शुक्र का अनाज: सेम (लोबिया जैसी फली)
शुक्रवार को खाने में चावल, सफ़ेद लोबिया (सेम) या राजमा शामिल करें।
कब: शुक्रवार
शास्त्र · Phaladīpikā (V. S. Sastri) II.28
करें / न करें
करें
- मात्रा अपनी सेहत और डॉक्टर की सलाह के हिसाब से रखें
रिश्ते धैर्य और समझ से बनते हैं। परंपरा विवाह को 7वें भाव और शुक्र से जोड़ती है; नीचे ₹0 से शुरू होने वाले विकल्प हैं, जिनमें से आप जो चाहें चुनें।
मंगल दोष यहाँ उपाय बेचने का कारण नहीं: उपयोगकर्ता पूछे तो केवल शांत जाँच, हमारे पेज concept/mangal-dosha के अनुसार। विवाह के बारे में कोई वादा नहीं लिखा जाता।
अभी नहीं हो पाया। थोड़ी देर बाद फिर कोशिश करें।
मिलान देखना हो तो → कुंडली मिलान
ग्रह के वार पर उससे जुड़ा सादा अन्न या फल खाना या बाँटना।
शुक्रवार को खाने में चावल, सफ़ेद लोबिया (सेम) या राजमा शामिल करें।
कब: शुक्रवार
करें
शुक्रवार को दूध, दही या थोड़ी खीर लें; पूजा में मिश्री का भोग लगाएँ।
कब: शुक्रवार
न करें
ग्रह के वार का व्रत या एकादशी, अपनी सेहत के हिसाब से; बीमारी, गर्भावस्था या दवा में डॉक्टर से पूछें।
शुक्रवार को एक समय सादा, सफ़ेद भोजन (जैसे खीर, चावल) लें; लक्ष्मी जी या देवी का स्मरण करें। उत्तर भारत में शुक्रवार का संतोषी माता व्रत भी प्रचलित है, जिसमें खट्टा नहीं खाया जाता।
कब: शुक्रवार, शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से शुरुआत
करें
न करें
ग्रह जिन बातों का कारक है, उनसे जुड़ा रोज़ का व्यवहार: बड़ों का आदर, ईमानदारी, अनुशासन।
प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए यह आचरण बताता है: बड़ों की बात मानना, वेद-पुराण सुनना, मन को शुद्ध रखना। रोज़ कुछ देर कोई अच्छा ग्रंथ पढ़ें या सुनें।
कब: रोज़
फलदीपिका भाव-कारकों में शुक्र को सातवें भाव (जीवनसाथी) का कारक बताती है। इसलिए शुक्र के उपाय में जीवनसाथी के सम्मान पर ध्यान दिया जाता है (आचरण का यह रूप परंपरा है)।
कब: —
जीवनसाथी की बात ध्यान से सुनें, घर की स्त्रियों का आदर करें, घर और अपने आप को साफ़-सुथरा रखें, और संगीत, चित्रकला या किसी कला के लिए थोड़ा समय निकालें।
कब: रोज़, ख़ासकर शुक्रवार
न करें
ग्रह के वार पर उसके रंग के कपड़े या फूल, और उससे जुड़ी दिशा का ध्यान।
प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए उनके रंग के वस्त्र और फूल बताता है; शुक्र का रंग सफ़ेद है। शुक्रवार को सफ़ेद या हल्के रंग के साफ़ कपड़े पहनें, पूजा में सफ़ेद फूल रखें।
कब: शुक्रवार
करें
फलदीपिका शुक्र की दिशा दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) बताती है। पूजा में शुक्र का स्थान दक्षिण-पूर्व में रखें।
कब: पूजा के समय
गाय, कुत्ते, पक्षी या चींटियों को भोजन, बड़ों और ज़रूरतमंदों की सेवा; किसी जीव को कष्ट नहीं।
