बुध का अनाज: साबुत मूंग
बुधवार को खाने में मूंग की दाल, चीला या अंकुरित मूंग शामिल करें।
कब: बुधवार
शास्त्र · Phaladīpikā (V. S. Sastri) II.28
करें / न करें
करें
- मात्रा अपनी सेहत और डॉक्टर की सलाह के हिसाब से रखें
पढ़ाई में लगन और नियम सबसे बड़ा साथी है। परंपरा विद्या को 4थे और 5वें भाव, बुध और गुरु (बृहस्पति) से जोड़ती है; नीचे ₹0 से शुरू होने वाले विकल्प हैं।
12 वर्ष से कम के बच्चे के लिए कोई रत्न नहीं (gem_rule R6); व्रत भी नहीं, केवल आचरण, मंत्र/प्रार्थना और सेवा।
अभी नहीं हो पाया। थोड़ी देर बाद फिर कोशिश करें।
ग्रह के वार पर उससे जुड़ा सादा अन्न या फल खाना या बाँटना।
बुधवार को खाने में मूंग की दाल, चीला या अंकुरित मूंग शामिल करें।
कब: बुधवार
करें
बुधवार को पालक, लौकी, हरी मटर या अमरूद जैसी हरी चीज़ें थाली में रखें।
कब: बुधवार
न करें
ग्रह के वार का व्रत या एकादशी, अपनी सेहत के हिसाब से; बीमारी, गर्भावस्था या दवा में डॉक्टर से पूछें।
बुधवार को एक समय सादा भोजन (जैसे मूंग की खिचड़ी) लें, या फलाहार करें; सुबह गणेश जी या विष्णु जी का स्मरण करें।
कब: बुधवार, शुक्ल पक्ष के बुधवार से शुरुआत
करें
न करें
परंपरा बुध को विष्णु-भक्ति से जोड़ती है; एकादशी पर अन्न छोड़कर फलाहार या एक समय भोजन करें।
कब: हर पक्ष की एकादशी
न करें
ग्रह जिन बातों का कारक है, उनसे जुड़ा रोज़ का व्यवहार: बड़ों का आदर, ईमानदारी, अनुशासन।
प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए यह आचरण बताता है: बड़ों की बात मानना, वेद-पुराण सुनना, मन को शुद्ध रखना। रोज़ कुछ देर कोई अच्छा ग्रंथ पढ़ें या सुनें।
कब: रोज़
फलदीपिका बुध को विद्वान, कारीगर, कुशल हिसाब रखने वाले और विष्णु-भक्त से जोड़ती है। इसलिए बुध के उपाय में पढ़ाई, लेखन और ईमानदार लेन-देन पर ध्यान दिया जाता है (आचरण का यह रूप परंपरा है)।
कब: —
बोलने से पहले सोचें, किसी का मज़ाक न उड़ाएँ, हिसाब साफ़ रखें, वादा किया हो तो समय पर निभाएँ, और बहन, बुआ, मौसी व छोटे बच्चों से प्यार से बात करें।
कब: रोज़
करें
न करें
ग्रह के वार पर उसके रंग के कपड़े या फूल, और उससे जुड़ी दिशा का ध्यान।
प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए उनके रंग के वस्त्र और फूल बताता है; बुध का रंग हरा है। बुधवार को हरा कपड़ा, रुमाल या हरी किनारी पहनें, पूजा में हरे पत्ते या दूर्वा रखें।
कब: बुधवार
करें
फलदीपिका बुध की दिशा उत्तर बताती है। पढ़ते या लिखते समय उत्तर की ओर मुँह करके बैठ सकते हैं, और पूजा में बुध का स्थान उत्तर में रखें।
कब: पढ़ाई या पूजा के समय
गाय, कुत्ते, पक्षी या चींटियों को भोजन, बड़ों और ज़रूरतमंदों की सेवा; किसी जीव को कष्ट नहीं।
बुधवार को पास की गौशाला या किसी गाय को हरी घास या हरा चारा खिलाएँ।
कब: बुधवार
न करें
