भारी दौर में उपाय: धैर्य के साथ

कभी-कभी समय भारी लगता है, और यह सबके साथ होता है। परंपरा ऐसे समय में चल रही दशा के ग्रहों की उपासना और सादे आचरण की बात करती है; नीचे ₹0 से शुरू होने वाले विकल्प हैं।

परंपरा इस विषय में किन ग्रहों को देखती है

  • चल रही महादशा का स्वामी शास्त्र
  • चल रही अंतर्दशा का स्वामी शास्त्र
  • शनि: साढ़ेसाती चल रही हो तो परंपरा शनि की उपासना जोड़ती है परंपरा

साढ़ेसाती को डर की तरह न लिखें: 'साढ़ेसाती ढाई-ढाई साल के तीन चरणों का समय है जिसे परंपरा अनुशासन और धैर्य से जोड़ती है।'

आपकी कुंडली में जुड़े ग्रह

    अभी नहीं हो पाया। थोड़ी देर बाद फिर कोशिश करें।

    भारी दौर हमेशा के लिए नहीं होता; दशाएँ और गोचर बदलते हैं। अपनी दशा की तारीखें देखें →

    शनि

    आहार (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह के वार पर उससे जुड़ा सादा अन्न या फल खाना या बाँटना।

    शनि

    शनि का अनाज: काले तिल (साथ में उड़द)

    शनिवार को भोजन में थोड़े काले तिल (जैसे तिल की चटनी या तिल-गुड़) या उड़द की दाल रखें। तिल का शनि से संबंध ग्रंथ में मिलता है; इसे भोजन में रखना परंपरा है।

    कब: शनिवार, दोपहर या शाम का भोजन

    शास्त्र · Phaladīpikā (V. S. Sastri) 2.28
    Phaladīpikā (V. S. Sastri) 2.28
    करें / न करें

    करें

    • सादा, घर का बना भोजन; थोड़ी मात्रा काफ़ी है

    न करें

    • कोई बीमारी, एलर्जी या ख़ास डाइट हो तो खान-पान बदलने से पहले डॉक्टर से पूछें
    शनि

    किसी ज़रूरतमंद को तिल वाले चावल खिलाना

    ग्रंथ में शनि के लिए तिल मिलाकर पकाए चावल ब्राह्मणों को खिलाने की बात है। आज के रूप में (परंपरा): घर पर तिल-चावल या तिल की खिचड़ी बनाकर किसी ज़रूरतमंद, मज़दूर या बुज़ुर्ग को आदर से खिलाएँ।

    कब: शनिवार, या जब सुविधा हो

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.23–24
    BPHS (Santhanam) 84.23–24

    व्रत (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह के वार का व्रत या एकादशी, अपनी सेहत के हिसाब से; बीमारी, गर्भावस्था या दवा में डॉक्टर से पूछें।

    शनि

    शनिवार का व्रत

    दिन में एक बार सादा भोजन (जैसे उड़द या तिल वाला), या फल-दूध। शाम को दीपक जलाकर व्रत खोलें। व्रत जितना सहज हो उतना ही रखें।

    कब: शनिवार; परंपरा में शुक्ल पक्ष के पहले शनिवार से शुरू करते हैं

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • पानी पीते रहें; अपनी क्षमता के अनुसार ही

    न करें

    • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें
    शनि

    एकादशी (वैकल्पिक)

    महीने की दोनों एकादशी पर अनाज छोड़कर फलाहार। यह किसी एक ग्रह का नहीं, पूरे मन-अनुशासन का व्रत माना जाता है।

    कब: हर एकादशी

    परंपरा
    करें / न करें

    न करें

    • स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था या दवा चल रही हो तो व्रत न करें या डॉक्टर से पूछें

    आचरण / कर्म (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह जिन बातों का कारक है, उनसे जुड़ा रोज़ का व्यवहार: बड़ों का आदर, ईमानदारी, अनुशासन।

    शनि

    बड़ों की बात मानना और मन साफ़ रखना

    प्रश्न मार्ग गोचर में ग्रह प्रतिकूल हों तो बड़ों की बात मानने, अच्छी बातें सुनने और मन को पवित्र रखने को कहता है। रोज़ घर के किसी बुज़ुर्ग से कुछ देर बात करें, उनकी सलाह सुनें।

