चंद्र का अनाज: चावल
सोमवार को भोजन में चावल, दूध या दही रखें। नवधान्य की आम सूची में चावल चंद्र का अनाज है।
कब: सोमवार
शास्त्र · Phaladīpikā (V. S. Sastri) II.28
करें / न करें
न करें
- दूध से परेशानी (लैक्टोज़) हो तो दूध की जगह चावल ही रखें।
घर का सुकून सबके मिल-जुलकर रहने से आता है। परंपरा घर-परिवार को 4थे भाव, चंद्र और गुरु (बृहस्पति) से जोड़ती है; नीचे ₹0 से शुरू होने वाले विकल्प हैं। चुनाव आपका है।
अभी नहीं हो पाया। थोड़ी देर बाद फिर कोशिश करें।
ग्रह के वार पर उससे जुड़ा सादा अन्न या फल खाना या बाँटना।
सोमवार को भोजन में चावल, दूध या दही रखें। नवधान्य की आम सूची में चावल चंद्र का अनाज है।
कब: सोमवार
न करें
BPHS चंद्र की पूजा के बाद ब्राह्मणों को दूध में पके चावल (खीर) खिलाने की बात कहता है।
कब: चंद्र की पूजा के बाद
सोमवार या पूर्णिमा को खीर बनाकर घर की बुज़ुर्ग महिलाओं और किसी ज़रूरतमंद को खिलाएँ।
कब: सोमवार या पूर्णिमा
करें
ग्रह के वार का व्रत या एकादशी, अपनी सेहत के हिसाब से; बीमारी, गर्भावस्था या दवा में डॉक्टर से पूछें।
एक समय सादा भोजन या फलाहार; सुबह शिवजी को जल चढ़ाकर दिन शुरू करें।
कब: सोमवार (शुक्ल पक्ष के पहले सोमवार से शुरू करने की परंपरा है)
न करें
पूर्णिमा को दिन में सादा रहकर शाम को चंद्रमा को जल (अर्घ्य) देकर भोजन करें।
कब: पूर्णिमा
न करें
ग्रह जिन बातों का कारक है, उनसे जुड़ा रोज़ का व्यवहार: बड़ों का आदर, ईमानदारी, अनुशासन।
शास्त्र चंद्र को कालपुरुष का मन और माता का कारक बताता है। इसलिए परंपरा चंद्र के उपाय में माँ और अपने मन की देखभाल को रखती है।
कब: हमेशा
माँ (या माँ-समान महिला) से रोज़ बात करें, उनका आशीर्वाद लें। नींद पूरी लें, कुछ देर चुपचाप बैठें या टहलें।
कब: रोज़
करें
न करें
बड़ों की बात मानना, वेद-पुराण सुनना और मन को शुद्ध रखना: प्रश्न मार्ग इसे सभी ग्रहों के लिए बताता है।
कब: जब भी मन हो
ग्रह के वार पर उसके रंग के कपड़े या फूल, और उससे जुड़ी दिशा का ध्यान।
प्रश्न मार्ग चंद्र के लिए सफ़ेद वस्त्र और सफ़ेद फूलों से पूजा बताता है। सोमवार को सफ़ेद या हल्के क्रीम रंग के कपड़े पहन सकते हैं।
कब: सोमवार
जातक पारिजात चंद्र को वायव्य (उत्तर-पश्चिम) दिशा का स्वामी बताता है।
कब: —
BPHS कहता है कि ग्रहों के चित्र कपड़े पर उनके रंगों में बनाकर उनकी अपनी दिशा में रखे जाएँ। पूजा-स्थान में चंद्र का चित्र उत्तर-पश्चिम की ओर रख सकते हैं।
कब: पूजा के समय
करें
गाय, कुत्ते, पक्षी या चींटियों को भोजन, बड़ों और ज़रूरतमंदों की सेवा; किसी जीव को कष्ट नहीं।
माँ, दादी-नानी या पड़ोस की किसी अकेली बुज़ुर्ग महिला के साथ समय बिताएँ, उनके छोटे काम कर दें।
