आक (मदार): सूर्य की समिधा
BPHS सूर्य के हवन के लिए आक की लकड़ी बताता है; इसलिए आक को सूर्य का वृक्ष माना जाता है।
कब: —
पीपल, शमी, बरगद जैसे वृक्षों को जल देना या ग्रह का वृक्ष लगाना: प्रकृति की सेवा के रूप में परंपरागत उपाय।
ग्रह से जुड़े पेड़ या पौधे को पानी देना या लगाना (जैसे शनि के लिए शमी, गुरु (बृहस्पति) के लिए पीपल)।
ग्रह और उसकी समिधा (पेड़) का संबंध BPHS के हवन-प्रसंग में है; पेड़ लगाना या सींचना परंपरा है।
शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.21–22
BPHS सूर्य के हवन के लिए आक की लकड़ी बताता है; इसलिए आक को सूर्य का वृक्ष माना जाता है।
कब: —
रविवार को पास के आक के पौधे में जल दें, या उसकी जगह कोई भी पेड़ लगाकर उसकी देखभाल करें।
कब: रविवार सुबह
न करें
BPHS चंद्र के हवन के लिए पलाश की लकड़ी बताता है; इसलिए पलाश को चंद्र का वृक्ष माना जाता है।
कब: —
सोमवार को पलाश के पेड़ में जल दें, या पलाश (या कोई भी पेड़) लगाकर उसकी देखभाल करें।
कब: सोमवार सुबह
करें
BPHS मंगल के हवन के लिए खैर (कत्था) की लकड़ी बताता है; इसलिए खैर को मंगल का वृक्ष माना जाता है।
कब: —
मंगलवार को खैर के पेड़ में जल दें, या खैर (या कोई भी पेड़) लगाकर उसकी देखभाल करें।
कब: मंगलवार सुबह
करें
बृहत् पराशर होरा शास्त्र हवन में बुध की समिधा अपामार्ग बताता है, इसलिए परंपरा इसे बुध का पौधा मानती है। गमले या आँगन में अपामार्ग लगाएँ या जहाँ उगा हो वहाँ पानी दें (लगाना और पानी देना परंपरा है)।
कब: बुधवार
करें
परंपरा बुध को विष्णु से जोड़ती है; घर में तुलसी या कोई भी हरा पौधा लगाकर बुधवार को उसकी देखभाल करें।
कब: बुधवार
न करें
बृहत् पराशर होरा शास्त्र हवन में गुरु की समिधा पीपल बताता है, और फलदीपिका भी अश्वत्थ (पीपल) को गुरु के स्थानों में गिनती है। गुरुवार को पीपल की जड़ में जल दें या कहीं खुली जगह पीपल लगाएँ (जल देना और लगाना परंपरा है)।
कब: गुरुवार सुबह
करें
लोक में केले के पौधे को गुरु से जोड़ा जाता है; गुरुवार को उसमें जल और हल्दी मिला जल दें।
कब: गुरुवार
न करें
बृहत् पराशर होरा शास्त्र हवन में शुक्र की समिधा गूलर बताता है, इसलिए परंपरा इसे शुक्र का पेड़ मानती है। शुक्रवार को गूलर में जल दें या खुली जगह में गूलर लगाएँ (जल देना और लगाना परंपरा है)।
कब: शुक्रवार
करें
घर में चमेली, मोगरा या रातरानी जैसे सफ़ेद फूलों वाले पौधे लगाकर शुक्रवार को उनकी देखभाल करें।
कब: शुक्रवार
न करें
BPHS में शनि के हवन की समिधा शमी है, इसलिए शमी को शनि का वृक्ष माना जाता है। घर में गमले में शमी लगाएँ या पास के शमी को पानी दें; यह सेवा परंपरा है।
कब: शनिवार, शाम
न करें
शनिवार सुबह पीपल की जड़ में एक लोटा जल चढ़ाएँ। उत्तर भारत में यह शनिवार की आम परंपरा है।
कब: शनिवार, सुबह
BPHS में राहु के हवन की समिधा दूर्वा है, इसलिए दूर्वा को राहु से जोड़ा जाता है। घर में गमले में दूब उगाएँ और पानी दें; यह सेवा परंपरा है।
कब: शनिवार, या रोज़
करें
BPHS में केतु के हवन की समिधा कुश है, इसलिए कुश को केतु से जोड़ा जाता है। पूजा में कुश का आसन या पवित्री रखें; कुश जहाँ उगा हो, उसे बिना ज़रूरत न उखाड़ें। यह परंपरा है।
कब: पूजा के समय
न करें
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