सूर्य: आत्मा और पिता का कारक
शास्त्र सूर्य को कालपुरुष की आत्मा और पिता का कारक बताता है। इसलिए परंपरा सूर्य के उपाय में पिता और अपने आत्म-सम्मान से जुड़े आचरण को रखती है।
कब: हमेशा
हर ग्रह कुछ रिश्तों और गुणों का कारक है: परंपरा सूर्य को पिता और आत्म-सम्मान से, शनि को सेवा, अनुशासन और मेहनतकश लोगों से जोड़ती है। उनसे जुड़े लोगों का आदर और वह गुण जीवन में उतारना, यही इस उपाय का रूप है।
ग्रह जिन बातों का कारक है, उनसे जुड़ा रोज़ का व्यवहार: बड़ों का आदर, ईमानदारी, अनुशासन।
बड़ों की बात मानना और मन को शुद्ध रखना: प्रश्न मार्ग में प्रतिकूल गोचर के प्रसंग में।
शास्त्र · Praśna Mārga XXII.31 (Raman tr.)
शास्त्र सूर्य को कालपुरुष की आत्मा और पिता का कारक बताता है। इसलिए परंपरा सूर्य के उपाय में पिता और अपने आत्म-सम्मान से जुड़े आचरण को रखती है।
कब: हमेशा
पिता का हाल रोज़ पूछें, उनकी बात ध्यान से सुनें। काम पर समय की पाबंदी और ईमानदारी रखें; अपने आत्म-सम्मान के साथ दूसरों के सम्मान का भी ध्यान रखें।
कब: रोज़
करें
न करें
बड़ों की बात मानना, वेद-पुराण सुनना और मन को शुद्ध रखना: प्रश्न मार्ग इसे सभी ग्रहों के लिए बताता है।
कब: जब भी मन हो
शास्त्र चंद्र को कालपुरुष का मन और माता का कारक बताता है। इसलिए परंपरा चंद्र के उपाय में माँ और अपने मन की देखभाल को रखती है।
कब: हमेशा
माँ (या माँ-समान महिला) से रोज़ बात करें, उनका आशीर्वाद लें। नींद पूरी लें, कुछ देर चुपचाप बैठें या टहलें।
कब: रोज़
करें
न करें
बड़ों की बात मानना, वेद-पुराण सुनना और मन को शुद्ध रखना: प्रश्न मार्ग इसे सभी ग्रहों के लिए बताता है।
कब: जब भी मन हो
शास्त्र मंगल को कालपुरुष का बल और भाई-बहनों का कारक बताता है। इसलिए परंपरा मंगल के उपाय में भाई-बहनों से रिश्ते और अपने साहस-ऊर्जा के सही उपयोग को रखती है।
कब: हमेशा
भाई-बहनों से नियमित बात करें, पुराने मनमुटाव सुलझाने की पहल करें। रोज़ थोड़ा व्यायाम या खेल; ज़मीन-जायदाद के मामलों में साफ़ लिखा-पढ़ी रखें।
कब: रोज़
करें
न करें
बड़ों की बात मानना, वेद-पुराण सुनना और मन को शुद्ध रखना: प्रश्न मार्ग इसे सभी ग्रहों के लिए बताता है।
कब: जब भी मन हो
प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए यह आचरण बताता है: बड़ों की बात मानना, वेद-पुराण सुनना, मन को शुद्ध रखना। रोज़ कुछ देर कोई अच्छा ग्रंथ पढ़ें या सुनें।
कब: रोज़
फलदीपिका बुध को विद्वान, कारीगर, कुशल हिसाब रखने वाले और विष्णु-भक्त से जोड़ती है। इसलिए बुध के उपाय में पढ़ाई, लेखन और ईमानदार लेन-देन पर ध्यान दिया जाता है (आचरण का यह रूप परंपरा है)।
कब: —
बोलने से पहले सोचें, किसी का मज़ाक न उड़ाएँ, हिसाब साफ़ रखें, वादा किया हो तो समय पर निभाएँ, और बहन, बुआ, मौसी व छोटे बच्चों से प्यार से बात करें।
कब: रोज़
करें
न करें