कब: रोज़, ख़ास कर सोमवार
गर्मी में घर के बाहर पक्षियों के लिए पानी का बर्तन रखें, या प्याऊ में मदद करें।
कब: रोज़
करें
ग्रह से जुड़े पेड़ या पौधे को पानी देना या लगाना (जैसे शनि के लिए शमी, गुरु के लिए पीपल)।
BPHS चंद्र के हवन के लिए पलाश की लकड़ी बताता है; इसलिए पलाश को चंद्र का वृक्ष माना जाता है।
कब: —
सोमवार को पलाश के पेड़ में जल दें, या पलाश (या कोई भी पेड़) लगाकर उसकी देखभाल करें।
कब: सोमवार सुबह
करें
ग्रह का नाम-मंत्र, बीज मंत्र या स्तोत्र, रोज़ थोड़ी देर शांत मन से।
BPHS चंद्र का वैदिक मंत्र और उसकी जप-संख्या 11,000 बताता है। यह मंत्र किसी जानकार से सीखकर, शुद्ध उच्चारण से जपें।
कब: सोमवार से शुरू, शाम को
'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः' या सरल 'ॐ चन्द्राय नमः' / 'ॐ सोमाय नमः' की एक माला (108)। मन को शांत करने में सहायक माना जाता है।
कब: सोमवार शाम, या रोज़
करें
चंद्र शिव के मस्तक पर है, इसलिए परंपरा चंद्र के लिए 'ॐ नमः शिवाय' का जप और शिवलिंग पर जल-दूध चढ़ाने को रखती है।
कब: सोमवार
ग्रह के वार पर दीपक जलाना या उससे जुड़े मंदिर में दर्शन।
BPHS ग्रह-पूजा में ग्रह के रंग के फूल-वस्त्र, चंदन, दीप और गुग्गुल अर्पित करने की बात कहता है।
कब: —
सोमवार शाम शिव मंदिर में घी का दीपक जलाएँ और शिवलिंग पर जल चढ़ाएँ।
कब: सोमवार शाम
पास के नवग्रह मंदिर में चंद्र के दर्शन; मन हो तो सोमनाथ जैसे तीर्थ की यात्रा, जिसे परंपरा चंद्रदेव से जोड़ती है।
कब: सोमवार या पूर्णिमा
करें
लाल किताब (एक अलग परंपरा) के सरल, हानिरहित टोटके; नदी, जीव या संपत्ति को नुकसान वाला कुछ नहीं।
कोई भी ज़रूरी काम माँ (या माँ-समान बुज़ुर्ग महिला) के पैर छूकर शुरू करें।
कब: ज़रूरी काम से पहले
रात को सिरहाने एक बर्तन में पानी रखकर सोएँ और सुबह वह पानी किसी पेड़ की जड़ में डाल दें।
कब: रात / अगली सुबह
घर में चाँदी का कोई छोटा टुकड़ा या सिक्का हो तो उसे साफ़ करके अपने पास (पर्स में) रखें।
कब: सोमवार से
न करें
ग्रह के वार पर उससे जुड़ी कोई छोटी चीज़ अपनी सामर्थ्य से किसी ज़रूरतमंद को देना।
BPHS और प्रश्न मार्ग, दोनों चंद्र के लिए शंख का दान बताते हैं।
कब: —
जब गोचर में चंद्र प्रतिकूल माना जाए, प्रश्न मार्ग शंख का दान बताता है।
कब: गोचर के समय
चावल, दूध, चीनी या सफ़ेद कपड़ा किसी ज़रूरतमंद को; या किसी मंदिर में छोटा शंख।
कब: सोमवार, या पूर्णिमा
करें
ग्रह से जुड़ी जड़ी-बूटी डाले पानी से स्नान; त्वचा पर जलन हो तो न करें।
प्रश्न मार्ग ग्रह के अनुसार औषधि वाले जल से स्नान की बात कहता है (गोचर के प्रसंग में)।