छत या बालकनी में भीगी मूंग या दाना और साफ़ पानी का बर्तन रखें।
कब: बुधवार या रोज़
करें
न करें
ग्रह से जुड़े पेड़ या पौधे को पानी देना या लगाना (जैसे शनि के लिए शमी, गुरु के लिए पीपल)।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र हवन में बुध की समिधा अपामार्ग बताता है, इसलिए परंपरा इसे बुध का पौधा मानती है। गमले या आँगन में अपामार्ग लगाएँ या जहाँ उगा हो वहाँ पानी दें (लगाना और पानी देना परंपरा है)।
कब: बुधवार
करें
परंपरा बुध को विष्णु से जोड़ती है; घर में तुलसी या कोई भी हरा पौधा लगाकर बुधवार को उसकी देखभाल करें।
कब: बुधवार
न करें
ग्रह का नाम-मंत्र, बीज मंत्र या स्तोत्र, रोज़ थोड़ी देर शांत मन से।
सुबह नहाकर शांत जगह बैठें और 'ॐ बुधाय नमः' का 108 बार (एक माला) जाप करें।
कब: बुधवार सुबह, या रोज़
करें
तांत्रिक परंपरा का बीज मंत्र; बुधवार को 108 बार जाप करें।
कब: बुधवार
बृहत् पराशर होरा शास्त्र महाविष्णु को बुध का अधिदेवता बताता है। बुधवार को विष्णु सहस्रनाम पढ़ें या सुनें (स्तोत्र का चुनाव परंपरा है)।
कब: बुधवार
न करें
ग्रह के वार पर दीपक जलाना या उससे जुड़े मंदिर में दर्शन।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र ग्रह-पूजा में उसके रंग के फूल-वस्त्र, चंदन, दीप और धूप चढ़ाने की बात कहता है। बुधवार शाम घर के मंदिर में घी का दीप जलाएँ और हरी दूर्वा रखें।
कब: बुधवार शाम
फलदीपिका बुध के स्थानों में 'जहाँ भगवान विष्णु विराजते हैं' को गिनती है। बुधवार को विष्णु मंदिर जाएँ; उत्तर भारत में बुधवार को गणेश मंदिर जाने की भी परंपरा है।
कब: बुधवार
न करें
लाल किताब (एक अलग परंपरा) के सरल, हानिरहित टोटके; नदी, जीव या संपत्ति को नुकसान वाला कुछ नहीं।
लाल किताब बुध को बहन, बेटी, बुआ और मौसी से जोड़ती है। उनसे प्रेम से मिलें, और कभी-कभी कोई छोटी हरी चीज़ (हरी चूड़ी या रुमाल) भेंट करें।
कब: बुधवार
लाल किताब बुध को दाँतों से जोड़ती है; रोज़ ठीक से दाँत साफ़ करें (यह आदत है, इलाज नहीं; दाँत की तकलीफ़ में डेंटिस्ट पहले)।
कब: रोज़
बुधवार को थोड़ी साबुत मूंग किसी मंदिर या ज़रूरतमंद को दें।
कब: बुधवार
न करें
ग्रह के वार पर उससे जुड़ी कोई छोटी चीज़ अपनी सामर्थ्य से किसी ज़रूरतमंद को देना।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र (84.25) और प्रश्न मार्ग, दोनों बुध के लिए सोने का दान बताते हैं। यह जानकारी है; अपनी सामर्थ्य से बाहर कुछ न करें।
कब: बुधवार
बुधवार को किसी ज़रूरतमंद को मूंग दाल या हरी सब्ज़ी दें, या किसी विद्यार्थी को कॉपी-पेन।
कब: बुधवार
करें
न करें
बृहत् पराशर होरा शास्त्र बुध के लिए ब्राह्मण-भोजन में दूध में पका धान (अन्न) बताता है। आज का रूप (परंपरा): किसी ज़रूरतमंद को खीर या दूध-चावल खिलाएँ।
कब: बुधवार
