रिश्ते और विवाह के लिए उपाय

रिश्ते धैर्य और समझ से बनते हैं। परंपरा विवाह को 7वें भाव और शुक्र से जोड़ती है; नीचे ₹0 से शुरू होने वाले विकल्प हैं, जिनमें से आप जो चाहें चुनें।

परंपरा इस विषय में किन ग्रहों को देखती है

  • 7वें भाव (जीवनसाथी) का स्वामी परंपरा
  • चल रही महादशा का स्वामी शास्त्र
  • शुक्र: 7वें भाव का कारक
    शास्त्र · Phaladīpikā XV.17 (V. S. Sastri)
    Phaladīpikā XV.17 (V. S. Sastri)
  • गुरु (बृहस्पति): परंपरा स्त्री की कुंडली में पति का कारक गुरु को भी मानती है परंपरा

मंगल दोष यहाँ उपाय बेचने का कारण नहीं: उपयोगकर्ता पूछे तो केवल शांत जाँच, हमारे पेज concept/mangal-dosha के अनुसार। विवाह के बारे में कोई वादा नहीं लिखा जाता।

आपकी कुंडली में जुड़े ग्रह

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    मिलान देखना हो तो → कुंडली मिलान

    शुक्र

    आहार (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह के वार पर उससे जुड़ा सादा अन्न या फल खाना या बाँटना।

    शुक्र

    शुक्र का अनाज: सेम (लोबिया जैसी फली)

    शुक्रवार को खाने में चावल, सफ़ेद लोबिया (सेम) या राजमा शामिल करें।

    कब: शुक्रवार

    शास्त्र · Phaladīpikā (V. S. Sastri) II.28
    Phaladīpikā (V. S. Sastri) II.28
    करें / न करें

    करें

    • मात्रा अपनी सेहत और डॉक्टर की सलाह के हिसाब से रखें
    शुक्र

    दूध, दही, खीर, मिश्री

    शुक्रवार को दूध, दही या थोड़ी खीर लें; पूजा में मिश्री का भोग लगाएँ।

    कब: शुक्रवार

    परंपरा
    करें / न करें

    न करें

    • डॉक्टर ने दूध या मीठा मना किया हो तो न लें; सेहत के लिए डॉक्टर ही पहला सहारा

    व्रत (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह के वार का व्रत या एकादशी, अपनी सेहत के हिसाब से; बीमारी, गर्भावस्था या दवा में डॉक्टर से पूछें।

    शुक्र

    शुक्रवार का व्रत

    शुक्रवार को एक समय सादा, सफ़ेद भोजन (जैसे खीर, चावल) लें; लक्ष्मी जी या देवी का स्मरण करें। उत्तर भारत में शुक्रवार का संतोषी माता व्रत भी प्रचलित है, जिसमें खट्टा नहीं खाया जाता।

    कब: शुक्रवार, शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से शुरुआत

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • कितने शुक्रवार करने हैं, यह अपनी सुविधा से तय करें; परंपरा में प्रायः 16 या 21 बताए जाते हैं

    न करें

    • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें

    आचरण / कर्म (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह जिन बातों का कारक है, उनसे जुड़ा रोज़ का व्यवहार: बड़ों का आदर, ईमानदारी, अनुशासन।

    शुक्र

    बड़ों का कहा मानना, अच्छे ग्रंथ सुनना, मन साफ़ रखना

    प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए यह आचरण बताता है: बड़ों की बात मानना, वेद-पुराण सुनना, मन को शुद्ध रखना। रोज़ कुछ देर कोई अच्छा ग्रंथ पढ़ें या सुनें।

    कब: रोज़

    शास्त्र · Praśna Mārga XXII.31 (Raman tr.)
    Praśna Mārga XXII.31 (Raman tr.)
    शुक्र

    शुक्र किन बातों का कारक है

    फलदीपिका भाव-कारकों में शुक्र को सातवें भाव (जीवनसाथी) का कारक बताती है। इसलिए शुक्र के उपाय में जीवनसाथी के सम्मान पर ध्यान दिया जाता है (आचरण का यह रूप परंपरा है)।

    कब: —

    शास्त्र · Phaladīpikā XV.17 (V. S. Sastri)
    Phaladīpikā XV.17 (V. S. Sastri)
    शुक्र

    जीवनसाथी और घर की स्त्रियों का सम्मान

    जीवनसाथी की बात ध्यान से सुनें, घर की स्त्रियों का आदर करें, घर और अपने आप को साफ़-सुथरा रखें, और संगीत, चित्रकला या किसी कला के लिए थोड़ा समय निकालें।

    कब: रोज़, ख़ासकर शुक्रवार

    परंपरा
    करें / न करें

    न करें

    • किसी स्त्री का अपमान, या दिखावे के लिए फ़िज़ूलख़र्ची न करें

    रंग / वस्त्र / दिशा (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह के वार पर उसके रंग के कपड़े या फूल, और उससे जुड़ी दिशा का ध्यान।

    शुक्र

    सफ़ेद रंग

    प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए उनके रंग के वस्त्र और फूल बताता है; शुक्र का रंग सफ़ेद है। शुक्रवार को सफ़ेद या हल्के रंग के साफ़ कपड़े पहनें, पूजा में सफ़ेद फूल रखें।