कब: —
नहाने के पानी में एक चुटकी सफ़ेद चंदन, कुछ सफ़ेद फूल (जैसे मोगरा) और चाहें तो थोड़ा गंगाजल डालकर स्नान करें।
कब: सोमवार सुबह
न करें
ग्रह से जुड़ी पौधे की जड़, कपड़े या ताबीज़ में धारण; परंपराएँ अलग-अलग जड़ बताती हैं।
खिरनी की जड़ का छोटा टुकड़ा सफ़ेद कपड़े में बाँधकर, ताबीज़ की तरह गले या भुजा में पहनने की परंपरा है।
कब: सोमवार
करें
ग्रह से जुड़े मुख का रुद्राक्ष (जैसे शनि के लिए 7 मुखी), असली की जाँच के साथ।
परंपरा दो मुखी रुद्राक्ष को चंद्र से जोड़ती है। सफ़ेद या लाल धागे में, 'ॐ नमः शिवाय' की एक माला के बाद पहनें।
कब: सोमवार
न करें
ताँबे या भोजपत्र पर ग्रह का अंक-यंत्र, पूजा-स्थान पर; किसी शक्ति का दावा नहीं।
BPHS पूजा के लिए चंद्र की प्रतिमा स्फटिक (क्रिस्टल) की बताता है।
कब: —
चाँदी, ताँबे या भोजपत्र पर बना चंद्र यंत्र पूजा-स्थान में रखें; सोमवार को दीप और जप के समय उस पर ध्यान रखें।
कब: सोमवार
करें
पंडित जी से आपके नाम के संकल्प के साथ ग्रह का जाप या हवन; ख़र्च पहले से तय करें।
BPHS चंद्र के वैदिक मंत्र का 11,000 जप, फिर पलाश की समिधा से (शहद, घी, दही या दूध मिलाकर) 108 या 28 आहुति का हवन बताता है।
कब: —
पंडित आपके नाम-गोत्र से संकल्प लेकर जप पूरा करते हैं, अंत में दशांश (जप का दसवाँ भाग) हवन। आम तौर पर ₹251 (छोटा जप) से ₹2,100 (पूरा जप-हवन) तक ख़र्च आता है।
कब: सोमवार से शुरू
करें
केवल कुंडली के शुभ स्वामी ग्रह के लिए; पहले कम-ख़र्च उपरत्न, फिर प्रमाणपत्र वाला रत्न। कोई रत्न ज़रूरी नहीं।
हर रत्न के साथ उपरत्न पहले दिखाएँ (कम ख़र्च), फिर रत्न। कोई रत्न 'ज़रूरी' नहीं; ₹0 उपाय हमेशा ऊपर।
बच्चों (12 वर्ष से कम) के लिए कोई रत्न नहीं। गर्भावस्था, बीमारी या दुख के समय रत्न का प्रस्ताव नहीं (W12 नियम)।
कम ख़र्च का विकल्प। चाँदी की अँगूठी में कनिष्ठा (छोटी) उँगली में। केवल तब, जब यह ग्रह आपकी कुंडली के लिए शुभ स्वामी हो (gem rule)।
कब: सोमवार, शुक्ल पक्ष
करें
न करें
प्रश्न मार्ग चंद्र का रत्न मोती (मुक्ता) बताता है। धातु (चाँदी), उँगली (कनिष्ठा) और दिन (सोमवार) परंपरा से। केवल तब, जब यह ग्रह आपकी कुंडली के लिए शुभ स्वामी हो (gem rule)।
कब: सोमवार, शुक्ल पक्ष
करें
न करें
ग्रह के वार पर उससे जुड़ा सादा अन्न या फल खाना या बाँटना।
गुरुवार को खाने में चने की दाल, बेसन की कढ़ी या चीला शामिल करें।
कब: गुरुवार
करें
गुरुवार को खाने में हल्दी, केला, पपीता या आम जैसी पीली चीज़ें रखें।
कब: गुरुवार
न करें
ग्रह के वार का व्रत या एकादशी, अपनी सेहत के हिसाब से; बीमारी, गर्भावस्था या दवा में डॉक्टर से पूछें।
