भरणी नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर

भरणी का चरण 4 मेष 23°20′ से मेष 26°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।

स्रोत: अवकहड़ा चक्र (परंपरा), नामाक्षर

आपकी कुंडली में

अंश
मेष 23°20′ – मेष 26°40′
निरयन अंश (राशिचक्र में)
23.333333 – 26.666667
राशि
मेष
नवांश राशि
वृश्चिक
नवांश स्वामी
मंगल
नामाक्षर
लो
अवकहड़ा चक्र (परंपरा)

इस चरण की बातें

भरणी का चरण 4 मेष 23°20′ से मेष 26°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)। यह चरण मेष राशि में आता है और इसका नवांश वृश्चिक है, जिसके स्वामी मंगल हैं। नक्षत्र के स्वामी शुक्र हैं, इसलिए इस चरण में जन्म होने पर पहली महादशा शुक्र की होती है। अवकहड़ा चक्र (परंपरा) में इस चरण का नामाक्षर 'लो' है।

परंपरा क्या मानती है

परंपरा मानती है कि भरणी का स्वभाव गहराई से महसूस करने वाला और ज़िम्मेदारी उठाने वाला होता है। नवांश के रंग से परंपरा इस चरण में ये गुण भी देखती है: लगन, गहरी समझ, रहस्य सँभालने का भरोसा, और कठिन समय में भी डटे रहना। ये बातें परंपरा की प्रवृत्तियाँ हैं, किसी व्यक्ति पर लगी मुहर नहीं; असली तस्वीर पूरी कुंडली से बनती है।

आगे पढ़ें

आधार ग्रंथ

  • अवकहड़ा चक्र (परंपरा) · नामाक्षर

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-14