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नाग पंचमी: नाग-चित्रों की पूजा, जीवों का आदर

नाग पंचमी श्रावण शुक्ल पंचमी है। धर्मसिंधु के अनुसार वह पंचमी ली जाती है जो सूर्योदय के बाद तीन मुहूर्त तक रहे और षष्ठी से जुड़ी हो। ग्रंथ दीवार आदि पर बने या मिट्टी के नागों की पूजा बताता है। असली साँपों को दूध पिलाना या पकड़ना उन्हें नुकसान पहुँचाता है; पूजा चित्र या मिट्टी की आकृति से ही करें।

दीवार पर बने या मिट्टी के नागों की पूजा: प्रकृति और जीवों के प्रति आदर का दिन।

नाग पंचमी क्या है

सावन की बारिश में खेतों और बिलों में पानी भरता है और साँप बाहर दिखने लगते हैं। इसी मौसम में श्रावण शुक्ल पंचमी को नाग पंचमी आती है: नाग देवता की पूजा और सब जीवों के प्रति आदर का दिन। किसानों के लिए साँप खेत के चूहों को कम करने वाले साथी भी हैं।

महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में यह बहुत प्रचलित है। बंगाल में इस मौसम में मनसा देवी की पूजा होती है, और दक्षिण के कुछ हिस्सों में नागुला चविति जैसे पर्व अलग तिथि पर भी मनाए जाते हैं। कुछ जगह नाग पंचमी श्रावण की कृष्ण पंचमी को भी मनाई जाती है। रीति अलग है; यह पेज श्रावण शुक्ल पंचमी की बात करता है।

दिन कैसे तय होता है

शास्त्र (धर्मसिंधु): श्रावण शुक्ल पंचमी नाग पंचमी है। यह सूर्योदय के समय तीन मुहूर्त तक रहने वाली और पर-विद्धा (अगली तिथि षष्ठी से जुड़ी) ली जाती है। एक मुहूर्त लगभग 48 मिनट का है, तो तीन मुहूर्त लगभग 2 घंटे 24 मिनट।

स्थिति दिन
दूसरे दिन सूर्योदय के बाद पंचमी तीन मुहूर्त या ज़्यादा दूसरा दिन
दूसरे दिन पंचमी तीन मुहूर्त से कम, और पहले दिन चतुर्थी का स्पर्श तीन मुहूर्त से कम पहला दिन
पहले दिन चतुर्थी का स्पर्श तीन मुहूर्त से ज़्यादा दूसरा दिन, पंचमी दो मुहूर्त भर हो तब भी

धर्मसिंधु के लेखक यह भी कहते हैं कि केवल एक मुहूर्त भर की पंचमी नहीं लेनी चाहिए। शास्त्र (निर्णयसिंधु): नाग-पूजा में षष्ठी से युक्त पंचमी का व्रत करना चाहिए।

कथा: परंपरा / पुराण कथा

नाग पंचमी से कई कथाएँ जुड़ी हैं। एक लोक कथा में एक किसान के हल से अनजाने में नाग के बच्चे मर गए; नागिन के दुख को देखकर किसान के परिवार ने क्षमा माँगी और नागों की पूजा शुरू की। इसी से कई जगह इस दिन खेत में हल न चलाने और ज़मीन न खोदने की रीति है। एक और कथा श्रीकृष्ण के कालिय नाग को यमुना से दूर भेजने की है, और महाभारत में आस्तीक मुनि द्वारा नागों की रक्षा की कथा भी इस दिन याद की जाती है।

ये कथाएँ हमारी लाइब्रेरी के ग्रंथों में नहीं मिलीं; हम इन्हें परंपरा के रूप में रखते हैं। इनका सार डर नहीं, बल्कि प्रकृति और उसके हर जीव के साथ मिलकर रहना है।

परिवार कैसे मनाते हैं

शास्त्र (धर्मसिंधु): इस दिन दीवार आदि पर बनाए गए या मिट्टी के नागों की पूजा, अपनी कुल-रीति के अनुसार।

शास्त्र (निर्णयसिंधु): घर के दरवाज़े के दोनों ओर गोबर से नाग बनाकर उनकी दही, दूर्वा, कुश, गंध और फूल से पूजा का वर्णन है।

आज भी कई घरों में दरवाज़े पर गेरू, हल्दी, कोयले या गोबर से नाग बनाए जाते हैं, या मिट्टी के नाग। महिलाएँ झूले, सावन के गीत और मेहंदी से दिन मनाती हैं। कुछ जगह इस दिन तवा या चाकू का काम नहीं होता और ठंडा या पहले से बना भोजन खाया जाता है, कुछ लोग व्रत भी रखते हैं। कर्नाटक में बाँबी (वल्मीक) की पूजा की रीति है; वहाँ भी बिल में दूध डालने के बजाय बाहर फूल और दीया रखना बेहतर है।