गुरुवार को एक समय पीला, सादा भोजन (जैसे चने की दाल, बेसन) लें; सुबह विष्णु जी का स्मरण करें और बृहस्पतिवार व्रत-कथा पढ़ या सुन सकते हैं।
कब: गुरुवार, शुक्ल पक्ष के गुरुवार से शुरुआत
करें
न करें
परंपरा गुरु को विष्णु-भक्ति से जोड़ती है; एकादशी पर अन्न छोड़कर फलाहार या एक समय भोजन करें।
कब: हर पक्ष की एकादशी
न करें
ग्रह जिन बातों का कारक है, उनसे जुड़ा रोज़ का व्यवहार: बड़ों का आदर, ईमानदारी, अनुशासन।
प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए यह आचरण बताता है: बड़ों की बात मानना, वेद-पुराण सुनना, मन को शुद्ध रखना। रोज़ कुछ देर कोई अच्छा ग्रंथ पढ़ें या सुनें।
कब: रोज़
फलदीपिका भाव-कारकों में गुरु को पाँचवें (संतान) और नौवें (धर्म, भाग्य) भाव का कारक बताती है। इसलिए गुरु के उपाय में बच्चों, शिक्षकों और धर्म के प्रति आदर पर ध्यान दिया जाता है (आचरण का यह रूप परंपरा है)।
कब: —
अपने शिक्षकों, गुरुजन और बड़ों को समय-समय पर याद करें, उनसे मिलें या फ़ोन करें; बच्चों को धैर्य से सिखाएँ; किसी को सलाह दें तो ईमानदारी से दें।
कब: रोज़, ख़ासकर गुरुवार
करें
न करें
ग्रह के वार पर उसके रंग के कपड़े या फूल, और उससे जुड़ी दिशा का ध्यान।
प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए उनके रंग के वस्त्र और फूल बताता है; गुरु का रंग पीला है। गुरुवार को पीला कपड़ा या पीला रुमाल पहनें, पूजा में पीले फूल रखें।
कब: गुरुवार
करें
फलदीपिका गुरु की दिशा उत्तर-पूर्व (ईशान) बताती है। पूजा या पढ़ाई के समय उत्तर-पूर्व की ओर मुँह कर सकते हैं, और घर का ईशान कोना साफ़ रखें।
कब: पूजा या पढ़ाई के समय
गाय, कुत्ते, पक्षी या चींटियों को भोजन, बड़ों और ज़रूरतमंदों की सेवा; किसी जीव को कष्ट नहीं।
गुरुवार को घर के बुज़ुर्गों, किसी शिक्षक या साधु-संत के लिए कोई छोटा काम करें, उनके पास बैठें, उनकी बात सुनें।
कब: गुरुवार
गुरुवार को किसी गाय या गौशाला में थोड़ी भीगी चने की दाल, गुड़ के एक टुकड़े के साथ, खिलाएँ।
कब: गुरुवार
न करें
ग्रह से जुड़े पेड़ या पौधे को पानी देना या लगाना (जैसे शनि के लिए शमी, गुरु के लिए पीपल)।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र हवन में गुरु की समिधा पीपल बताता है, और फलदीपिका भी अश्वत्थ (पीपल) को गुरु के स्थानों में गिनती है। गुरुवार को पीपल की जड़ में जल दें या कहीं खुली जगह पीपल लगाएँ (जल देना और लगाना परंपरा है)।
कब: गुरुवार सुबह
करें
लोक में केले के पौधे को गुरु से जोड़ा जाता है; गुरुवार को उसमें जल और हल्दी मिला जल दें।
कब: गुरुवार
न करें
ग्रह का नाम-मंत्र, बीज मंत्र या स्तोत्र, रोज़ थोड़ी देर शांत मन से।