    कब: शुक्रवार

    शास्त्र · Praśna Mārga XXII.27 (Raman tr.)
    Praśna Mārga XXII.27 (Raman tr.)
    करें / न करें

    करें

    • क्रीम, हल्का गुलाबी जैसे हल्के रंग भी चलेंगे
    शुक्र

    दिशा: आग्नेय (दक्षिण-पूर्व)

    फलदीपिका शुक्र की दिशा दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) बताती है। पूजा में शुक्र का स्थान दक्षिण-पूर्व में रखें।

    कब: पूजा के समय

    शास्त्र · Phaladīpikā II.16 (V. S. Sastri)
    Phaladīpikā II.16 (V. S. Sastri)

    सेवा (₹0 मुफ़्त)

    गाय, कुत्ते, पक्षी या चींटियों को भोजन, बड़ों और ज़रूरतमंदों की सेवा; किसी जीव को कष्ट नहीं।

    शुक्र

    गाय को रोटी या चारा

    शुक्रवार को किसी गाय या गौशाला में रोटी या हरा चारा खिलाएँ।

    कब: शुक्रवार

    परंपरा
    करें / न करें

    न करें

    • बासी, नमकीन या प्लास्टिक में लिपटा खाना जानवरों को न दें
    शुक्र

    चींटियों को आटा और शक्कर

    घर से दूर किसी पेड़ के नीचे थोड़ा आटा और शक्कर मिलाकर रखें।

    कब: शुक्रवार

    लोक मान्यता

    वृक्ष सेवा (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह से जुड़े पेड़ या पौधे को पानी देना या लगाना (जैसे शनि के लिए शमी, गुरु के लिए पीपल)।

    शुक्र

    गूलर

    बृहत् पराशर होरा शास्त्र हवन में शुक्र की समिधा गूलर बताता है, इसलिए परंपरा इसे शुक्र का पेड़ मानती है। शुक्रवार को गूलर में जल दें या खुली जगह में गूलर लगाएँ (जल देना और लगाना परंपरा है)।

    कब: शुक्रवार

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.21–22
    BPHS (Santhanam) 84.21–22
    करें / न करें

    करें

    • गूलर बड़ा पेड़ बनता है; दीवार या नींव से दूर, अनुमति लेकर लगाएँ
    शुक्र

    सफ़ेद फूलों वाले पौधे

    घर में चमेली, मोगरा या रातरानी जैसे सफ़ेद फूलों वाले पौधे लगाकर शुक्रवार को उनकी देखभाल करें।

    कब: शुक्रवार

    परंपरा
    करें / न करें

    न करें

    • पेड़-पौधों की टहनी या फूल बेवजह न तोड़ें

    मंत्र जाप / स्तोत्र / पाठ (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह का नाम-मंत्र, बीज मंत्र या स्तोत्र, रोज़ थोड़ी देर शांत मन से।

    शुक्र

    नाम मंत्र: ॐ शुक्राय नमः

    सुबह नहाकर शांत जगह बैठें और 'ॐ शुक्राय नमः' का 108 बार (एक माला) जाप करें।

    कब: शुक्रवार सुबह, या रोज़

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • जाप को मन को एकाग्र करने में सहायक माना जाता है; गिनती से ज़्यादा ध्यान भाव पर रखें
    शुक्र

    बीज मंत्र: ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः

    तांत्रिक परंपरा का बीज मंत्र; शुक्रवार को 108 बार जाप करें।

    कब: शुक्रवार

    परंपरा
    शुक्र

    श्री सूक्त या दुर्गा सप्तशती का पाठ

    फलदीपिका ग्रहों के देवताओं में शुक्र की अधिदेवता लक्ष्मी बताती है। शुक्रवार को श्री सूक्त पढ़ें या सुनें, या दुर्गा सप्तशती का कोई अध्याय (स्तोत्र का चुनाव परंपरा है)।

    कब: शुक्रवार

    शास्त्र · Phaladīpikā II.27 (V. S. Sastri)
    Phaladīpikā II.27 (V. S. Sastri)
    करें / न करें

    न करें

    • उच्चारण कठिन लगे तो सुनना भी पूरा है

    दीप दान / मंदिर दर्शन / तीर्थ (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह के वार पर दीपक जलाना या उससे जुड़े मंदिर में दर्शन।

    शुक्र

    घी का दीप

    बृहत् पराशर होरा शास्त्र ग्रह-पूजा में उसके रंग के फूल-वस्त्र, चंदन, दीप और धूप चढ़ाने की बात कहता है। शुक्रवार शाम घर के मंदिर में घी का दीप जलाएँ और सफ़ेद फूल रखें (घी का दीप परंपरा है)।

    कब: शुक्रवार शाम

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.15–16
    BPHS (Santhanam) 84.15–16
    शुक्र

    लक्ष्मी या देवी मंदिर दर्शन

    शुक्रवार को लक्ष्मी जी या किसी देवी मंदिर में दर्शन करें, सफ़ेद फूल चढ़ाएँ; नवग्रह मंदिर में शुक्र के दर्शन भी कर सकते हैं।

    कब: शुक्रवार

    परंपरा
    करें / न करें

    न करें

    • मंदिर-दर्शन को किसी फल की शर्त न बनाएँ; यह श्रद्धा का समय है

    लाल किताब (₹0 मुफ़्त)

