गोचर उदाहरण कुंडली
आज, 15 अक्टूबर 2026
| 1 | मकर | |
| 2 | कुंभ | रा |
| 3 | मीन | श |
| 4 | मेष | |
| 5 | वृषभ | |
| 6 | मिथुन | |
| 7 | कर्क | मं गु |
| 8 | सिंह | के |
| 9 | कन्या | सू |
| 10 | तुला | बु शु |
| 11 | वृश्चिक | चं |
| 12 | धनु |
| ग्रह | आज की राशि | लग्न से भाव | चंद्र से भाव |
|---|---|---|---|
| सूर्य | कन्या | 9 | 11 |
| चंद्र | वृश्चिक | 11 | 1 |
| मंगल | कर्क | 7 | 9 |
| बुध | तुला | 10 | 12 |
| गुरु (बृहस्पति) | कर्क | 7 | 9 |
| शुक्र | तुला | 10 | 12 |
| शनि | मीन | 3 | 5 |
| राहु | कुंभ | 2 | 4 |
| केतु | सिंह | 8 | 10 |
सूर्य: ग्यारहवें भाव में सूर्य: परंपरा इसे मान-सम्मान और मेहनत के फल से जोड़ती है। दोस्तों और बड़ों से जुड़ाव बढ़ाएँ।
चंद्र: जन्म राशि पर चंद्र: परंपरा इसे मन खिलने और नई ताज़गी का समय मानती है। अपनों के साथ अच्छा समय बिताएँ।
मंगल: नौवें भाव में मंगल: रफ़्तार कुछ धीमी लग सकती है; बड़ों और गुरुओं से सलाह लेकर कदम बढ़ाएँ।
बुध: बारहवें भाव में बुध: बोलचाल में विनम्रता और काग़ज़ों में सावधानी रखें। अपनी बात सादगी से कहें।
गुरु: नौवें भाव में गुरु: परंपरा इसे भाग्य, धर्म और समृद्धि का समय मानती है। गुरु और बड़ों का आशीर्वाद लें।
शुक्र: बारहवें भाव में शुक्र: परंपरा इसे धन और सुख-साधन से जोड़ती है; बारहवाँ भाव होते हुए भी यहाँ शुक्र अनुकूल माना जाता है।
शनि: पाँचवें भाव में शनि: मन उलझा लगे तो बातें लिखकर सुलझाएँ। पढ़ाई और बच्चों के मामलों में नियम और धैर्य रखें।
राहु: चौथे भाव में राहु: घर में मन अशांत लगे तो सादी दिनचर्या और अपनों से बातचीत सहारा देती है।
केतु: दसवें भाव में केतु: परंपरा इसे काम में लाभ और बिना दिखावे की मेहनत का समय मानती है।
गोचर के भाव जन्म के चंद्रमा की राशि (चंद्र लग्न) से गिने जाते हैं, जैसा शास्त्रीय गोचर में होता है। वेध, अष्टकवर्ग और ग्रह की अपनी स्थिति इसे बदल सकते हैं। गोचर कई बातों में से सिर्फ़ एक है; दशा और पूरी कुंडली साथ में देखी जाती है।
ये विषय हैं, घटनाओं की भविष्यवाणी नहीं।
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