ग्रह से जुड़ी जड़ी-बूटी डाले पानी से स्नान; त्वचा पर जलन हो तो न करें।
प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए 'उस ग्रह की औषधियों वाले जल' से स्नान बताता है।
कब: —
बाल्टी भर पानी में एक चुटकी जायफल चूर्ण, कुछ बूँद शहद और थोड़े अक्षत (साबुत चावल) डालकर स्नान करें। सूचियाँ परंपराओं में अलग-अलग मिलती हैं।
कब: बुधवार सुबह
करें
न करें
ग्रह से जुड़ी पौधे की जड़, कपड़े या ताबीज़ में धारण; परंपराएँ अलग-अलग जड़ बताती हैं।
परंपरा बुध के लिए विधारा की जड़ बताती है: बुधवार को हरे कपड़े में बाँधकर या हरे धागे में बाँह पर धारण करते हैं।
कब: बुधवार, शुक्ल पक्ष
करें
न करें
ग्रह से जुड़े मुख का रुद्राक्ष (जैसे शनि के लिए 7 मुखी), असली की जाँच के साथ।
परंपरा चार मुखी रुद्राक्ष को बुध से जोड़ती है। लाल या हरे धागे में गले में या कलाई पर पहनें।
कब: बुधवार
करें
न करें
ताँबे या भोजपत्र पर ग्रह का अंक-यंत्र, पूजा-स्थान पर; किसी शक्ति का दावा नहीं।
ताँबे की प्लेट या भोजपत्र पर बना बुध यंत्र बुधवार को घर के मंदिर में रखें; पूजा के समय दूर्वा और दीप के साथ उसका स्मरण करें।
कब: बुधवार
करें
न करें
पंडित जी से आपके नाम के संकल्प के साथ ग्रह का जाप या हवन; ख़र्च पहले से तय करें।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र बुध के वैदिक मंत्र (आरंभ: 'उद्बुध्यस्व…') की जाप-संख्या 9,000 बताता है। पंडित संकल्प लेकर, ग्रह-पूजन के बाद यह जाप करते हैं; प्रायः कई दिन या कई पंडितों में बँटता है।
कब: बुधवार से आरंभ
बृहत् पराशर होरा शास्त्र बुध के हवन में अपामार्ग की समिधा, शहद-घी-दही या दूध के साथ, 108 या 28 आहुतियाँ बताता है।
कब: जाप के बाद
संकल्प, गणेश-पूजन, बुध-पूजन (हरे वस्त्र-फूल), मंत्र-जाप और छोटा हवन। आम तौर पर ₹251–₹2,100 (छोटी पूजा से लेकर हवन सहित); पूरी 9,000 जाप-संख्या का ख़र्च इससे ज़्यादा हो सकता है, पहले लिखित में पूछ लें।
कब: बुधवार
न करें
केवल कुंडली के शुभ स्वामी ग्रह के लिए; पहले कम-ख़र्च उपरत्न, फिर प्रमाणपत्र वाला रत्न। कोई रत्न ज़रूरी नहीं।
हर रत्न के साथ उपरत्न पहले दिखाएँ (कम ख़र्च), फिर रत्न। कोई रत्न 'ज़रूरी' नहीं; ₹0 उपाय हमेशा ऊपर।
बच्चों (12 वर्ष से कम) के लिए कोई रत्न नहीं। गर्भावस्था, बीमारी या दुख के समय रत्न का प्रस्ताव नहीं (W12 नियम)।
कम ख़र्च वाला विकल्प पहले। सोने या काँसे की अंगूठी में, कनिष्ठा (छोटी) उँगली में, बुधवार को पहनते हैं (उपरत्न, धातु, उँगली, दिन: परंपरा)।
कब: बुधवार, शुक्ल पक्ष
करें
प्रश्न मार्ग बुध का रत्न 'गरुड़' (पन्ना) बताता है, गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के प्रसंग में; कुंडली के शुभ स्वामी ग्रह के लिए रत्न पहनना आज की परंपरा है। सोना या काँसा, कनिष्ठा उँगली, बुधवार (धातु, उँगली, दिन: परंपरा)।