    लाल किताब (एक अलग परंपरा) के सरल, हानिरहित टोटके; नदी, जीव या संपत्ति को नुकसान वाला कुछ नहीं।

    शुक्र

    गाय को ज्वार या चारा

    शुक्रवार को किसी गाय को थोड़ी ज्वार या हरा चारा खिलाएँ।

    कब: शुक्रवार

    लाल किताब
    लाल किताब (अलग परंपरा)
    शुक्र

    साफ़ कपड़े और हल्की सुगंध

    लाल किताब शुक्र को साफ़-सफ़ाई और सुगंध से जोड़ती है; साफ़ कपड़े पहनें और हल्का इत्र या चंदन लगाएँ।

    कब: रोज़, ख़ासकर शुक्रवार

    लाल किताब
    लाल किताब (अलग परंपरा)
    करें / न करें

    न करें

    • सुगंध से एलर्जी हो तो न लगाएँ
    शुक्र

    जीवनसाथी का सम्मान

    लाल किताब शुक्र को जीवनसाथी से जोड़ती है; जीवनसाथी से आदर से बात करें और घर के कामों में हाथ बँटाएँ।

    कब: रोज़

    लाल किताब
    लाल किताब (अलग परंपरा)

    दान (₹0–₹51)

    ग्रह के वार पर उससे जुड़ी कोई छोटी चीज़ अपनी सामर्थ्य से किसी ज़रूरतमंद को देना।

    शुक्र

    शास्त्र में बताया दान: घोड़ा, चाँदी

    बृहत् पराशर होरा शास्त्र (84.25) शुक्र के लिए घोड़े का दान, और प्रश्न मार्ग चाँदी और सफ़ेद घोड़े का दान बताता है। यह जानकारी है; अपनी सामर्थ्य से बाहर कुछ न करें।

    कब: शुक्रवार

    शास्त्र · Praśna Mārga XXII.30 (Raman tr.)
    Praśna Mārga XXII.30 (Raman tr.)
    शुक्र

    आज का छोटा रूप: चावल, दूध, मिश्री, सफ़ेद कपड़ा

    शुक्रवार को किसी ज़रूरतमंद को चावल, दूध या मिश्री दें, या किसी स्त्री को साफ़ सफ़ेद कपड़ा।

    कब: शुक्रवार

    परंपरा
    करें / न करें

    न करें

    • उधार लेकर या दिखावे के लिए दान न करें
    शुक्र

    किसी को घी-चावल खिलाना

    बृहत् पराशर होरा शास्त्र शुक्र के लिए ब्राह्मण-भोजन में घी वाले चावल बताता है। आज का रूप (परंपरा): किसी ज़रूरतमंद को घी-चावल खिलाएँ।

    कब: शुक्रवार

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.23–24
    BPHS (Santhanam) 84.23–24

    औषधि स्नान (₹0–₹99)

    ग्रह से जुड़ी जड़ी-बूटी डाले पानी से स्नान; त्वचा पर जलन हो तो न करें।

    शुक्र

    ग्रह के अनुसार औषधि-जल से स्नान

    प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए 'उस ग्रह की औषधियों वाले जल' से स्नान बताता है।

    कब: —

    शास्त्र · Praśna Mārga XXII.32 (Raman tr.)
    Praśna Mārga XXII.32 (Raman tr.)
    शुक्र

    शुक्र के लिए: इलायची, सफ़ेद फूल, थोड़ा केसर

    बाल्टी भर पानी में दो-तीन कुटी इलायची, कुछ सफ़ेद फूल की पंखुड़ियाँ और दो-चार केसर के धागे डालकर स्नान करें। सूचियाँ परंपराओं में अलग-अलग मिलती हैं।

    कब: शुक्रवार सुबह

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • पहले हाथ पर थोड़ा लगाकर देखें; त्वचा पर जलन हो तो न करें

    न करें

    • कोई त्वचा रोग या एलर्जी हो तो डॉक्टर से पूछे बिना न करें; सेहत के लिए डॉक्टर पहले

    जड़ी / मूल

    ग्रह से जुड़ी पौधे की जड़, कपड़े या ताबीज़ में धारण; परंपराएँ अलग-अलग जड़ बताती हैं।

    शुक्र

    सरपंखा मूल या गूलर मूल

    परंपरा शुक्र के लिए सरपंखा की जड़ (कुछ परंपराओं में गूलर की जड़) बताती है: शुक्रवार को सफ़ेद कपड़े में बाँधकर या सफ़ेद धागे में बाँह पर धारण करते हैं।

    कब: शुक्रवार, शुक्ल पक्ष

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • भरोसेमंद जगह से लें; पहचान का तरीका 'असली कैसे पहचानें' गाइड में

    न करें

    • जड़ को खाने या दवा की तरह इस्तेमाल न करें

    असली कैसे पहचानें →

    रुद्राक्ष

    ग्रह से जुड़े मुख का रुद्राक्ष (जैसे शनि के लिए 7 मुखी), असली की जाँच के साथ।

    शुक्र

    छह मुखी रुद्राक्ष

    परंपरा छह मुखी रुद्राक्ष को शुक्र से जोड़ती है। सफ़ेद या लाल धागे में गले में या कलाई पर पहनें।