शुक्रवार को किसी गाय या गौशाला में रोटी या हरा चारा खिलाएँ।
कब: शुक्रवार
न करें
घर से दूर किसी पेड़ के नीचे थोड़ा आटा और शक्कर मिलाकर रखें।
कब: शुक्रवार
ग्रह से जुड़े पेड़ या पौधे को पानी देना या लगाना (जैसे शनि के लिए शमी, गुरु के लिए पीपल)।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र हवन में शुक्र की समिधा गूलर बताता है, इसलिए परंपरा इसे शुक्र का पेड़ मानती है। शुक्रवार को गूलर में जल दें या खुली जगह में गूलर लगाएँ (जल देना और लगाना परंपरा है)।
कब: शुक्रवार
करें
घर में चमेली, मोगरा या रातरानी जैसे सफ़ेद फूलों वाले पौधे लगाकर शुक्रवार को उनकी देखभाल करें।
कब: शुक्रवार
न करें
ग्रह का नाम-मंत्र, बीज मंत्र या स्तोत्र, रोज़ थोड़ी देर शांत मन से।
सुबह नहाकर शांत जगह बैठें और 'ॐ शुक्राय नमः' का 108 बार (एक माला) जाप करें।
कब: शुक्रवार सुबह, या रोज़
करें
तांत्रिक परंपरा का बीज मंत्र; शुक्रवार को 108 बार जाप करें।
कब: शुक्रवार
फलदीपिका ग्रहों के देवताओं में शुक्र की अधिदेवता लक्ष्मी बताती है। शुक्रवार को श्री सूक्त पढ़ें या सुनें, या दुर्गा सप्तशती का कोई अध्याय (स्तोत्र का चुनाव परंपरा है)।
कब: शुक्रवार
न करें
ग्रह के वार पर दीपक जलाना या उससे जुड़े मंदिर में दर्शन।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र ग्रह-पूजा में उसके रंग के फूल-वस्त्र, चंदन, दीप और धूप चढ़ाने की बात कहता है। शुक्रवार शाम घर के मंदिर में घी का दीप जलाएँ और सफ़ेद फूल रखें (घी का दीप परंपरा है)।
कब: शुक्रवार शाम
शुक्रवार को लक्ष्मी जी या किसी देवी मंदिर में दर्शन करें, सफ़ेद फूल चढ़ाएँ; नवग्रह मंदिर में शुक्र के दर्शन भी कर सकते हैं।
कब: शुक्रवार
न करें
लाल किताब (एक अलग परंपरा) के सरल, हानिरहित टोटके; नदी, जीव या संपत्ति को नुकसान वाला कुछ नहीं।
शुक्रवार को किसी गाय को थोड़ी ज्वार या हरा चारा खिलाएँ।
कब: शुक्रवार
लाल किताब शुक्र को साफ़-सफ़ाई और सुगंध से जोड़ती है; साफ़ कपड़े पहनें और हल्का इत्र या चंदन लगाएँ।
कब: रोज़, ख़ासकर शुक्रवार
न करें
लाल किताब शुक्र को जीवनसाथी से जोड़ती है; जीवनसाथी से आदर से बात करें और घर के कामों में हाथ बँटाएँ।
कब: रोज़
ग्रह के वार पर उससे जुड़ी कोई छोटी चीज़ अपनी सामर्थ्य से किसी ज़रूरतमंद को देना।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र (84.25) शुक्र के लिए घोड़े का दान, और प्रश्न मार्ग चाँदी और सफ़ेद घोड़े का दान बताता है। यह जानकारी है; अपनी सामर्थ्य से बाहर कुछ न करें।
कब: शुक्रवार
शुक्रवार को किसी ज़रूरतमंद को चावल, दूध या मिश्री दें, या किसी स्त्री को साफ़ सफ़ेद कपड़ा।
कब: शुक्रवार
न करें
बृहत् पराशर होरा शास्त्र शुक्र के लिए ब्राह्मण-भोजन में घी वाले चावल बताता है। आज का रूप (परंपरा): किसी ज़रूरतमंद को घी-चावल खिलाएँ।
कब: शुक्रवार