कब: बुधवार, शुक्ल पक्ष
करें
न करें
ग्रह के वार पर उससे जुड़ा सादा अन्न या फल खाना या बाँटना।
गुरुवार को खाने में चने की दाल, बेसन की कढ़ी या चीला शामिल करें।
कब: गुरुवार
करें
गुरुवार को खाने में हल्दी, केला, पपीता या आम जैसी पीली चीज़ें रखें।
कब: गुरुवार
न करें
ग्रह के वार का व्रत या एकादशी, अपनी सेहत के हिसाब से; बीमारी, गर्भावस्था या दवा में डॉक्टर से पूछें।
गुरुवार को एक समय पीला, सादा भोजन (जैसे चने की दाल, बेसन) लें; सुबह विष्णु जी का स्मरण करें और बृहस्पतिवार व्रत-कथा पढ़ या सुन सकते हैं।
कब: गुरुवार, शुक्ल पक्ष के गुरुवार से शुरुआत
करें
न करें
परंपरा गुरु को विष्णु-भक्ति से जोड़ती है; एकादशी पर अन्न छोड़कर फलाहार या एक समय भोजन करें।
कब: हर पक्ष की एकादशी
न करें
ग्रह जिन बातों का कारक है, उनसे जुड़ा रोज़ का व्यवहार: बड़ों का आदर, ईमानदारी, अनुशासन।
प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए यह आचरण बताता है: बड़ों की बात मानना, वेद-पुराण सुनना, मन को शुद्ध रखना। रोज़ कुछ देर कोई अच्छा ग्रंथ पढ़ें या सुनें।
कब: रोज़
फलदीपिका भाव-कारकों में गुरु को पाँचवें (संतान) और नौवें (धर्म, भाग्य) भाव का कारक बताती है। इसलिए गुरु के उपाय में बच्चों, शिक्षकों और धर्म के प्रति आदर पर ध्यान दिया जाता है (आचरण का यह रूप परंपरा है)।
कब: —
अपने शिक्षकों, गुरुजन और बड़ों को समय-समय पर याद करें, उनसे मिलें या फ़ोन करें; बच्चों को धैर्य से सिखाएँ; किसी को सलाह दें तो ईमानदारी से दें।
कब: रोज़, ख़ासकर गुरुवार
करें
न करें
ग्रह के वार पर उसके रंग के कपड़े या फूल, और उससे जुड़ी दिशा का ध्यान।
प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए उनके रंग के वस्त्र और फूल बताता है; गुरु का रंग पीला है। गुरुवार को पीला कपड़ा या पीला रुमाल पहनें, पूजा में पीले फूल रखें।
कब: गुरुवार
करें
फलदीपिका गुरु की दिशा उत्तर-पूर्व (ईशान) बताती है। पूजा या पढ़ाई के समय उत्तर-पूर्व की ओर मुँह कर सकते हैं, और घर का ईशान कोना साफ़ रखें।
कब: पूजा या पढ़ाई के समय
गाय, कुत्ते, पक्षी या चींटियों को भोजन, बड़ों और ज़रूरतमंदों की सेवा; किसी जीव को कष्ट नहीं।
गुरुवार को घर के बुज़ुर्गों, किसी शिक्षक या साधु-संत के लिए कोई छोटा काम करें, उनके पास बैठें, उनकी बात सुनें।
कब: गुरुवार
गुरुवार को किसी गाय या गौशाला में थोड़ी भीगी चने की दाल, गुड़ के एक टुकड़े के साथ, खिलाएँ।
कब: गुरुवार
न करें
ग्रह से जुड़े पेड़ या पौधे को पानी देना या लगाना (जैसे शनि के लिए शमी, गुरु के लिए पीपल)।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र हवन में गुरु की समिधा पीपल बताता है, और फलदीपिका भी अश्वत्थ (पीपल) को गुरु के स्थानों में गिनती है। गुरुवार को पीपल की जड़ में जल दें या कहीं खुली जगह पीपल लगाएँ (जल देना और लगाना परंपरा है)।