    कब: रोज़

    शास्त्र · Praśna Mārga XXII.31 (Raman tr.)
    Praśna Mārga XXII.31 (Raman tr.)
    शनि

    शनि का कारकत्व: सेवा

    BPHS के 'ग्रह-मंडल' में शनि को सेवक का स्थान दिया गया है। इसी से परंपरा शनि को सेवा, मेहनत और मेहनतकश लोगों से जोड़ती है।

    कब: —

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 3.14–15
    BPHS (Santhanam) 3.14–15
    शनि

    मेहनतकश लोगों का आदर, समय और वादे की पाबंदी

    घर या काम पर मदद करने वालों (सफ़ाई कर्मी, ड्राइवर, घरेलू सहायक, मज़दूर) से आदर से बोलें और उनकी मज़दूरी समय पर दें। जो काम हाथ में लें, उसे धीरज से पूरा करें; समय और वादे के पक्के रहें।

    कब: रोज़

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • छोटा-सा रोज़ का नियम बनाएँ और निभाएँ (जैसे समय पर उठना)

    न करें

    • किसी की मज़दूरी न रोकें, किसी का अपमान न करें

    रंग / वस्त्र / दिशा (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह के वार पर उसके रंग के कपड़े या फूल, और उससे जुड़ी दिशा का ध्यान।

    शनि

    रंग: गहरा (गहरा नीला, काला)

    प्रश्न मार्ग गोचर में प्रतिकूल ग्रह के लिए उसके रंग के कपड़े और फूल बताता है; शनि का रंग गहरा है। चाहें तो शनिवार को गहरे नीले या काले रंग का कोई कपड़ा पहनें, या पूजा में नीले फूल चढ़ाएँ।

    कब: शनिवार

    शास्त्र · Praśna Mārga XXII.27 (Raman tr.)
    Praśna Mārga XXII.27 (Raman tr.)
    करें / न करें

    न करें

    • किसी रंग से डरें नहीं; रंग पहनना केवल एक विकल्प है
    शनि

    दिशा: पश्चिम

    BPHS शनि को पश्चिम दिशा में बलवान (दिग्बल) बताता है। परंपरा में शनि की पूजा या जाप करते समय पश्चिम की ओर मुँह करके बैठते हैं।

    कब: पूजा या जाप के समय

    शास्त्र · Phaladīpikā (V. S. Sastri) II.16
    Phaladīpikā (V. S. Sastri) II.16
    करें / न करें

    करें

    • दिशा संभव न हो तो जैसे बैठ सकें वैसे बैठें; भाव ही मुख्य है

    सेवा (₹0 मुफ़्त)

    गाय, कुत्ते, पक्षी या चींटियों को भोजन, बड़ों और ज़रूरतमंदों की सेवा; किसी जीव को कष्ट नहीं।

    शनि

    बुज़ुर्गों और मेहनतकश लोगों की सेवा

    किसी वृद्धाश्रम में समय दें, पड़ोस के अकेले बुज़ुर्ग का हाल पूछें, या किसी मज़दूर को पानी-भोजन दें। हाथ से की गई सेवा परंपरा में शनि से जुड़ी मानी जाती है।

    कब: शनिवार, या जब भी हो सके

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • चुपचाप, बिना दिखावे के
    शनि

    कौवे या काले कुत्ते को रोटी

    एक रोटी (चाहें तो थोड़ा सरसों का तेल लगाकर) कौवों के लिए छत पर रखें या किसी कुत्ते को दें।

    कब: शनिवार

    लोक मान्यता
    करें / न करें

    न करें

    • जानवर को परेशान न करें, न बाँधें; बासी या ख़राब खाना न दें

    वृक्ष सेवा (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह से जुड़े पेड़ या पौधे को पानी देना या लगाना (जैसे शनि के लिए शमी, गुरु (बृहस्पति) के लिए पीपल)।

    शनि

    शमी का पेड़

    BPHS में शनि के हवन की समिधा शमी है, इसलिए शमी को शनि का वृक्ष माना जाता है। घर में गमले में शमी लगाएँ या पास के शमी को पानी दें; यह सेवा परंपरा है।

    कब: शनिवार, शाम

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.21–22
    BPHS (Santhanam) 84.21–22
    करें / न करें

    न करें

    • हरी डालियाँ न तोड़ें
    शनि

    पीपल को जल

    शनिवार सुबह पीपल की जड़ में एक लोटा जल चढ़ाएँ। उत्तर भारत में यह शनिवार की आम परंपरा है।

