चंद्र महादशा में केतु अंतर्दशा

चंद्र की महादशा में केतु की अंतर्दशा को चंद्र–केतु दशा भी कहते हैं।

स्रोत: BPHS (Santhanam) 46.12–14, Vimshottari order from Krittika: Sun, Moon, Mars, Rahu, Jupiter, Saturn, Mercury, Ketu, Venus

आपकी कुंडली में

महादशा
चंद्र
अंतर्दशा
केतु
महादशा की अवधि
10 वर्ष
BPHS 46.15
गणना
10×7/120 = 70/120 = 0.583333 वर्ष
BPHS 51.1
अवधि
7 महीने
महादशा में क्रम
7

अवधि कितनी होती है

चंद्र की महादशा 10 वर्ष की होती है। अंतर्दशा = 10×7/120 = 70/120 = 0.583333 वर्ष, यानी लगभग 7 महीने।

यहाँ 1 वर्ष = 365.25 दिन माना गया है।

अंतर्दशाओं का क्रम

चंद्र की महादशा की पहली अंतर्दशा चंद्र की ही होती है (BPHS, अध्याय 51: हर दशा की पहली अंतर्दशा दशा-स्वामी की), फिर ग्रह विंशोत्तरी क्रम में आते हैं: चंद्र → मंगल → राहु → गुरु (बृहस्पति) → शनि → बुध → केतु → शुक्र → सूर्य। इस क्रम में केतु की अंतर्दशा सातवीं है और महादशा शुरू होने के 7 वर्ष 3 महीने बाद आरंभ होती है।

परंपरा क्या मानती है

परंपरा चंद्र की महादशा को मन, भावनाओं और घर-परिवार से जोड़ती है, और उसमें केतु की अंतर्दशा को भीतर की ओर मुड़ने, सादगी और आध्यात्म का रंग जोड़ने वाली मानती है। मन और वैराग्य के इस मेल को परंपरा शांति और ध्यान की ओर झुकाव से जोड़ती है। परंपरा इसे धैर्य और नियमित दिनचर्या माँगने वाला समय मानती है; असली तस्वीर कुंडली में दोनों ग्रहों की स्थिति से बनती है।

आपकी कुंडली में

आपकी कुंडली में यह अवधि कब आती है और दोनों ग्रह कहाँ बैठे हैं, यह मुफ़्त कुंडली में देखें।

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आधार ग्रंथ

  • BPHS (Santhanam) 46.12–14 · Vimshottari order from Krittika: Sun, Moon, Mars, Rahu, Jupiter, Saturn, Mercury, Ketu, Venus
  • BPHS (Santhanam) 46.15 · Dasha years 6, 10, 7, 18, 16, 19, 17, 7, 20 (OCR shows "6,lO, 7, 18, 16, 19,l'1,7 and20")
  • BPHS (Santhanam) 46.12–14, translator's note · 120 years in total
  • BPHS (Santhanam) 51.1 · Antardasha = MD years × AD years ÷ total dasha years (120)
  • BPHS (Santhanam) 51.1, notes · Worked example: Venus–Venus = 20×20/120 = 3 years 4 months
  • BPHS (Santhanam) 51.1, notes · Shortcut: MD×AD, drop the last digit as months, the last digit ×3 as days (360-day reckoning); Saturn–Mercury 17×19 = 323
  • BPHS (Santhanam) 51.2 · The first antardasha belongs to the dasha lord; the rest follow the dasha order
  • Praśna Mārga (Raman tr.) stanza 65, notes · An example of the 360-day year in a dasha context (the praśna daśā, not the natal one)

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-14