कब: गुरुवार सुबह
करें
लोक में केले के पौधे को गुरु से जोड़ा जाता है; गुरुवार को उसमें जल और हल्दी मिला जल दें।
कब: गुरुवार
न करें
ग्रह का नाम-मंत्र, बीज मंत्र या स्तोत्र, रोज़ थोड़ी देर शांत मन से।
सुबह नहाकर शांत जगह बैठें और 'ॐ बृहस्पतये नमः' का 108 बार (एक माला) जाप करें।
कब: गुरुवार सुबह, या रोज़
करें
तांत्रिक परंपरा का बीज मंत्र; गुरुवार को 108 बार जाप करें।
कब: गुरुवार
गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम पढ़ें या सुनें।
कब: गुरुवार
न करें
ग्रह के वार पर दीपक जलाना या उससे जुड़े मंदिर में दर्शन।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र ग्रह-पूजा में उसके रंग के फूल-वस्त्र, चंदन, दीप और धूप चढ़ाने की बात कहता है। गुरुवार को घर के मंदिर में, या केले के पौधे के पास, घी का दीप जलाएँ (घी का दीप परंपरा है)।
कब: गुरुवार शाम
गुरुवार को विष्णु मंदिर या किसी नवग्रह मंदिर में गुरु के दर्शन करें, पीले फूल चढ़ाएँ।
कब: गुरुवार
न करें
लाल किताब (एक अलग परंपरा) के सरल, हानिरहित टोटके; नदी, जीव या संपत्ति को नुकसान वाला कुछ नहीं।
नहाने के बाद माथे पर केसर या हल्दी का छोटा तिलक लगाएँ।
कब: रोज़ या गुरुवार
न करें
लाल किताब गुरु को पिता, दादा और गुरुजन से जोड़ती है; उनका आदर करें और गुरुवार को उनका आशीर्वाद लें।
कब: गुरुवार
गुरुवार को थोड़ी चने की दाल या हल्दी किसी मंदिर में दें।
कब: गुरुवार
न करें
ग्रह के वार पर उससे जुड़ी कोई छोटी चीज़ अपनी सामर्थ्य से किसी ज़रूरतमंद को देना।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र (84.25) गुरु के लिए वस्त्र-दान, और प्रश्न मार्ग पीले रेशम का दान बताता है। यह जानकारी है; अपनी सामर्थ्य से बाहर कुछ न करें।
कब: गुरुवार
गुरुवार को किसी ज़रूरतमंद या मंदिर में चने की दाल और हल्दी दें, या किसी बच्चे को किताब।
कब: गुरुवार
न करें
बृहत् पराशर होरा शास्त्र गुरु के लिए ब्राह्मण-भोजन में दही-चावल बताता है। आज का रूप (परंपरा): किसी ज़रूरतमंद को दही-चावल खिलाएँ।
कब: गुरुवार
ग्रह से जुड़ी जड़ी-बूटी डाले पानी से स्नान; त्वचा पर जलन हो तो न करें।
प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए 'उस ग्रह की औषधियों वाले जल' से स्नान बताता है।
कब: —
बाल्टी भर पानी में एक चुटकी हल्दी, थोड़ी मुलेठी और कुछ दाने पीली सरसों डालकर स्नान करें। सूचियाँ परंपराओं में अलग-अलग मिलती हैं।
कब: गुरुवार सुबह
करें
न करें
ग्रह से जुड़ी पौधे की जड़, कपड़े या ताबीज़ में धारण; परंपराएँ अलग-अलग जड़ बताती हैं।
परंपरा गुरु के लिए केले की जड़ (या साबुत हल्दी की गाँठ) बताती है: गुरुवार को पीले कपड़े में बाँधकर या पीले धागे में बाँह पर धारण करते हैं।
कब: गुरुवार, शुक्ल पक्ष
करें
न करें