    कब: शनिवार, सुबह

    परंपरा

    मंत्र जाप / स्तोत्र / पाठ (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह का नाम-मंत्र, बीज मंत्र या स्तोत्र, रोज़ थोड़ी देर शांत मन से।

    शनि

    नाम-मंत्र: ॐ शनैश्चराय नमः

    शांत बैठकर 11 या 108 बार (एक माला) जपें। मन को एकाग्र करने में सहायक माना जाता है।

    कब: शनिवार, सुबह या शाम

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • धीरे और साफ़ उच्चारण
    शनि

    बीज मंत्र: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

    तांत्रिक परंपरा का बीज मंत्र। 108 बार, रुद्राक्ष या किसी भी माला पर।

    कब: शनिवार, सूर्यास्त के बाद

    परंपरा
    शनि

    पाठ: हनुमान चालीसा या शनि स्तोत्र

    उत्तर भारत की परंपरा में शनिवार को हनुमान चालीसा पढ़ी जाती है; दशरथ-कृत शनि स्तोत्र भी पढ़ा जाता है। जो सहज लगे, वह एक पाठ।

    कब: शनिवार

    परंपरा

    दीप दान / मंदिर दर्शन / तीर्थ (₹0 मुफ़्त)

    ग्रह के वार पर दीपक जलाना या उससे जुड़े मंदिर में दर्शन।

    शनि

    दीप: पूजा का अंग

    BPHS ग्रह-पूजा में ग्रह के रंग के फूल-वस्त्र, चंदन, दीप और गुग्गुल अर्पित करने को कहता है।

    कब: पूजा के समय

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.15–16
    BPHS (Santhanam) 84.15–16
    शनि

    तिल या सरसों के तेल का दीपक

    शनिवार शाम घर के मंदिर में या पीपल के नीचे तिल या सरसों के तेल का एक दीपक जलाएँ।

    कब: शनिवार, सूर्यास्त के बाद

    परंपरा
    करें / न करें

    न करें

    • दीपक को अकेला जलता न छोड़ें; सूखी पत्तियों और कपड़ों से दूर रखें
    शनि

    मंदिर दर्शन

    शनिवार को हनुमान मंदिर या शनि मंदिर में दर्शन; नवग्रह मंदिर में शनि के सामने प्रणाम। तीर्थ के रूप में तमिलनाडु का तिरुनल्लार (नवग्रह स्थल) और महाराष्ट्र का शनि शिंगणापुर जाने की परंपरा है। यह श्रद्धा की बात है।

    कब: शनिवार

    परंपरा

    लाल किताब (₹0 मुफ़्त)

    लाल किताब (एक अलग परंपरा) के सरल, हानिरहित टोटके; नदी, जीव या संपत्ति को नुकसान वाला कुछ नहीं।

    शनि

    छाया दान

    एक कटोरी सरसों के तेल में अपना चेहरा देखें और वह तेल किसी ज़रूरतमंद को या शनि मंदिर में दे दें।

    कब: शनिवार

    लाल किताब
    लाल किताब (अलग परंपरा)
    करें / न करें

    न करें

    • तेल ज़मीन या पानी में न बहाएँ
    शनि

    मज़दूरों को भोजन या मदद

    किसी मज़दूर या सफ़ाई कर्मी को भोजन, पानी या उनके काम की कोई चीज़ आदर से दें।

    कब: शनिवार, या कभी भी

    लाल किताब
    लाल किताब (अलग परंपरा)
    शनि

    नशे से दूरी

    लाल किताब शनि के लिए शराब और नशे से दूर रहने को कहती है।

    कब: हमेशा

    लाल किताब
    लाल किताब (अलग परंपरा)

    दान (₹0–₹51)

    ग्रह के वार पर उससे जुड़ी कोई छोटी चीज़ अपनी सामर्थ्य से किसी ज़रूरतमंद को देना।

    शनि

    शास्त्र में बताया दान: काली गाय

    BPHS शनि के लिए काली गाय का दान बताता है। यह पुराने समय का बड़ा दान है; आज कोई इसे करने को बाध्य नहीं।

    कब: —

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.25
    BPHS (Santhanam) 84.25
    शनि

