्टर से पूछें।
- मुंडन के बाद सिर को धूप से बचाएँ और हल्के गुनगुने पानी से नहलाएँ।
सुरक्षा पहले
- डॉक्टर पहले: बच्चे की सेहत, खान-पान या किसी भी तकलीफ़ के लिए डॉक्टर ही पहला सहारा हैं। मुहूर्त डॉक्टर की सलाह के हिसाब से आगे-पीछे किया जा सकता है।
- मुँह में कुछ नहीं: डॉक्टर ने जो न बताया हो, वह बच्चे के मुँह में न डालें। एक साल से छोटे बच्चे को शहद बिल्कुल न दें; घुट्टी, सिक्का या अँगूठी भी मुँह के पास न रखें।
- गले में कसा धागा नहीं: काला धागा या कोई डोरी गले में कसकर न बाँधें। चाहें तो ढीला धागा कलाई पर, बड़ों की निगरानी में।
- कान छिदवाने में साफ़ औज़ार: कर्णवेध हो तो केवल कीटाणु-रहित (स्टेराइल) औज़ार और प्रशिक्षित हाथ।
- बच्चे को रत्न या नग न बाँधें: छोटे बच्चों पर कोई रत्न, नग या भारी गहना न डालें।