    कब: शुक्रवार

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • एक्स-रे या लैब रिपोर्ट वाला लें; मुखी की धारियाँ ऊपर से नीचे तक साफ़ दिखें

    न करें

    • चिपकाए या तराशे हुए 'रुद्राक्ष' से बचें; बहुत सस्ते या बहुत महँगे दावों पर भरोसा न करें

    असली कैसे पहचानें →

    यंत्र

    ताँबे या भोजपत्र पर ग्रह का अंक-यंत्र, पूजा-स्थान पर; किसी शक्ति का दावा नहीं।

    शुक्र

    शुक्र यंत्र

    ताँबे की प्लेट या भोजपत्र पर बना शुक्र यंत्र शुक्रवार को घर के मंदिर में रखें; पूजा के समय सफ़ेद फूल और दीप के साथ उसका स्मरण करें।

    कब: शुक्रवार

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • यंत्र को पूजा का एक आधार मानें; साफ़ और सूखी जगह रखें

    न करें

    • 'सिद्ध' या 'चमत्कारी' जैसे दावों पर ज़्यादा पैसे न दें

    असली कैसे पहचानें →

    संकल्प पूजा / जाप / हवन (पंडित से)

    पंडित जी से आपके नाम के संकल्प के साथ ग्रह का जाप या हवन; ख़र्च पहले से तय करें।

    शुक्र

    शुक्र का वैदिक मंत्र-जाप: 16,000

    बृहत् पराशर होरा शास्त्र शुक्र के वैदिक मंत्र (आरंभ: 'अन्नात्परिस्रुतो…') की जाप-संख्या 16,000 बताता है। पंडित संकल्प लेकर, ग्रह-पूजन के बाद यह जाप करते हैं; प्रायः कई दिन या कई पंडितों में बँटता है।

    कब: शुक्रवार से आरंभ

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.17–20
    BPHS (Santhanam) 84.17–20

    असली कैसे पहचानें →

    शुक्र

    गूलर की समिधा से हवन

    बृहत् पराशर होरा शास्त्र शुक्र के हवन में गूलर की समिधा, शहद-घी-दही या दूध के साथ, 108 या 28 आहुतियाँ बताता है।

    कब: जाप के बाद

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.21–22
    BPHS (Santhanam) 84.21–22

    असली कैसे पहचानें →

    शुक्र

    पंडित से संकल्प-पूजा: क्या होता है, कितना ख़र्च

    संकल्प, गणेश-पूजन, शुक्र-पूजन (सफ़ेद वस्त्र-फूल, चावल), मंत्र-जाप और छोटा हवन। आम तौर पर ₹251–₹2,100 (छोटी पूजा से लेकर हवन सहित); पूरी 16,000 जाप-संख्या का ख़र्च इससे ज़्यादा हो सकता है, पहले लिखित में पूछ लें।

    कब: शुक्रवार

    परंपरा
    करें / न करें

    न करें

    • डर दिखाकर या 'तुरंत फल' का वादा करके कराई जाने वाली पूजा से दूर रहें

    असली कैसे पहचानें →

    उपरत्न / रत्न

    केवल कुंडली के शुभ स्वामी ग्रह के लिए; पहले कम-ख़र्च उपरत्न, फिर प्रमाणपत्र वाला रत्न। कोई रत्न ज़रूरी नहीं।

    हर रत्न के साथ उपरत्न पहले दिखाएँ (कम ख़र्च), फिर रत्न। कोई रत्न 'ज़रूरी' नहीं; ₹0 उपाय हमेशा ऊपर।

    बच्चों (12 वर्ष से कम) के लिए कोई रत्न नहीं। गर्भावस्था, बीमारी या दुख के समय रत्न का प्रस्ताव नहीं (W12 नियम)।

    अपनी कुंडली में जाँचें

    शुक्र

    उपरत्न: सफ़ेद पुखराज (व्हाइट सफ़ायर), ज़रकन (व्हाइट ज़िरकॉन) या ओपल

    कम ख़र्च वाला विकल्प पहले। चाँदी या प्लैटिनम की अंगूठी में, मध्यमा या कनिष्ठा उँगली में, शुक्रवार को पहनते हैं (उपरत्न, धातु, उँगली, दिन: परंपरा)।

    कब: शुक्रवार, शुक्ल पक्ष

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • केवल तब, जब यह ग्रह आपकी कुंडली के लिए शुभ स्वामी हो (gem rule)
    • जन्म-समय पता हो तभी रत्न का विचार करें; परंपरा पहनने से पहले रत्न को 3–7 दिन पास रखकर देखने की बात कहती है, कुछ असहज लगे तो उतार दें

    असली कैसे पहचानें →

    शुक्र

    रत्न: हीरा

    प्रश्न मार्ग शुक्र का रत्न 'वज्र' (हीरा) बताता है, गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के प्रसंग में; कुंडली के शुभ स्वामी ग्रह के लिए रत्न पहनना आज की परंपरा है। चाँदी या प्लैटिनम, मध्यमा या कनिष्ठा उँगली, शुक्रवार (धातु, उँगली, दिन: परंपरा)।

    कब: शुक्रवार, शुक्ल पक्ष

    शास्त्र · Praśna Mārga XXII.29 (Raman tr.)
    Praśna Mārga XXII.29 (Raman tr.)
    करें / न करें