    प्रश्न मार्ग में भी: काली गाय

    प्रश्न मार्ग गोचर में शनि प्रतिकूल हो तो काली गाय का दान बताता है।

    कब: गोचर के प्रसंग में

    शास्त्र · Praśna Mārga XXII.30 (Raman tr.)
    Praśna Mārga XXII.30 (Raman tr.)
    शनि

    आज का छोटा रूप

    गौशाला में थोड़ा चारा या सेवा; या किसी ज़रूरतमंद को काले तिल, उड़द, सरसों का तेल, कंबल या चप्पल। ₹0 का रूप: गौशाला में एक घंटा सेवा।

    कब: शनिवार, शाम

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • जितना सहज हो उतना ही; काम की चीज़ दें

    न करें

    • दान के लिए उधार न लें

    औषधि स्नान (₹0–₹99)

    ग्रह से जुड़ी जड़ी-बूटी डाले पानी से स्नान; त्वचा पर जलन हो तो न करें।

    शनि

    ग्रह की औषधि वाले जल से स्नान

    प्रश्न मार्ग गोचर में ग्रह प्रतिकूल हों तो रोज़ स्नान और 'ग्रह की औषधियों वाला जल' शरीर पर डालने की बात कहता है। रोज़ का साफ़ स्नान ही इसका ₹0 रूप है।

    कब: रोज़ सुबह

    शास्त्र · Praśna Mārga XXII.32 (Raman tr.)
    Praśna Mārga XXII.32 (Raman tr.)
    शनि

    शनि के लिए: काले तिल और सौंफ़

    नहाने के पानी में एक चुटकी काले तिल और थोड़ी सौंफ़ डालें (या रात को भिगोकर सुबह पानी छानकर)। अलग-अलग परंपराओं में सूची अलग है।

    कब: शनिवार, सुबह

    परंपरा
    करें / न करें

    न करें

    • त्वचा पर जलन या एलर्जी हो तो न करें; त्वचा की किसी परेशानी में सेहत के लिए डॉक्टर पहले

    जड़ी / मूल

    ग्रह से जुड़ी पौधे की जड़, कपड़े या ताबीज़ में धारण; परंपराएँ अलग-अलग जड़ बताती हैं।

    शनि

    बिच्छू बूटी की जड़ या शमी मूल

    परंपरा में शनि के लिए बिच्छू बूटी (या कुछ जगह शमी) की जड़ बताई जाती है। इसे काले या नीले कपड़े में बाँधकर दाईं बाँह पर या गले में पहनते हैं। परंपराएँ अलग-अलग हैं।

    कब: शनिवार, शुक्ल पक्ष

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • असली की पहचान के लिए 'असली कैसे जाँचें' वाला बॉक्स देखें

    न करें

    • जड़ खाने के लिए नहीं है; किसी बीमारी में सेहत के लिए डॉक्टर पहले

    असली कैसे पहचानें →

    रुद्राक्ष

    ग्रह से जुड़े मुख का रुद्राक्ष (जैसे शनि के लिए 7 मुखी), असली की जाँच के साथ।

    शनि

    सात मुखी रुद्राक्ष

    परंपरा सात मुखी रुद्राक्ष को शनि से जोड़ती है। लाल या काले धागे में गले या कलाई में पहनते हैं।

    कब: शनिवार या सोमवार

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • मुख गिनकर और 'असली कैसे जाँचें' बॉक्स देखकर ही लें

    न करें

    • बहुत सस्ते या 'चमत्कारी' बताए गए दाने से बचें

    असली कैसे पहचानें →

    यंत्र

    ताँबे या भोजपत्र पर ग्रह का अंक-यंत्र, पूजा-स्थान पर; किसी शक्ति का दावा नहीं।

    शनि

    शनि यंत्र

    ताँबे या भोजपत्र पर बना शनि यंत्र घर के पूजा-स्थान पर रखें और शनिवार को दीपक के साथ प्रणाम करें। यह ध्यान और पूजा का साधन है।

    कब: शनिवार

    परंपरा
    करें / न करें

    न करें

    • किसी यंत्र को 'शक्ति' या पक्के नतीजे के दावे के साथ न ख़रीदें

    असली कैसे पहचानें →

    शनि

    ग्रंथ में: प्रतिमा या कपड़े पर चित्र

    BPHS पूजा के लिए शनि की लोहे की प्रतिमा, या कपड़े पर ग्रह के रंग से बना चित्र, उसकी दिशा में रखने को कहता है।