ग्रह से जुड़ी जड़ी-बूटी डाले पानी से स्नान; त्वचा पर जलन हो तो न करें।
प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए 'उस ग्रह की औषधियों वाले जल' से स्नान बताता है।
कब: —
बाल्टी भर पानी में दो-तीन कुटी इलायची, कुछ सफ़ेद फूल की पंखुड़ियाँ और दो-चार केसर के धागे डालकर स्नान करें। सूचियाँ परंपराओं में अलग-अलग मिलती हैं।
कब: शुक्रवार सुबह
करें
न करें
ग्रह से जुड़ी पौधे की जड़, कपड़े या ताबीज़ में धारण; परंपराएँ अलग-अलग जड़ बताती हैं।
परंपरा शुक्र के लिए सरपंखा की जड़ (कुछ परंपराओं में गूलर की जड़) बताती है: शुक्रवार को सफ़ेद कपड़े में बाँधकर या सफ़ेद धागे में बाँह पर धारण करते हैं।
कब: शुक्रवार, शुक्ल पक्ष
करें
न करें
ग्रह से जुड़े मुख का रुद्राक्ष (जैसे शनि के लिए 7 मुखी), असली की जाँच के साथ।
परंपरा छह मुखी रुद्राक्ष को शुक्र से जोड़ती है। सफ़ेद या लाल धागे में गले में या कलाई पर पहनें।
कब: शुक्रवार
करें
न करें
ताँबे या भोजपत्र पर ग्रह का अंक-यंत्र, पूजा-स्थान पर; किसी शक्ति का दावा नहीं।
ताँबे की प्लेट या भोजपत्र पर बना शुक्र यंत्र शुक्रवार को घर के मंदिर में रखें; पूजा के समय सफ़ेद फूल और दीप के साथ उसका स्मरण करें।
कब: शुक्रवार
करें
न करें
पंडित जी से आपके नाम के संकल्प के साथ ग्रह का जाप या हवन; ख़र्च पहले से तय करें।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र शुक्र के वैदिक मंत्र (आरंभ: 'अन्नात्परिस्रुतो…') की जाप-संख्या 16,000 बताता है। पंडित संकल्प लेकर, ग्रह-पूजन के बाद यह जाप करते हैं; प्रायः कई दिन या कई पंडितों में बँटता है।
कब: शुक्रवार से आरंभ
बृहत् पराशर होरा शास्त्र शुक्र के हवन में गूलर की समिधा, शहद-घी-दही या दूध के साथ, 108 या 28 आहुतियाँ बताता है।
कब: जाप के बाद
संकल्प, गणेश-पूजन, शुक्र-पूजन (सफ़ेद वस्त्र-फूल, चावल), मंत्र-जाप और छोटा हवन। आम तौर पर ₹251–₹2,100 (छोटी पूजा से लेकर हवन सहित); पूरी 16,000 जाप-संख्या का ख़र्च इससे ज़्यादा हो सकता है, पहले लिखित में पूछ लें।
कब: शुक्रवार
न करें
केवल कुंडली के शुभ स्वामी ग्रह के लिए; पहले कम-ख़र्च उपरत्न, फिर प्रमाणपत्र वाला रत्न। कोई रत्न ज़रूरी नहीं।
हर रत्न के साथ उपरत्न पहले दिखाएँ (कम ख़र्च), फिर रत्न। कोई रत्न 'ज़रूरी' नहीं; ₹0 उपाय हमेशा ऊपर।
बच्चों (12 वर्ष से कम) के लिए कोई रत्न नहीं। गर्भावस्था, बीमारी या दुख के समय रत्न का प्रस्ताव नहीं (W12 नियम)।
कम ख़र्च वाला विकल्प पहले। चाँदी या प्लैटिनम की अंगूठी में, मध्यमा या कनिष्ठा उँगली में, शुक्रवार को पहनते हैं (उपरत्न, धातु, उँगली, दिन: परंपरा)।
कब: शुक्रवार, शुक्ल पक्ष
करें
प्रश्न मार्ग शुक्र का रत्न 'वज्र' (हीरा) बताता है, गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के प्रसंग में; कुंडली के शुभ स्वामी ग्रह के लिए रत्न पहनना आज की परंपरा है। चाँदी या प्लैटिनम, मध्यमा या कनिष्ठा उँगली, शुक्रवार (धातु, उँगली, दिन: परंपरा)।