सुबह नहाकर शांत जगह बैठें और 'ॐ बृहस्पतये नमः' का 108 बार (एक माला) जाप करें।
कब: गुरुवार सुबह, या रोज़
करें
तांत्रिक परंपरा का बीज मंत्र; गुरुवार को 108 बार जाप करें।
कब: गुरुवार
गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम पढ़ें या सुनें।
कब: गुरुवार
न करें
ग्रह के वार पर दीपक जलाना या उससे जुड़े मंदिर में दर्शन।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र ग्रह-पूजा में उसके रंग के फूल-वस्त्र, चंदन, दीप और धूप चढ़ाने की बात कहता है। गुरुवार को घर के मंदिर में, या केले के पौधे के पास, घी का दीप जलाएँ (घी का दीप परंपरा है)।
कब: गुरुवार शाम
गुरुवार को विष्णु मंदिर या किसी नवग्रह मंदिर में गुरु के दर्शन करें, पीले फूल चढ़ाएँ।
कब: गुरुवार
न करें
लाल किताब (एक अलग परंपरा) के सरल, हानिरहित टोटके; नदी, जीव या संपत्ति को नुकसान वाला कुछ नहीं।
नहाने के बाद माथे पर केसर या हल्दी का छोटा तिलक लगाएँ।
कब: रोज़ या गुरुवार
न करें
लाल किताब गुरु को पिता, दादा और गुरुजन से जोड़ती है; उनका आदर करें और गुरुवार को उनका आशीर्वाद लें।
कब: गुरुवार
गुरुवार को थोड़ी चने की दाल या हल्दी किसी मंदिर में दें।
कब: गुरुवार
न करें
ग्रह के वार पर उससे जुड़ी कोई छोटी चीज़ अपनी सामर्थ्य से किसी ज़रूरतमंद को देना।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र (84.25) गुरु के लिए वस्त्र-दान, और प्रश्न मार्ग पीले रेशम का दान बताता है। यह जानकारी है; अपनी सामर्थ्य से बाहर कुछ न करें।
कब: गुरुवार
गुरुवार को किसी ज़रूरतमंद या मंदिर में चने की दाल और हल्दी दें, या किसी बच्चे को किताब।
कब: गुरुवार
न करें
बृहत् पराशर होरा शास्त्र गुरु के लिए ब्राह्मण-भोजन में दही-चावल बताता है। आज का रूप (परंपरा): किसी ज़रूरतमंद को दही-चावल खिलाएँ।
कब: गुरुवार
ग्रह से जुड़ी जड़ी-बूटी डाले पानी से स्नान; त्वचा पर जलन हो तो न करें।
प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के लिए 'उस ग्रह की औषधियों वाले जल' से स्नान बताता है।
कब: —
बाल्टी भर पानी में एक चुटकी हल्दी, थोड़ी मुलेठी और कुछ दाने पीली सरसों डालकर स्नान करें। सूचियाँ परंपराओं में अलग-अलग मिलती हैं।
कब: गुरुवार सुबह
करें
न करें
ग्रह से जुड़ी पौधे की जड़, कपड़े या ताबीज़ में धारण; परंपराएँ अलग-अलग जड़ बताती हैं।
परंपरा गुरु के लिए केले की जड़ (या साबुत हल्दी की गाँठ) बताती है: गुरुवार को पीले कपड़े में बाँधकर या पीले धागे में बाँह पर धारण करते हैं।
कब: गुरुवार, शुक्ल पक्ष
करें
न करें
ग्रह से जुड़े मुख का रुद्राक्ष (जैसे शनि के लिए 7 मुखी), असली की जाँच के साथ।
