मंत्र, स्तोत्र और पाठ

ग्रह का बीज मंत्र, उसका स्तोत्र, या दशा के अनुसार गीता का अध्याय: रोज़ कुछ मिनट, श्रद्धा से।

ग्रह का नाम-मंत्र, बीज मंत्र या स्तोत्र, रोज़ थोड़ी देर शांत मन से।

ग्रहों के वैदिक मंत्र और जप-संख्या BPHS में हैं; बीज मंत्र और स्तोत्र परंपरा हैं।

शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.17–20
BPHS (Santhanam) 84.17–20

सूर्य
सूर्य

वैदिक मंत्र: 'आ कृष्णेन रजसा…'

BPHS सूर्य का वैदिक मंत्र और उसकी जप-संख्या 7,000 बताता है। यह मंत्र किसी जानकार से सीखकर, शुद्ध उच्चारण से जपें।

कब: रविवार से शुरू, सूर्योदय के समय

शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.17–20
BPHS (Santhanam) 84.17–20
सूर्य

बीज मंत्र और नाम-मंत्र

'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' या सरल 'ॐ सूर्याय नमः' की एक माला (108)। मन को एकाग्र करने में सहायक माना जाता है।

कब: रोज़ सुबह, ख़ास कर रविवार

परंपरा
करें / न करें

करें

  • जप के बाद तांबे के लोटे से सूर्य को जल (अर्घ्य) दें।
सूर्य

आदित्य हृदय स्तोत्र

BPHS (दशा-फल अध्याय में) सूर्य से जुड़े समय के लिए आदित्य हृदय के पाठ का उल्लेख करता है। रविवार को एक पाठ।

कब: रविवार सुबह

शास्त्र · BPHS (Santhanam) 56.56–57 (Jupiter dasha, Sun antardasha)
BPHS (Santhanam) 56.56–57 (Jupiter dasha, Sun antardasha)
चंद्र
चंद्र

वैदिक मंत्र: 'इमं देवा…'

BPHS चंद्र का वैदिक मंत्र और उसकी जप-संख्या 11,000 बताता है। यह मंत्र किसी जानकार से सीखकर, शुद्ध उच्चारण से जपें।

कब: सोमवार से शुरू, शाम को

शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.17–20
BPHS (Santhanam) 84.17–20
चंद्र

बीज मंत्र और नाम-मंत्र

'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः' या सरल 'ॐ चन्द्राय नमः' / 'ॐ सोमाय नमः' की एक माला (108)। मन को शांत करने में सहायक माना जाता है।

कब: सोमवार शाम, या रोज़

परंपरा
करें / न करें

करें

  • जप शांत जगह, एक ही समय पर करें; गिनती के लिए माला रखें।
चंद्र

'ॐ नमः शिवाय' और शिव-पूजा

चंद्र शिव के मस्तक पर है, इसलिए परंपरा चंद्र के लिए 'ॐ नमः शिवाय' का जप और शिवलिंग पर जल-दूध चढ़ाने को रखती है।

कब: सोमवार

परंपरा
मंगल
मंगल

वैदिक मंत्र: 'अग्निर्मूर्धा…'

BPHS मंगल का वैदिक मंत्र और उसकी जप-संख्या बताता है: 10,000 (कुछ प्रतियों में 11,000)। यह मंत्र किसी जानकार से सीखकर, शुद्ध उच्चारण से जपें।

कब: मंगलवार से शुरू, सुबह

शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.17–20
BPHS (Santhanam) 84.17–20
मंगल

बीज मंत्र और नाम-मंत्र

'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः' या सरल 'ॐ भौमाय नमः' / 'ॐ अंगारकाय नमः' की एक माला (108)। मन को एकाग्र करने में सहायक माना जाता है।

कब: मंगलवार सुबह, या रोज़

परंपरा
करें / न करें

करें

  • जप शांत जगह, एक ही समय पर करें; गिनती के लिए माला रखें।
मंगल

हनुमान चालीसा

उत्तर भारत की परंपरा में मंगल के लिए मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ।

कब: मंगलवार

परंपरा
मंगल

रुद्र जप

BPHS (दशा-फल अध्याय में) मंगल से जुड़े समय के लिए रुद्र जप और लाल बैल के दान का उल्लेख करता है।

कब: मंगलवार या सोमवार

शास्त्र · BPHS (Santhanam) 54.6–8 (Mars dasha, Mars antardasha)
BPHS (Santhanam) 54.6–8 (Mars dasha, Mars antardasha)
बुध
बुध

नाम मंत्र: ॐ बुधाय नमः

सुबह नहाकर शांत जगह बैठें और 'ॐ बुधाय नमः' का 108 बार (एक माला) जाप करें।

कब: बुधवार सुबह, या रोज़

परंपरा
करें / न करें

करें

  • जाप को मन को एकाग्र करने में सहायक माना जाता है; गिनती से ज़्यादा ध्यान भाव पर रखें
बुध

बीज मंत्र: ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः

तांत्रिक परंपरा का बीज मंत्र; बुधवार को 108 बार जाप करें।

कब: बुधवार

परंपरा
बुध

विष्णु सहस्रनाम का पाठ

बृहत् पराशर होरा शास्त्र महाविष्णु को बुध का अधिदेवता बताता है। बुधवार को विष्णु सहस्रनाम पढ़ें या सुनें (स्तोत्र का चुनाव परंपरा है)।

कब: बुधवार

शास्त्र · BPHS (Santhanam) 3.18
BPHS (Santhanam) 3.18
करें / न करें

न करें

  • उच्चारण कठिन लगे तो सुनना भी पूरा है; ग़लत उच्चारण का डर न रखें
गुरु (बृहस्पति)
गुरु

नाम मंत्र: ॐ बृहस्पतये नमः

सुबह नहाकर शांत जगह बैठें और 'ॐ बृहस्पतये नमः' का 108 बार (एक माला) जाप करें।

कब: गुरुवार सुबह, या रोज़

परंपरा
करें / न करें

करें

  • जाप को मन को एकाग्र करने में सहायक माना जाता है; गिनती से ज़्यादा ध्यान भाव पर रखें
गुरु

बीज मंत्र: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः

तांत्रिक परंपरा का बीज मंत्र; गुरुवार को 108 बार जाप करें।

कब: गुरुवार

परंपरा
गुरु

विष्णु सहस्रनाम का पाठ

गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम पढ़ें या सुनें।

कब: गुरुवार

परंपरा
करें / न करें

न करें

  • उच्चारण कठिन लगे तो सुनना भी पूरा है
शुक्र
शुक्र

नाम मंत्र: ॐ शुक्राय नमः

सुबह नहाकर शांत जगह बैठें और 'ॐ शुक्राय नमः' का 108 बार (एक माला) जाप करें।

कब: शुक्रवार सुबह, या रोज़

परंपरा
करें / न करें

करें

  • जाप को मन को एकाग्र करने में सहायक माना जाता है; गिनती से ज़्यादा ध्यान भाव पर रखें
शुक्र

बीज मंत्र: ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः

तांत्रिक परंपरा का बीज मंत्र; शुक्रवार को 108 बार जाप करें।

कब: शुक्रवार

परंपरा
शुक्र

श्री सूक्त या दुर्गा सप्तशती का पाठ

फलदीपिका ग्रहों के देवताओं में शुक्र की अधिदेवता लक्ष्मी बताती है। शुक्रवार को श्री सूक्त पढ़ें या सुनें, या दुर्गा सप्तशती का कोई अध्याय (स्तोत्र का चुनाव परंपरा है)।

कब: शुक्रवार

शास्त्र · Phaladīpikā II.27 (V. S. Sastri)
Phaladīpikā II.27 (V. S. Sastri)
करें / न करें

न करें

  • उच्चारण कठिन लगे तो सुनना भी पूरा है
शनि
शनि

नाम-मंत्र: ॐ शनैश्चराय नमः

शांत बैठकर 11 या 108 बार (एक माला) जपें। मन को एकाग्र करने में सहायक माना जाता है।

कब: शनिवार, सुबह या शाम

परंपरा
करें / न करें

करें

  • धीरे और साफ़ उच्चारण
शनि

बीज मंत्र: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

तांत्रिक परंपरा का बीज मंत्र। 108 बार, रुद्राक्ष या किसी भी माला पर।

कब: शनिवार, सूर्यास्त के बाद

परंपरा
शनि

पाठ: हनुमान चालीसा या शनि स्तोत्र

उत्तर भारत की परंपरा में शनिवार को हनुमान चालीसा पढ़ी जाती है; दशरथ-कृत शनि स्तोत्र भी पढ़ा जाता है। जो सहज लगे, वह एक पाठ।

कब: शनिवार

परंपरा
राहु
राहु

नाम-मंत्र: ॐ राहवे नमः

शांत बैठकर 11 या 108 बार जपें। मन को एकाग्र करने में सहायक माना जाता है।

कब: शनिवार, शाम

परंपरा
करें / न करें

करें

  • धीरे और साफ़ उच्चारण
राहु

बीज मंत्र: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः

तांत्रिक परंपरा का बीज मंत्र। 108 बार, किसी भी माला पर।

कब: शनिवार, सूर्यास्त के बाद

परंपरा
राहु

देवी दुर्गा की उपासना

BPHS (कारकांश से 12वें भाव के प्रसंग में) राहु को दुर्गा-उपासना से जोड़ता है। परंपरा में दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है; जो सहज लगे, वह।

कब: शनिवार, या नवरात्रि

शास्त्र · BPHS (Santhanam) 33.63–74
BPHS (Santhanam) 33.63–74
केतु
केतु

नाम-मंत्र: ॐ केतवे नमः

शांत बैठकर 11 या 108 बार जपें। मन को एकाग्र करने में सहायक माना जाता है।

कब: मंगलवार या शनिवार

परंपरा
करें / न करें

करें

  • धीरे और साफ़ उच्चारण
केतु

बीज मंत्र: ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः

तांत्रिक परंपरा का बीज मंत्र। 108 बार, किसी भी माला पर।

कब: मंगलवार या शनिवार

परंपरा
केतु

गणेश जी की उपासना

BPHS (कारकांश से 12वें भाव के प्रसंग में) अकेले केतु को गणेश या सुब्रह्मण्य की उपासना से जोड़ता है। परंपरा में 'ॐ गं गणपतये नमः' का जप या गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ किया जाता है।

कब: बुधवार या चतुर्थी

शास्त्र · BPHS (Santhanam) 33.63–74
BPHS (Santhanam) 33.63–74

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