    कब: पूजा के समय

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.3–5
    BPHS (Santhanam) 84.3–5

    असली कैसे पहचानें →

    संकल्प पूजा / जाप / हवन (पंडित से)

    पंडित जी से आपके नाम के संकल्प के साथ ग्रह का जाप या हवन; ख़र्च पहले से तय करें।

    शनि

    वैदिक मंत्र और जाप-संख्या: 23,000

    BPHS शनि के वैदिक मंत्र (आरंभ: शं नो देवीः…) का 23,000 बार जाप बताता है, ग्रह-पूजा के बाद। वैदिक मंत्र गुरु या पंडित से सीखकर ही जपें।

    कब: शनिवार से आरंभ

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.17–20
    BPHS (Santhanam) 84.17–20

    असली कैसे पहचानें →

    शनि

    हवन: शमी की समिधा, 108 या 28 आहुति

    BPHS शनि के हवन में शमी की समिधा (शहद, घी, दही या दूध के साथ) और 108 या 28 आहुतियाँ बताता है।

    कब: जाप के बाद

    शास्त्र · BPHS (Santhanam) 84.21–22
    BPHS (Santhanam) 84.21–22

    असली कैसे पहचानें →

    शनि

    पंडित द्वारा पूजा: क्या होता है (गाइड)

    आम तौर पर: संकल्प (आपका नाम-गोत्र), गणेश पूजन, शनि पूजन, जाप और छोटा हवन। ₹251–₹2,100 का दायरा प्रायः संकल्प पूजा या छोटे जाप का होता है; पूरी 23,000 की संख्या कई पंडित कई दिन में करते हैं और उसका ख़र्च अलग होता है। ₹0 विकल्प: आप ख़ुद रोज़ एक माला जपें।

    कब: शनिवार

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • पहले से पूछें कि कितना जाप, कौन-सा मंत्र और कितना ख़र्च

    न करें

    • डर दिखाकर महँगी पूजा बेचने वाले से दूर रहें

    असली कैसे पहचानें →

    उपरत्न / रत्न

    केवल कुंडली के शुभ स्वामी ग्रह के लिए; पहले कम-ख़र्च उपरत्न, फिर प्रमाणपत्र वाला रत्न। कोई रत्न ज़रूरी नहीं।

    हर रत्न के साथ उपरत्न पहले दिखाएँ (कम ख़र्च), फिर रत्न। कोई रत्न 'ज़रूरी' नहीं; ₹0 उपाय हमेशा ऊपर।

    बच्चों (12 वर्ष से कम) के लिए कोई रत्न नहीं। गर्भावस्था, बीमारी या दुख के समय रत्न का प्रस्ताव नहीं (W12 नियम)।

    अपनी कुंडली में जाँचें

    शनि

    उपरत्न (पहले): जामुनिया (एमेथिस्ट) या नीली (लोलिता / आयोलाइट)

    नीलम का कम-ख़र्च विकल्प। चाँदी या पंचधातु में, मध्यमा उँगली में। परंपरा में पहनने से पहले 3–7 दिन पास रखकर देखते हैं; कोई असहजता लगे तो उतार दें।

    कब: शनिवार, शुक्ल पक्ष

    परंपरा
    करें / न करें

    करें

    • केवल तब, जब यह ग्रह आपकी कुंडली के लिए शुभ स्वामी हो (gem rule)

    न करें

    • 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए नहीं; गर्भावस्था, बीमारी या दुख के समय रत्न का निर्णय न लें

    असली कैसे पहचानें →

    शनि

    रत्न: नीलम (इंद्रनील)

    प्रश्न मार्ग ग्रहों के रत्न बताते हुए शनि के लिए इंद्रनील (नीलम) बताता है (गोचर के प्रसंग में)। चाँदी या पंचधातु, मध्यमा उँगली, शनिवार: यह परंपरा है। प्रमाणपत्र (लैब रिपोर्ट) वाला ही लें।

    कब: शनिवार, शुक्ल पक्ष

    शास्त्र · Praśna Mārga XXII.29 (Raman tr.)
    Praśna Mārga XXII.29 (Raman tr.)
    करें / न करें

    करें

    • केवल तब, जब यह ग्रह आपकी कुंडली के लिए शुभ स्वामी हो (gem rule)

    न करें

    • कोई रत्न 'ज़रूरी' नहीं; ₹0 उपाय हमेशा पहले

    असली कैसे पहचानें →