ग्रह से जुड़े मुख का रुद्राक्ष (जैसे शनि के लिए 7 मुखी), असली की जाँच के साथ।
परंपरा पाँच मुखी रुद्राक्ष को गुरु से जोड़ती है। पीले या लाल धागे में गले में या कलाई पर पहनें। यह सबसे आम रुद्राक्ष है, इसलिए दाम भी कम होना चाहिए।
कब: गुरुवार
करें
न करें
ताँबे या भोजपत्र पर ग्रह का अंक-यंत्र, पूजा-स्थान पर; किसी शक्ति का दावा नहीं।
ताँबे की प्लेट या भोजपत्र पर बना गुरु यंत्र गुरुवार को घर के मंदिर में रखें; पूजा के समय पीले फूल और दीप के साथ उसका स्मरण करें।
कब: गुरुवार
करें
न करें
पंडित जी से आपके नाम के संकल्प के साथ ग्रह का जाप या हवन; ख़र्च पहले से तय करें।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र गुरु के वैदिक मंत्र (आरंभ: 'बृहस्पते अति यदर्यो…') की जाप-संख्या 19,000 बताता है। पंडित संकल्प लेकर, ग्रह-पूजन के बाद यह जाप करते हैं; प्रायः कई दिन या कई पंडितों में बँटता है।
कब: गुरुवार से आरंभ
बृहत् पराशर होरा शास्त्र गुरु के हवन में पीपल की समिधा, शहद-घी-दही या दूध के साथ, 108 या 28 आहुतियाँ बताता है।
कब: जाप के बाद
संकल्प, गणेश-पूजन, गुरु-पूजन (पीले वस्त्र-फूल, चने की दाल), मंत्र-जाप और छोटा हवन। आम तौर पर ₹251–₹2,100 (छोटी पूजा से लेकर हवन सहित); पूरी 19,000 जाप-संख्या का ख़र्च इससे ज़्यादा हो सकता है, पहले लिखित में पूछ लें।
कब: गुरुवार
न करें
केवल कुंडली के शुभ स्वामी ग्रह के लिए; पहले कम-ख़र्च उपरत्न, फिर प्रमाणपत्र वाला रत्न। कोई रत्न ज़रूरी नहीं।
हर रत्न के साथ उपरत्न पहले दिखाएँ (कम ख़र्च), फिर रत्न। कोई रत्न 'ज़रूरी' नहीं; ₹0 उपाय हमेशा ऊपर।
बच्चों (12 वर्ष से कम) के लिए कोई रत्न नहीं। गर्भावस्था, बीमारी या दुख के समय रत्न का प्रस्ताव नहीं (W12 नियम)।
कम ख़र्च वाला विकल्प पहले। सोने की अंगूठी में, तर्जनी उँगली में, गुरुवार को पहनते हैं (उपरत्न, धातु, उँगली, दिन: परंपरा)।
कब: गुरुवार, शुक्ल पक्ष
करें
प्रश्न मार्ग गुरु का रत्न 'पुष्यराग' (पुखराज) बताता है, गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के प्रसंग में; कुंडली के शुभ स्वामी ग्रह के लिए रत्न पहनना आज की परंपरा है। सोना, तर्जनी उँगली, गुरुवार (धातु, उँगली, दिन: परंपरा)।
कब: गुरुवार, शुक्ल पक्ष
करें
न करें
इस डिवाइस पर अधिकतम 10 लोग सहेज सकते हैं।
अभी कोई सहेजा नहीं गया। अपना या परिवार में किसी का जन्म विवरण जोड़िए।
10 लोग सहेजे जा चुके हैं। नया जोड़ने के लिए किसी एक को हटाइए।
दो लोगों का मिलान करेंइस डिवाइस से सभी सहेजे गए लोग हट जाएँगे। आगे बढ़ें?
यह विवरण सिर्फ़ इसी फ़ोन या कंप्यूटर पर रहता है।
हम साइट को बेहतर बनाने के लिए कुछ आँकड़े (जैसे कौन-सा पन्ना खुला) गिनते हैं। आपका जन्म विवरण सिर्फ़ आपके डिवाइस पर रहता है, जब तक आप उसे भेजें नहीं। विस्तार से पढ़ें