प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए यह आचरण बताता है: बड़ों की बात मानना, वेद-पुराण सुनना, मन को शुद्ध रखना। रोज़ कुछ देर कोई अच्छा ग्रंथ पढ़ें या सुनें।
कब: रोज़
फलदीपिका भाव-कारकों में गुरु को पाँचवें (संतान) और नौवें (धर्म, भाग्य) भाव का कारक बताती है। इसलिए गुरु के उपाय में बच्चों, शिक्षकों और धर्म के प्रति आदर पर ध्यान दिया जाता है (आचरण का यह रूप परंपरा है)।
कब: —
अपने शिक्षकों, गुरुजन और बड़ों को समय-समय पर याद करें, उनसे मिलें या फ़ोन करें; बच्चों को धैर्य से सिखाएँ; किसी को सलाह दें तो ईमानदारी से दें।
कब: रोज़, ख़ासकर गुरुवार
करें
न करें
प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए यह आचरण बताता है: बड़ों की बात मानना, वेद-पुराण सुनना, मन को शुद्ध रखना। रोज़ कुछ देर कोई अच्छा ग्रंथ पढ़ें या सुनें।
कब: रोज़
फलदीपिका भाव-कारकों में शुक्र को सातवें भाव (जीवनसाथी) का कारक बताती है। इसलिए शुक्र के उपाय में जीवनसाथी के सम्मान पर ध्यान दिया जाता है (आचरण का यह रूप परंपरा है)।
कब: —
जीवनसाथी की बात ध्यान से सुनें, घर की स्त्रियों का आदर करें, घर और अपने आप को साफ़-सुथरा रखें, और संगीत, चित्रकला या किसी कला के लिए थोड़ा समय निकालें।
कब: रोज़, ख़ासकर शुक्रवार
न करें
प्रश्न मार्ग गोचर में ग्रह प्रतिकूल हों तो बड़ों की बात मानने, अच्छी बातें सुनने और मन को पवित्र रखने को कहता है। रोज़ घर के किसी बुज़ुर्ग से कुछ देर बात करें, उनकी सलाह सुनें।
कब: रोज़
BPHS के 'ग्रह-मंडल' में शनि को सेवक का स्थान दिया गया है। इसी से परंपरा शनि को सेवा, मेहनत और मेहनतकश लोगों से जोड़ती है।
कब: —
घर या काम पर मदद करने वालों (सफ़ाई कर्मी, ड्राइवर, घरेलू सहायक, मज़दूर) से आदर से बोलें और उनकी मज़दूरी समय पर दें। जो काम हाथ में लें, उसे धीरज से पूरा करें; समय और वादे के पक्के रहें।
कब: रोज़
करें
न करें
प्रश्न मार्ग गोचर में ग्रह प्रतिकूल हों तो बड़ों की बात मानने, अच्छी बातें सुनने और मन को पवित्र रखने को कहता है।
कब: रोज़
परंपरा राहु को नियम, अनजान लोगों और ईमानदारी से जोड़ती है। रोज़ के काम में शॉर्टकट से बचें, नियम (ट्रैफ़िक, टैक्स, दफ़्तर) मानें, और बात साफ़ रखें। अनजान या नए लोगों से भी आदर से पेश आएँ।
कब: रोज़
करें
न करें
प्रश्न मार्ग गोचर में ग्रह प्रतिकूल हों तो बड़ों की बात मानने, अच्छी बातें सुनने और मन को पवित्र रखने को कहता है।
कब: रोज़
BPHS (कारकांश से 12वें भाव के प्रसंग में) केतु को मोक्ष से जोड़ता है। इसी से परंपरा केतु को वैराग्य, ध्यान और साधना से जोड़ती है।
कब: —
रोज़ 10 मिनट शांत बैठें, साँस पर ध्यान दें या कोई प्रार्थना करें। जो चीज़ काम की न हो, उसे किसी ज़रूरतमंद को दे दें; ज़रूरत से ज़्यादा जमा न करें।
कब: रोज़, सुबह या रात
करें
न करें
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