    करें

    • केवल तब, जब यह ग्रह आपकी कुंडली के लिए शुभ स्वामी हो (gem rule)
    • हमारे नियम में शुक्र इन लग्नों के लिए योग्य है: वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, कुंभ
    • ख़रीदें तो लैब सर्टिफ़िकेट (प्रमाणपत्र संख्या सहित) माँगें; पहचान का तरीका हमारी 'असली कैसे पहचानें' गाइड में है

    न करें

    • 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए रत्न नहीं; गर्भावस्था, बीमारी या दुख के समय रत्न का विचार न करें
    • कोई रत्न 'ज़रूरी' नहीं है; ₹0 वाले उपाय पहले हैं, और पहनना या न पहनना आपका चुनाव है

    असली कैसे पहचानें →

    गुरु

    आहार (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह के वार पर उससे जुड़ा सादा अन्न या फल खाना या बाँटना।

    गुरु

    गुरु का अनाज: चना (चने की दाल)

    गुरुवार को खाने में चने की दाल, बेसन की कढ़ी या चीला शामिल करें।

    कब: गुरुवार

    शास्त्र · Phaladīpikā (V. S. Sastri) II.28
    Phaladīpikā (V. S. Sastri) II.28
    करें / न करें

    करें

    • मात्रा अपनी सेहत और डॉक्टर की सलाह के हिसाब से रखें
    गुरु

    पीली चीज़ें: हल्दी, केला, पीले फल

    गुरुवार को खाने में हल्दी, केला, पपीता या आम जैसी पीली चीज़ें रखें।

    कब: गुरुवार

    परंपरा
    करें / न करें

    न करें

    • शुगर या किसी और कारण से डॉक्टर ने मीठे फल मना किए हों तो न लें; सेहत के लिए डॉक्टर ही पहला सहारा

    व्रत (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह के वार का व्रत या एकादशी, अपनी सेहत के हिसाब से; बीमारी, गर्भावस्था या दवा में डॉक्टर से पूछें।

    गुरु

    गुरुवार (बृहस्पतिवार) का व्रत

    गुरुवार को एक समय पीला, सादा भोजन (जैसे चने की दाल, बेसन) लें; सुबह विष्णु जी का स्मरण करें और बृहस्पतिवार व्रत-कथा पढ़ या सुन सकते हैं।

    कब: गुरुवार, शुक्ल पक्ष के गुरुवार से शुरुआत

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • कितने गुरुवार करने हैं, यह अपनी सुविधा से तय करें; परंपरा में प्रायः 16 बताए जाते हैं

    न करें

    • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें
    गुरु

    एकादशी व्रत

    परंपरा गुरु को विष्णु-भक्ति से जोड़ती है; एकादशी पर अन्न छोड़कर फलाहार या एक समय भोजन करें।

    कब: हर पक्ष की एकादशी

    परंपरा
    करें / न करें

    न करें

    • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें

    आचरण / कर्म (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह जिन बातों का कारक है, उनसे जुड़ा रोज़ का व्यवहार: बड़ों का आदर, ईमानदारी, अनुशासन।

    गुरु

    बड़ों का कहा मानना, अच्छे ग्रंथ सुनना, मन साफ़ रखना

    प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए यह आचरण बताता है: बड़ों की बात मानना, वेद-पुराण सुनना, मन को शुद्ध रखना। रोज़ कुछ देर कोई अच्छा ग्रंथ पढ़ें या सुनें।

    कब: रोज़

    शास्त्र · Praśna Mārga XXII.31 (Raman tr.)
    Praśna Mārga XXII.31 (Raman tr.)
    गुरु

    गुरु किन बातों का कारक है

    फलदीपिका भाव-कारकों में गुरु को पाँचवें (संतान) और नौवें (धर्म, भाग्य) भाव का कारक बताती है। इसलिए गुरु के उपाय में बच्चों, शिक्षकों और धर्म के प्रति आदर पर ध्यान दिया जाता है (आचरण का यह रूप परंपरा है)।

    कब: —

    शास्त्र · Phaladīpikā XV.17 (V. S. Sastri)
    Phaladīpikā XV.17 (V. S. Sastri)
    गुरु

    शिक्षक और गुरुजन का आदर

    अपने शिक्षकों, गुरुजन और बड़ों को समय-समय पर याद करें, उनसे मिलें या फ़ोन करें; बच्चों को धैर्य से सिखाएँ; किसी को सलाह दें तो ईमानदारी से दें।

    कब: रोज़, ख़ासकर गुरुवार

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • जो सीखा है, उसे किसी और को सिखाएँ

    न करें

    • गुरु, शिक्षक या धर्म-ग्रंथ का मज़ाक या अपमान न करें

    रंग / वस्त्र / दिशा (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह के वार पर उसके रंग के कपड़े या फूल, और उससे जुड़ी दिशा का ध्यान।

    गुरु

    पीला रंग

    प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए उनके रंग के वस्त्र और फूल बताता है; गुरु का रंग पीला है। गुरुवार को पीला कपड़ा या पीला रुमाल पहनें, पूजा में पीले फूल रखें।

    कब: गुरुवार

    शास्त्र · Praśna Mārga XXII.27 (Raman tr.)
    Praśna Mārga XXII.27 (Raman tr.)
    करें / न करें

    करें

    • हल्का पीला या केसरिया भी चलेगा
    गुरु

    दिशा: ईशान (उत्तर-पूर्व)

    फलदीपिका गुरु की दिशा उत्तर-पूर्व (ईशान) बताती है। पूजा या पढ़ाई के समय उत्तर-पूर्व की ओर मुँह कर सकते हैं, और घर का ईशान कोना साफ़ रखें।

    कब: पूजा या पढ़ाई के समय

    शास्त्र · Phaladīpikā II.16 (V. S. Sastri)
    Phaladīpikā II.16 (V. S. Sastri)

    सेवा (₹0 मुफ़्त)

    गाय, कुत्ते, पक्षी या चींटियों को भोजन, बड़ों और ज़रूरतमंदों की सेवा; किसी जीव को कष्ट नहीं।

    गुरु

    बड़ों और गुरुजन की सेवा

    गुरुवार को घर के बुज़ुर्गों, किसी शिक्षक या साधु-संत के लिए कोई छोटा काम करें, उनके पास बैठें, उनकी बात सुनें।

    कब: गुरुवार

    परंपरा
    गुरु

    गाय को भीगी चने की दाल और गुड़

    गुरुवार को किसी गाय या गौशाला में थोड़ी भीगी चने की दाल, गुड़ के एक टुकड़े के साथ, खिलाएँ।

    कब: गुरुवार

    लोक मान्यता
    करें / न करें

    न करें

    • थोड़ी मात्रा ही दें; बासी, नमकीन या प्लास्टिक में लिपटा खाना जानवरों को न दें

    वृक्ष सेवा (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह से जुड़े पेड़ या पौधे को पानी देना या लगाना (जैसे शनि के लिए शमी, गुरु के लिए पीपल)।

    गुरु

    पीपल

    बृहत् पराशर होरा शास्त्र हवन में गुरु की समिधा पीपल बताता है, और फलदीपिका भी अश्वत्थ (पीपल) को गुरु के स्थानों में गिनती है। गुरुवार को पीपल की जड़ में जल दें या कहीं खुली जगह पीपल लगाएँ (जल देना और लगाना परंपरा है)।

    कब: गुरुवार सुबह

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.21–22
    BPHS (Santhanam) 84.21–22
    करें / न करें

    करें

    • पीपल बड़ा पेड़ बनता है; दीवार या नींव से दूर, खुली जगह में और अनुमति लेकर लगाएँ
    गुरु

    केले का पौधा

    लोक में केले के पौधे को गुरु से जोड़ा जाता है; गुरुवार को उसमें जल और हल्दी मिला जल दें।

    कब: गुरुवार

    लोक मान्यता
    करें / न करें

    न करें

    • पेड़ की टहनी या पत्ते बेवजह न तोड़ें

    मंत्र जाप / स्तोत्र / पाठ (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह का नाम-मंत्र, बीज मंत्र या स्तोत्र, रोज़ थोड़ी देर शांत मन से।

    गुरु

    नाम मंत्र: ॐ बृहस्पतये नमः

    सुबह नहाकर शांत जगह बैठें और 'ॐ बृहस्पतये नमः' का 108 बार (एक माला) जाप करें।

    कब: गुरुवार सुबह, या रोज़

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • जाप को मन को एकाग्र करने में सहायक माना जाता है; गिनती से ज़्यादा ध्यान भाव पर रखें
    गुरु

    बीज मंत्र: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः

    तांत्रिक परंपरा का बीज मंत्र; गुरुवार को 108 बार जाप करें।

    कब: गुरुवार

    परंपरा
    गुरु

    विष्णु सहस्रनाम का पाठ

    गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम पढ़ें या सुनें।

    कब: गुरुवार

    परंपरा
    करें / न करें

    न करें

    • उच्चारण कठिन लगे तो सुनना भी पूरा है

    दीप दान / मंदिर दर्शन / तीर्थ (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह के वार पर दीपक जलाना या उससे जुड़े मंदिर में दर्शन।

    गुरु

    घी का दीप

    बृहत् पराशर होरा शास्त्र ग्रह-पूजा में उसके रंग के फूल-वस्त्र, चंदन, दीप और धूप चढ़ाने की बात कहता है। गुरुवार को घर के मंदिर में, या केले के पौधे के पास, घी का दीप जलाएँ (घी का दीप परंपरा है)।

    कब: गुरुवार शाम

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.15–16
    BPHS (Santhanam) 84.15–16
    गुरु

    विष्णु मंदिर या नवग्रह मंदिर दर्शन

    गुरुवार को विष्णु मंदिर या किसी नवग्रह मंदिर में गुरु के दर्शन करें, पीले फूल चढ़ाएँ।

    कब: गुरुवार

    परंपरा
    करें / न करें

    न करें

    • मंदिर-दर्शन को किसी फल की शर्त न बनाएँ; यह श्रद्धा का समय है

    लाल किताब (₹0 मुफ़्त)

    लाल किताब (एक अलग परंपरा) के सरल, हानिरहित टोटके; नदी, जीव या संपत्ति को नुकसान वाला कुछ नहीं।

    गुरु

    माथे पर केसर या हल्दी का तिलक

    नहाने के बाद माथे पर केसर या हल्दी का छोटा तिलक लगाएँ।

    कब: रोज़ या गुरुवार

    लाल किताब
    लाल किताब (अलग परंपरा)
    करें / न करें

    न करें

    • त्वचा पर जलन हो तो न लगाएँ
    गुरु

    पिता, गुरु और साधु का आदर

    लाल किताब गुरु को पिता, दादा और गुरुजन से जोड़ती है; उनका आदर करें और गुरुवार को उनका आशीर्वाद लें।

    कब: गुरुवार

    लाल किताब
    लाल किताब (अलग परंपरा)
    गुरु

    मंदिर में चने की दाल या हल्दी

    गुरुवार को थोड़ी चने की दाल या हल्दी किसी मंदिर में दें।

    कब: गुरुवार

    लाल किताब
    लाल किताब (अलग परंपरा)
    करें / न करें

    न करें

    • कुछ भी नदी या तालाब में न डालें

    दान (₹0–₹51)

    ग्रह के वार पर उससे जुड़ी कोई छोटी चीज़ अपनी सामर्थ्य से किसी ज़रूरतमंद को देना।

    गुरु

    शास्त्र में बताया दान: वस्त्र (पीला रेशम)

    बृहत् पराशर होरा शास्त्र (84.25) गुरु के लिए वस्त्र-दान, और प्रश्न मार्ग पीले रेशम का दान बताता है। यह जानकारी है; अपनी सामर्थ्य से बाहर कुछ न करें।

    कब: गुरुवार

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.25
    BPHS (Santhanam) 84.25
    गुरु

    आज का छोटा रूप: चने की दाल, हल्दी, पीला कपड़ा, किताबें

    गुरुवार को किसी ज़रूरतमंद या मंदिर में चने की दाल और हल्दी दें, या किसी बच्चे को किताब।

    कब: गुरुवार

    परंपरा
    करें / न करें

    न करें

    • उधार लेकर या दिखावे के लिए दान न करें
    गुरु

    किसी को दही-चावल खिलाना

    बृहत् पराशर होरा शास्त्र गुरु के लिए ब्राह्मण-भोजन में दही-चावल बताता है। आज का रूप (परंपरा): किसी ज़रूरतमंद को दही-चावल खिलाएँ।

    कब: गुरुवार

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.23–24
    BPHS (Santhanam) 84.23–24

    औषधि स्नान (₹0–₹99)

    ग्रह से जुड़ी जड़ी-बूटी डाले पानी से स्नान; त्वचा पर जलन हो तो न करें।

    गुरु

    ग्रह के अनुसार औषधि-जल से स्नान

    प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए 'उस ग्रह की औषधियों वाले जल' से स्नान बताता है।

    कब: —

    शास्त्र · Praśna Mārga XXII.32 (Raman tr.)
    Praśna Mārga XXII.32 (Raman tr.)
    गुरु

    गुरु के लिए: हल्दी, मुलेठी, पीली सरसों

    बाल्टी भर पानी में एक चुटकी हल्दी, थोड़ी मुलेठी और कुछ दाने पीली सरसों डालकर स्नान करें। सूचियाँ परंपराओं में अलग-अलग मिलती हैं।

    कब: गुरुवार सुबह

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • पहले हाथ पर थोड़ा लगाकर देखें; त्वचा पर जलन हो तो न करें

    न करें

    • कोई त्वचा रोग या एलर्जी हो तो डॉक्टर से पूछे बिना न करें; सेहत के लिए डॉक्टर पहले

    जड़ी / मूल

    ग्रह से जुड़ी पौधे की जड़, कपड़े या ताबीज़ में धारण; परंपराएँ अलग-अलग जड़ बताती हैं।

    गुरु

    केले की जड़ या हल्दी की गाँठ

    परंपरा गुरु के लिए केले की जड़ (या साबुत हल्दी की गाँठ) बताती है: गुरुवार को पीले कपड़े में बाँधकर या पीले धागे में बाँह पर धारण करते हैं।

    कब: गुरुवार, शुक्ल पक्ष

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • हल्दी की गाँठ घर में आसानी से मिलती है, यह सबसे कम ख़र्च का रूप है

    न करें

    • जड़ को खाने या दवा की तरह इस्तेमाल न करें

    असली कैसे पहचानें →

    रुद्राक्ष

    ग्रह से जुड़े मुख का रुद्राक्ष (जैसे शनि के लिए 7 मुखी), असली की जाँच के साथ।

    गुरु

    पाँच मुखी रुद्राक्ष

    परंपरा पाँच मुखी रुद्राक्ष को गुरु से जोड़ती है। पीले या लाल धागे में गले में या कलाई पर पहनें। यह सबसे आम रुद्राक्ष है, इसलिए दाम भी कम होना चाहिए।

    कब: गुरुवार

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • एक्स-रे या लैब रिपोर्ट वाला लें; मुखी की धारियाँ ऊपर से नीचे तक साफ़ दिखें

    न करें

    • पाँच मुखी के लिए बहुत ज़्यादा दाम न दें; चिपकाए या तराशे हुए नकली से बचें

    असली कैसे पहचानें →

    यंत्र

    ताँबे या भोजपत्र पर ग्रह का अंक-यंत्र, पूजा-स्थान पर; किसी शक्ति का दावा नहीं।

    गुरु

    गुरु (गुरु) यंत्र

    ताँबे की प्लेट या भोजपत्र पर बना गुरु यंत्र गुरुवार को घर के मंदिर में रखें; पूजा के समय पीले फूल और दीप के साथ उसका स्मरण करें।