कब: शुक्रवार, शुक्ल पक्ष
करें
न करें
ग्रह के वार पर उससे जुड़ा सादा अन्न या फल खाना या बाँटना।
गुरुवार को खाने में चने की दाल, बेसन की कढ़ी या चीला शामिल करें।
कब: गुरुवार
करें
गुरुवार को खाने में हल्दी, केला, पपीता या आम जैसी पीली चीज़ें रखें।
कब: गुरुवार
न करें
ग्रह के वार का व्रत या एकादशी, अपनी सेहत के हिसाब से; बीमारी, गर्भावस्था या दवा में डॉक्टर से पूछें।
गुरुवार को एक समय पीला, सादा भोजन (जैसे चने की दाल, बेसन) लें; सुबह विष्णु जी का स्मरण करें और बृहस्पतिवार व्रत-कथा पढ़ या सुन सकते हैं।
कब: गुरुवार, शुक्ल पक्ष के गुरुवार से शुरुआत
करें
न करें
परंपरा गुरु को विष्णु-भक्ति से जोड़ती है; एकादशी पर अन्न छोड़कर फलाहार या एक समय भोजन करें।
कब: हर पक्ष की एकादशी
न करें
ग्रह जिन बातों का कारक है, उनसे जुड़ा रोज़ का व्यवहार: बड़ों का आदर, ईमानदारी, अनुशासन।
प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए यह आचरण बताता है: बड़ों की बात मानना, वेद-पुराण सुनना, मन को शुद्ध रखना। रोज़ कुछ देर कोई अच्छा ग्रंथ पढ़ें या सुनें।
कब: रोज़
फलदीपिका भाव-कारकों में गुरु को पाँचवें (संतान) और नौवें (धर्म, भाग्य) भाव का कारक बताती है। इसलिए गुरु के उपाय में बच्चों, शिक्षकों और धर्म के प्रति आदर पर ध्यान दिया जाता है (आचरण का यह रूप परंपरा है)।
कब: —
अपने शिक्षकों, गुरुजन और बड़ों को समय-समय पर याद करें, उनसे मिलें या फ़ोन करें; बच्चों को धैर्य से सिखाएँ; किसी को सलाह दें तो ईमानदारी से दें।
कब: रोज़, ख़ासकर गुरुवार
करें
न करें
ग्रह के वार पर उसके रंग के कपड़े या फूल, और उससे जुड़ी दिशा का ध्यान।
प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए उनके रंग के वस्त्र और फूल बताता है; गुरु का रंग पीला है। गुरुवार को पीला कपड़ा या पीला रुमाल पहनें, पूजा में पीले फूल रखें।
कब: गुरुवार
करें
फलदीपिका गुरु की दिशा उत्तर-पूर्व (ईशान) बताती है। पूजा या पढ़ाई के समय उत्तर-पूर्व की ओर मुँह कर सकते हैं, और घर का ईशान कोना साफ़ रखें।
कब: पूजा या पढ़ाई के समय
गाय, कुत्ते, पक्षी या चींटियों को भोजन, बड़ों और ज़रूरतमंदों की सेवा; किसी जीव को कष्ट नहीं।
गुरुवार को घर के बुज़ुर्गों, किसी शिक्षक या साधु-संत के लिए कोई छोटा काम करें, उनके पास बैठें, उनकी बात सुनें।
कब: गुरुवार
गुरुवार को किसी गाय या गौशाला में थोड़ी भीगी चने की दाल, गुड़ के एक टुकड़े के साथ, खिलाएँ।
कब: गुरुवार
न करें
ग्रह से जुड़े पेड़ या पौधे को पानी देना या लगाना (जैसे शनि के लिए शमी, गुरु के लिए पीपल)।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र हवन में गुरु की समिधा पीपल बताता है, और फलदीपिका भी अश्वत्थ (पीपल) को गुरु के स्थानों में गिनती है। गुरुवार को पीपल की जड़ में जल दें या कहीं खुली जगह पीपल लगाएँ (जल देना और लगाना परंपरा है)।
