व्रत: ग्रह के वार का उपवास

ग्रह के वार पर व्रत, या एकादशी जैसे पर्व: अपनी सेहत और सुविधा के अनुसार, फल या एक समय भोजन के साथ भी।

ग्रह के वार का व्रत या एकादशी, अपनी सेहत के हिसाब से; बीमारी, गर्भावस्था या दवा में डॉक्टर से पूछें।

सूर्य
सूर्य

रविवार व्रत

एक समय सादा भोजन, परंपरा में प्रायः बिना नमक। सुबह सूर्य को जल चढ़ाकर दिन शुरू करें।

कब: रविवार (शुक्ल पक्ष के पहले रविवार से शुरू करने की परंपरा है)

परंपरा
करें / न करें

करें

  • पानी पर्याप्त पीते रहें।

न करें

  • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें।
चंद्र
चंद्र

सोमवार व्रत

एक समय सादा भोजन या फलाहार; सुबह शिवजी को जल चढ़ाकर दिन शुरू करें।

कब: सोमवार (शुक्ल पक्ष के पहले सोमवार से शुरू करने की परंपरा है)

परंपरा
करें / न करें

न करें

  • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें।
चंद्र

पूर्णिमा व्रत

पूर्णिमा को दिन में सादा रहकर शाम को चंद्रमा को जल (अर्घ्य) देकर भोजन करें।

कब: पूर्णिमा

परंपरा
करें / न करें

न करें

  • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें।
मंगल
मंगल

मंगलवार व्रत

एक समय सादा भोजन, परंपरा में प्रायः बिना नमक (गुड़-चना या मीठा भोजन)। सुबह हनुमान जी का स्मरण करके दिन शुरू करें।

कब: मंगलवार (शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार से शुरू करने की परंपरा है)

परंपरा
करें / न करें

न करें

  • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें।
बुध
बुध

बुधवार का व्रत

बुधवार को एक समय सादा भोजन (जैसे मूंग की खिचड़ी) लें, या फलाहार करें; सुबह गणेश जी या विष्णु जी का स्मरण करें।

कब: बुधवार, शुक्ल पक्ष के बुधवार से शुरुआत

परंपरा
करें / न करें

करें

  • कितने बुधवार करने हैं, यह अपनी सुविधा से तय करें; परंपरा में प्रायः 7, 11 या 21 बताए जाते हैं

न करें

  • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें
बुध

एकादशी व्रत

परंपरा बुध को विष्णु-भक्ति से जोड़ती है; एकादशी पर अन्न छोड़कर फलाहार या एक समय भोजन करें।

कब: हर पक्ष की एकादशी

परंपरा
करें / न करें

न करें

  • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें
गुरु (बृहस्पति)
गुरु

गुरुवार (बृहस्पतिवार) का व्रत

गुरुवार को एक समय पीला, सादा भोजन (जैसे चने की दाल, बेसन) लें; सुबह विष्णु जी का स्मरण करें और बृहस्पतिवार व्रत-कथा पढ़ या सुन सकते हैं।

कब: गुरुवार, शुक्ल पक्ष के गुरुवार से शुरुआत

परंपरा
करें / न करें

करें

  • कितने गुरुवार करने हैं, यह अपनी सुविधा से तय करें; परंपरा में प्रायः 16 बताए जाते हैं

न करें

  • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें
गुरु

एकादशी व्रत

परंपरा गुरु को विष्णु-भक्ति से जोड़ती है; एकादशी पर अन्न छोड़कर फलाहार या एक समय भोजन करें।

कब: हर पक्ष की एकादशी

परंपरा
करें / न करें

न करें

  • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें
शुक्र
शुक्र

शुक्रवार का व्रत

शुक्रवार को एक समय सादा, सफ़ेद भोजन (जैसे खीर, चावल) लें; लक्ष्मी जी या देवी का स्मरण करें। उत्तर भारत में शुक्रवार का संतोषी माता व्रत भी प्रचलित है, जिसमें खट्टा नहीं खाया जाता।

कब: शुक्रवार, शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से शुरुआत

परंपरा
करें / न करें

करें

  • कितने शुक्रवार करने हैं, यह अपनी सुविधा से तय करें; परंपरा में प्रायः 16 या 21 बताए जाते हैं

न करें

  • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें
शनि
शनि

शनिवार का व्रत

दिन में एक बार सादा भोजन (जैसे उड़द या तिल वाला), या फल-दूध। शाम को दीपक जलाकर व्रत खोलें। व्रत जितना सहज हो उतना ही रखें।

कब: शनिवार; परंपरा में शुक्ल पक्ष के पहले शनिवार से शुरू करते हैं

परंपरा
करें / न करें

करें

  • पानी पीते रहें; अपनी क्षमता के अनुसार ही

न करें

  • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें
शनि

एकादशी (वैकल्पिक)

महीने की दोनों एकादशी पर अनाज छोड़कर फलाहार। यह किसी एक ग्रह का नहीं, पूरे मन-अनुशासन का व्रत माना जाता है।

कब: हर एकादशी

परंपरा
करें / न करें

न करें

  • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें
राहु
राहु

शनिवार का व्रत (राहु के लिए)

राहु का अपना वार नहीं है; परंपरा में राहु के लिए प्रायः शनिवार का व्रत रखा जाता है। दिन में एक बार सादा भोजन या फलाहार।

कब: शनिवार

परंपरा
करें / न करें

न करें

  • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें
राहु

एकादशी (वैकल्पिक)

महीने की दोनों एकादशी पर अनाज छोड़कर फलाहार; यह मन के अनुशासन का व्रत माना जाता है।

कब: हर एकादशी

परंपरा
करें / न करें

न करें

  • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें
केतु
केतु

संकष्टी चतुर्थी (गणेश) का व्रत

केतु का अपना वार नहीं है। परंपरा केतु को गणेश जी से जोड़ती है, इसलिए कई लोग संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखते हैं: दिन में फलाहार, चंद्रोदय के बाद भोजन। कुछ जगह मंगलवार या शनिवार का व्रत भी रखा जाता है।

कब: हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी

परंपरा
करें / न करें

न करें

  • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें
केतु

एकादशी (वैकल्पिक)

महीने की दोनों एकादशी पर अनाज छोड़कर फलाहार; यह मन के अनुशासन का व्रत माना जाता है।

कब: हर एकादशी

परंपरा
करें / न करें

न करें

  • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें