काम शुरू करने से पहले मीठा और पानी
घर से निकलने या नया काम शुरू करने से पहले थोड़ा गुड़ या मीठा खाकर पानी पिएँ।
कब: रोज़
लाल किताब एक अलग, लोकप्रिय परंपरा है, जिसके अपने सरल घरेलू उपाय हैं; यहाँ वे उसी नाम से दिखाए गए हैं। जैसे गुरु (बृहस्पति) के लिए माथे पर केसर या हल्दी का तिलक, या शनि के लिए मज़दूरों को भोजन या मदद।
लाल किताब (एक अलग परंपरा) के सरल, हानिरहित टोटके; नदी, जीव या संपत्ति को नुकसान वाला कुछ नहीं।
लाल किताब उत्तर भारत की एक लोकप्रिय, अलग परंपरा है; इसके उपाय यहाँ उसी नाम से अलग दिखाए गए हैं।
घर से निकलने या नया काम शुरू करने से पहले थोड़ा गुड़ या मीठा खाकर पानी पिएँ।
कब: रोज़
कोई भी ज़रूरी काम पिता (या पिता-समान बुज़ुर्ग) के पैर छूकर शुरू करें।
कब: ज़रूरी काम से पहले
सच बोलने का अभ्यास और मांस-मदिरा से परहेज़, ख़ास कर रविवार को।
कब: ख़ास कर रविवार
न करें
कोई भी ज़रूरी काम माँ (या माँ-समान बुज़ुर्ग महिला) के पैर छूकर शुरू करें।
कब: ज़रूरी काम से पहले
रात को सिरहाने एक बर्तन में पानी रखकर सोएँ और सुबह वह पानी किसी पेड़ की जड़ में डाल दें।
कब: रात / अगली सुबह
घर में चाँदी का कोई छोटा टुकड़ा या सिक्का हो तो उसे साफ़ करके अपने पास (पर्स में) रखें।
कब: सोमवार से
न करें
मंगलवार को हनुमान जी को बताशे या गुड़-चने का भोग लगाकर लोगों में बाँटें।
कब: मंगलवार
गुड़ वाली मीठी रोटी बनाकर किसी ज़रूरतमंद को खिलाएँ।
कब: मंगलवार
भाइयों (या भाई-समान लोगों) की सलाह का आदर करें और उनसे मेल बनाए रखें; लाल किताब इसे मंगल का मुख्य उपाय मानती है।
कब: हमेशा
न करें
लाल किताब बुध को बहन, बेटी, बुआ और मौसी से जोड़ती है। उनसे प्रेम से मिलें, और कभी-कभी कोई छोटी हरी चीज़ (हरी चूड़ी या रुमाल) भेंट करें।
कब: बुधवार
लाल किताब बुध को दाँतों से जोड़ती है; रोज़ ठीक से दाँत साफ़ करें (यह आदत है, इलाज नहीं; दाँत की तकलीफ़ में डेंटिस्ट पहले)।
कब: रोज़
बुधवार को थोड़ी साबुत मूंग किसी मंदिर या ज़रूरतमंद को दें।
कब: बुधवार
न करें
नहाने के बाद माथे पर केसर या हल्दी का छोटा तिलक लगाएँ।
कब: रोज़ या गुरुवार
न करें
लाल किताब गुरु को पिता, दादा और गुरुजन से जोड़ती है; उनका आदर करें और गुरुवार को उनका आशीर्वाद लें।
कब: गुरुवार
गुरुवार को थोड़ी चने की दाल या हल्दी किसी मंदिर में दें।
कब: गुरुवार
न करें
शुक्रवार को किसी गाय को थोड़ी ज्वार या हरा चारा खिलाएँ।
कब: शुक्रवार
लाल किताब शुक्र को साफ़-सफ़ाई और सुगंध से जोड़ती है; साफ़ कपड़े पहनें और हल्का इत्र या चंदन लगाएँ।
कब: रोज़, ख़ासकर शुक्रवार
न करें
लाल किताब शुक्र को जीवनसाथी से जोड़ती है; जीवनसाथी से आदर से बात करें और घर के कामों में हाथ बँटाएँ।
कब: रोज़
एक कटोरी सरसों के तेल में अपना चेहरा देखें और वह तेल किसी ज़रूरतमंद को या शनि मंदिर में दे दें।
कब: शनिवार
न करें
किसी मज़दूर या सफ़ाई कर्मी को भोजन, पानी या उनके काम की कोई चीज़ आदर से दें।
कब: शनिवार, या कभी भी
लाल किताब शनि के लिए शराब और नशे से दूर रहने को कहती है।
कब: हमेशा
रात को सिरहाने एक मुट्ठी जौ रखें और सुबह उसे पक्षियों को डाल दें।
कब: शनिवार की रात / रविवार सुबह, या जब चाहें
लाल किताब राहु के लिए रसोई में या उसके पास बैठकर भोजन करने की बात कहती है।
कब: रोज़
लाल किताब राहु को ससुराल से जोड़ती है; ससुराल वालों से आदर और मेल-जोल रखें।
कब: हमेशा
न करें
लाल किताब केतु को कुत्ते से जोड़ती है; किसी कुत्ते को रोटी दें (परंपरा में काले-सफ़ेद कुत्ते की बात आती है, पर कोई भी कुत्ता ठीक है)।
कब: रोज़, या जब हो सके
न करें
किसी मंदिर में या किसी ज़रूरतमंद को काले-सफ़ेद (दो-रंगे) कंबल का दान।
कब: सर्दियों में, या जब सुविधा हो
लाल किताब केतु को संतान और भांजे से जोड़ती है; उनके साथ समय बिताएँ, उनकी पढ़ाई या ज़रूरत में मदद करें।
कब: हमेशा
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