कब: गुरुवार सुबह
करें
लोक में केले के पौधे को गुरु से जोड़ा जाता है; गुरुवार को उसमें जल और हल्दी मिला जल दें।
कब: गुरुवार
न करें
ग्रह का नाम-मंत्र, बीज मंत्र या स्तोत्र, रोज़ थोड़ी देर शांत मन से।
सुबह नहाकर शांत जगह बैठें और 'ॐ बृहस्पतये नमः' का 108 बार (एक माला) जाप करें।
कब: गुरुवार सुबह, या रोज़
करें
तांत्रिक परंपरा का बीज मंत्र; गुरुवार को 108 बार जाप करें।
कब: गुरुवार
गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम पढ़ें या सुनें।
कब: गुरुवार
न करें
ग्रह के वार पर दीपक जलाना या उससे जुड़े मंदिर में दर्शन।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र ग्रह-पूजा में उसके रंग के फूल-वस्त्र, चंदन, दीप और धूप चढ़ाने की बात कहता है। गुरुवार को घर के मंदिर में, या केले के पौधे के पास, घी का दीप जलाएँ (घी का दीप परंपरा है)।
कब: गुरुवार शाम
गुरुवार को विष्णु मंदिर या किसी नवग्रह मंदिर में गुरु के दर्शन करें, पीले फूल चढ़ाएँ।
कब: गुरुवार
न करें
लाल किताब (एक अलग परंपरा) के सरल, हानिरहित टोटके; नदी, जीव या संपत्ति को नुकसान वाला कुछ नहीं।
नहाने के बाद माथे पर केसर या हल्दी का छोटा तिलक लगाएँ।
कब: रोज़ या गुरुवार
न करें
लाल किताब गुरु को पिता, दादा और गुरुजन से जोड़ती है; उनका आदर करें और गुरुवार को उनका आशीर्वाद लें।
कब: गुरुवार
गुरुवार को थोड़ी चने की दाल या हल्दी किसी मंदिर में दें।
कब: गुरुवार
न करें
ग्रह के वार पर उससे जुड़ी कोई छोटी चीज़ अपनी सामर्थ्य से किसी ज़रूरतमंद को देना।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र (84.25) गुरु के लिए वस्त्र-दान, और प्रश्न मार्ग पीले रेशम का दान बताता है। यह जानकारी है; अपनी सामर्थ्य से बाहर कुछ न करें।
कब: गुरुवार
गुरुवार को किसी ज़रूरतमंद या मंदिर में चने की दाल और हल्दी दें, या किसी बच्चे को किताब।
कब: गुरुवार
न करें
बृहत् पराशर होरा शास्त्र गुरु के लिए ब्राह्मण-भोजन में दही-चावल बताता है। आज का रूप (परंपरा): किसी ज़रूरतमंद को दही-चावल खिलाएँ।
कब: गुरुवार
ग्रह से जुड़ी जड़ी-बूटी डाले पानी से स्नान; त्वचा पर जलन हो तो न करें।
प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए 'उस ग्रह की औषधियों वाले जल' से स्नान बताता है।
कब: —
बाल्टी भर पानी में एक चुटकी हल्दी, थोड़ी मुलेठी और कुछ दाने पीली सरसों डालकर स्नान करें। सूचियाँ परंपराओं में अलग-अलग मिलती हैं।
कब: गुरुवार सुबह
करें
न करें
ग्रह से जुड़ी पौधे की जड़, कपड़े या ताबीज़ में धारण; परंपराएँ अलग-अलग जड़ बताती हैं।