    कब: गुरुवार

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • यंत्र को पूजा का एक आधार मानें; साफ़ और सूखी जगह रखें

    न करें

    • 'सिद्ध' या 'चमत्कारी' जैसे दावों पर ज़्यादा पैसे न दें

    असली कैसे पहचानें →

    संकल्प पूजा / जाप / हवन (पंडित से)

    पंडित जी से आपके नाम के संकल्प के साथ ग्रह का जाप या हवन; ख़र्च पहले से तय करें।

    गुरु

    गुरु का वैदिक मंत्र-जाप: 19,000

    बृहत् पराशर होरा शास्त्र गुरु के वैदिक मंत्र (आरंभ: 'बृहस्पते अति यदर्यो…') की जाप-संख्या 19,000 बताता है। पंडित संकल्प लेकर, ग्रह-पूजन के बाद यह जाप करते हैं; प्रायः कई दिन या कई पंडितों में बँटता है।

    कब: गुरुवार से आरंभ

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.17–20
    BPHS (Santhanam) 84.17–20

    असली कैसे पहचानें →

    गुरु

    पीपल की समिधा से हवन

    बृहत् पराशर होरा शास्त्र गुरु के हवन में पीपल की समिधा, शहद-घी-दही या दूध के साथ, 108 या 28 आहुतियाँ बताता है।

    कब: जाप के बाद

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.21–22
    BPHS (Santhanam) 84.21–22

    असली कैसे पहचानें →

    गुरु

    पंडित से संकल्प-पूजा: क्या होता है, कितना ख़र्च

    संकल्प, गणेश-पूजन, गुरु-पूजन (पीले वस्त्र-फूल, चने की दाल), मंत्र-जाप और छोटा हवन। आम तौर पर ₹251–₹2,100 (छोटी पूजा से लेकर हवन सहित); पूरी 19,000 जाप-संख्या का ख़र्च इससे ज़्यादा हो सकता है, पहले लिखित में पूछ लें।

    कब: गुरुवार

    परंपरा
    करें / न करें

    न करें

    • डर दिखाकर या 'तुरंत फल' का वादा करके कराई जाने वाली पूजा से दूर रहें

    असली कैसे पहचानें →

    उपरत्न / रत्न

    केवल कुंडली के शुभ स्वामी ग्रह के लिए; पहले कम-ख़र्च उपरत्न, फिर प्रमाणपत्र वाला रत्न। कोई रत्न ज़रूरी नहीं।

    हर रत्न के साथ उपरत्न पहले दिखाएँ (कम ख़र्च), फिर रत्न। कोई रत्न 'ज़रूरी' नहीं; ₹0 उपाय हमेशा ऊपर।

    बच्चों (12 वर्ष से कम) के लिए कोई रत्न नहीं। गर्भावस्था, बीमारी या दुख के समय रत्न का प्रस्ताव नहीं (W12 नियम)।

    अपनी कुंडली में जाँचें

    गुरु

    उपरत्न: सुनैला (सिट्रीन) या पीला टोपाज़

    कम ख़र्च वाला विकल्प पहले। सोने की अंगूठी में, तर्जनी उँगली में, गुरुवार को पहनते हैं (उपरत्न, धातु, उँगली, दिन: परंपरा)।

    कब: गुरुवार, शुक्ल पक्ष

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • केवल तब, जब यह ग्रह आपकी कुंडली के लिए शुभ स्वामी हो (gem rule)
    • जन्म-समय पता हो तभी रत्न का विचार करें; परंपरा पहनने से पहले रत्न को 3–7 दिन पास रखकर देखने की बात कहती है, कुछ असहज लगे तो उतार दें

    असली कैसे पहचानें →

    गुरु

    रत्न: पुखराज

    प्रश्न मार्ग गुरु का रत्न 'पुष्यराग' (पुखराज) बताता है, गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के प्रसंग में; कुंडली के शुभ स्वामी ग्रह के लिए रत्न पहनना आज की परंपरा है। सोना, तर्जनी उँगली, गुरुवार (धातु, उँगली, दिन: परंपरा)।

    कब: गुरुवार, शुक्ल पक्ष

    शास्त्र · Praśna Mārga XXII.29 (Raman tr.)
    Praśna Mārga XXII.29 (Raman tr.)
    करें / न करें

    करें

    • केवल तब, जब यह ग्रह आपकी कुंडली के लिए शुभ स्वामी हो (gem rule)
    • हमारे नियम में गुरु इन लग्नों के लिए योग्य है: मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन
    • ख़रीदें तो लैब सर्टिफ़िकेट (प्रमाणपत्र संख्या सहित) माँगें; पहचान का तरीका हमारी 'असली कैसे पहचानें' गाइड में है

    न करें

    • 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए रत्न नहीं; गर्भावस्था, बीमारी या दुख के समय रत्न का विचार न करें
    • कोई रत्न 'ज़रूरी' नहीं है; ₹0 वाले उपाय पहले हैं, और पहनना या न पहनना आपका चुनाव है

    असली कैसे पहचानें →