परंपरा पाँच मुखी रुद्राक्ष को गुरु से जोड़ती है। पीले या लाल धागे में गले में या कलाई पर पहनें। यह सबसे आम रुद्राक्ष है, इसलिए दाम भी कम होना चाहिए।
कब: गुरुवार
करें
न करें
ताँबे या भोजपत्र पर ग्रह का अंक-यंत्र, पूजा-स्थान पर; किसी शक्ति का दावा नहीं।
ताँबे की प्लेट या भोजपत्र पर बना गुरु यंत्र गुरुवार को घर के मंदिर में रखें; पूजा के समय पीले फूल और दीप के साथ उसका स्मरण करें।
कब: गुरुवार
करें
न करें
पंडित जी से आपके नाम के संकल्प के साथ ग्रह का जाप या हवन; ख़र्च पहले से तय करें।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र गुरु के वैदिक मंत्र (आरंभ: 'बृहस्पते अति यदर्यो…') की जाप-संख्या 19,000 बताता है। पंडित संकल्प लेकर, ग्रह-पूजन के बाद यह जाप करते हैं; प्रायः कई दिन या कई पंडितों में बँटता है।
कब: गुरुवार से आरंभ
बृहत् पराशर होरा शास्त्र गुरु के हवन में पीपल की समिधा, शहद-घी-दही या दूध के साथ, 108 या 28 आहुतियाँ बताता है।
कब: जाप के बाद
संकल्प, गणेश-पूजन, गुरु-पूजन (पीले वस्त्र-फूल, चने की दाल), मंत्र-जाप और छोटा हवन। आम तौर पर ₹251–₹2,100 (छोटी पूजा से लेकर हवन सहित); पूरी 19,000 जाप-संख्या का ख़र्च इससे ज़्यादा हो सकता है, पहले लिखित में पूछ लें।
कब: गुरुवार
न करें
केवल कुंडली के शुभ स्वामी ग्रह के लिए; पहले कम-ख़र्च उपरत्न, फिर प्रमाणपत्र वाला रत्न। कोई रत्न ज़रूरी नहीं।
हर रत्न के साथ उपरत्न पहले दिखाएँ (कम ख़र्च), फिर रत्न। कोई रत्न 'ज़रूरी' नहीं; ₹0 उपाय हमेशा ऊपर।
बच्चों (12 वर्ष से कम) के लिए कोई रत्न नहीं। गर्भावस्था, बीमारी या दुख के समय रत्न का प्रस्ताव नहीं (W12 नियम)।
कम ख़र्च वाला विकल्प पहले। सोने की अंगूठी में, तर्जनी उँगली में, गुरुवार को पहनते हैं (उपरत्न, धातु, उँगली, दिन: परंपरा)।
कब: गुरुवार, शुक्ल पक्ष
करें
प्रश्न मार्ग गुरु का रत्न 'पुष्यराग' (पुखराज) बताता है, गोचर में प्रतिकूल ग्रहों के प्रसंग में; कुंडली के शुभ स्वामी ग्रह के लिए रत्न पहनना आज की परंपरा है। सोना, तर्जनी उँगली, गुरुवार (धातु, उँगली, दिन: परंपरा)।
कब: गुरुवार, शुक्ल पक्ष
करें
न करें
इस डिवाइस पर अधिकतम 10 लोग सहेज सकते हैं।
अभी कोई सहेजा नहीं गया। अपना या परिवार में किसी का जन्म विवरण जोड़िए।
10 लोग सहेजे जा चुके हैं। नया जोड़ने के लिए किसी एक को हटाइए।
दो लोगों का मिलान करेंइस डिवाइस से सभी सहेजे गए लोग हट जाएँगे। आगे बढ़ें?
यह विवरण सिर्फ़ इसी फ़ोन या कंप्यूटर पर रहता है।
हम साइट को बेहतर बनाने के लिए कुछ आँकड़े (जैसे कौन-सा पन्ना खुला) गिनते हैं। आपका जन्म विवरण सिर्फ़ आपके डिवाइस पर रहता है, जब तक आप उसे भेजें नहीं। विस्तार से पढ़ें