परंपरा गुरु के लिए केले की जड़ (या साबुत हल्दी की गाँठ) बताती है: गुरुवार को पीले कपड़े में बाँधकर या पीले धागे में बाँह पर धारण करते हैं।
कब: गुरुवार, शुक्ल पक्ष
करें
न करें
ग्रह से जुड़े मुख का रुद्राक्ष (जैसे शनि के लिए 7 मुखी), असली की जाँच के साथ।
परंपरा पाँच मुखी रुद्राक्ष को गुरु से जोड़ती है। पीले या लाल धागे में गले में या कलाई पर पहनें। यह सबसे आम रुद्राक्ष है, इसलिए दाम भी कम होना चाहिए।
कब: गुरुवार
करें
न करें
ताँबे या भोजपत्र पर ग्रह का अंक-यंत्र, पूजा-स्थान पर; किसी शक्ति का दावा नहीं।
ताँबे की प्लेट या भोजपत्र पर बना गुरु यंत्र गुरुवार को घर के मंदिर में रखें; पूजा के समय पीले फूल और दीप के साथ उसका स्मरण करें।
कब: गुरुवार
करें
न करें
पंडित जी से आपके नाम के संकल्प के साथ ग्रह का जाप या हवन; ख़र्च पहले से तय करें।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र गुरु के वैदिक मंत्र (आरंभ: 'बृहस्पते अति यदर्यो…') की जाप-संख्या 19,000 बताता है। पंडित संकल्प लेकर, ग्रह-पूजन के बाद यह जाप करते हैं; प्रायः कई दिन या कई पंडितों में बँटता है।
कब: गुरुवार से आरंभ
बृहत् पराशर होरा शास्त्र गुरु के हवन में पीपल की समिधा, शहद-घी-दही या दूध के साथ, 108 या 28 आहुतियाँ बताता है।
कब: जाप के बाद
संकल्प, गणेश-पूजन, गुरु-पूजन (पीले वस्त्र-फूल, चने की दाल), मंत्र-जाप और छोटा हवन। आम तौर पर ₹251–₹2,100 (छोटी पूजा से लेकर हवन सहित); पूरी 19,000 जाप-संख्या का ख़र्च इससे ज़्यादा हो सकता है, पहले लिखित में पूछ लें।
कब: गुरुवार
न करें
केवल कुंडली के शुभ स्वामी ग्रह के लिए; पहले कम-ख़र्च उपरत्न, फिर प्रमाणपत्र वाला रत्न। कोई रत्न ज़रूरी नहीं।
हर रत्न के साथ उपरत्न पहले दिखाएँ (कम ख़र्च), फिर रत्न। कोई रत्न 'ज़रूरी' नहीं; ₹0 उपाय हमेशा ऊपर।
बच्चों (12 वर्ष से कम) के लिए कोई रत्न नहीं। गर्भावस्था, बीमारी या दुख के समय रत्न का प्रस्ताव नहीं (W12 नियम)।
कम ख़र्च वाला विकल्प पहले। सोने की अंगूठी में, तर्जनी उँगली में, गुरुवार को पहनते हैं (उपरत्न, धातु, उँगली, दिन: परंपरा)।
कब: गुरुवार, शुक्ल पक्ष
करें
प्रश्न मार्ग गुरु का रत्न 'पुष्यराग' (पुखराज) बताता है, गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के प्रसंग में; कुंडली के शुभ स्वामी ग्रह के लिए रत्न पहनना आज की परंपरा है। सोना, तर्जनी उँगली, गुरुवार (धातु, उँगली, दिन: परंपरा)।
कब: गुरुवार, शुक्ल पक्ष
करें
न करें
इस डिवाइस पर अधिकतम 10 लोग सहेज सकते हैं।
अभी कोई सहेजा नहीं गया। अपना या परिवार में किसी का जन्म विवरण जोड़िए।
10 लोग सहेजे जा चुके हैं। नया जोड़ने के लिए किसी एक को हटाइए।
दो लोगों का मिलान करेंइस डिवाइस से सभी सहेजे गए लोग हट जाएँगे। आगे बढ़ें?
यह विवरण सिर्फ़ इसी फ़ोन या कंप्यूटर पर रहता है।
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