सरल पूजा

  1. दरवाज़े के दोनों ओर या कागज़ पर हल्दी, गेरू या रोली से नाग का चित्र बनाएँ, या मिट्टी की छोटी आकृति लें।
  2. दीया जलाकर नाग देवता और भगवान शिव का स्मरण करें।
  3. चित्र पर हल्दी-कुमकुम, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित करें।
  4. एक कटोरी में थोड़ा दूध-मिला जल चित्र के सामने रखें; बाद में उसे पौधों में डाल दें।
  5. कथा सुनें, और परिवार के साथ प्रकृति और जीवों की रक्षा का संकल्प लें।

कोई पैसे वाली पूजा ज़रूरी नहीं।

साँपों की सुरक्षा और अपनी सेहत

असली साँप को दूध नहीं: साँप दूध नहीं पीते और उसे पचा नहीं पाते। सपेरे उन्हें कई दिन भूखा-प्यासा रखकर दूध पिलाते हैं, जिससे वे बीमार होकर मर भी सकते हैं। उनके दाँत निकालना और बंद पिटारी में रखना भी उन्हें तकलीफ़ देता है। साँप पकड़ना, रखना या दिखाकर पैसे लेना वन्यजीव संरक्षण कानून के खिलाफ़ है। इसलिए पूजा केवल चित्र या मिट्टी की आकृति से करें, और साँप दिखाने वालों को पैसे न दें।

साँप दिखे तो: दूरी बनाए रखें, उसे न छेड़ें, न मारें, और स्थानीय वन विभाग या साँप बचाने वाली हेल्पलाइन को बुलाएँ। किसी को साँप काट ले तो उसे शांत रखें, अंग को हिलाएँ नहीं, और तुरंत अस्पताल ले जाएँ; काटना, चूसना, कसकर बाँधना या झाड़-फूँक इलाज की जगह नहीं ले सकते।

व्रत रखें तो: जो लोग बीमार हैं, गर्भवती हैं, जिन्हें डायबिटीज़ है या जो दवा लेते हैं, वे हल्का रूप (फल, दूध, एक समय का भोजन) लें या डॉक्टर से पूछ लें। सेहत के लिए डॉक्टर ही पहला सहारा।

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ePandit में: त्योहार का दिन हमारा कैलेंडर आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से दिखाता है। दिन एक बार उज्जैन के हिसाब से तय होता है, आपके शहर का समय अलग दिखता है। हम अभी मुहूर्त नहीं निकालते, और किसी त्योहार को किसी के लिए अच्छा या बुरा नहीं बताते।

असली साँपों को दूध पिलाना उनके लिए हानिकारक है और उन्हें पकड़ना कानूनन अपराध; पूजा चित्र या मिट्टी की आकृति से करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

धर्मसिंधु पूजा किसकी कहता है?

दीवार आदि पर बने या मिट्टी के नागों की, अपनी कुल-रीति से।

क्या असली साँप को दूध पिलाना चाहिए?

नहीं। साँप दूध नहीं पचाते और इससे वे बीमार हो सकते हैं; उन्हें पकड़कर रखना वन्यजीव कानून के खिलाफ़ है। चित्र या मिट्टी की आकृति की पूजा करें।

तारीख कैसे तय होती है?

वह श्रावण शुक्ल पंचमी जो सूर्योदय के बाद कम से कम तीन मुहूर्त रहे और षष्ठी से जुड़ी हो; कम हो तो धर्मसिंधु के उप-नियम।

बाँबी में दूध डालें?

बिल में दूध डालना जीवों के लिए ठीक नहीं। बाहर फूल, अक्षत और दीया रखकर प्रणाम करना भी पूरी पूजा है।

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आधार: धर्मसिंधु, नाग-पंचमी-व्रत, सूर्योदय पर तीन मुहूर्त, पर-विद्धा · धर्मसिंधु, नाग-पंचमी (भाषा-टीका), उदयकाल में तीन मुहूर्त-व्यापिनी · धर्मसिंधु, नाग-पंचमी (उप-नियम), दूसरे दिन कम और पहले दिन चतुर्थी का स्पर्श कम → पहला · धर्मसिंधु, नाग-पूजा, दीवार आदि पर बने या मिट्टी के नाग · निर्णयसिंधु, नाग-पंचमी, षष्ठी-युक्त पंचमी · निर्णयसिंधु, नाग-पूजा (भविष्य पुराण के वचन से), दरवाज़े के दोनों ओर गोबर से नाग · परंपरा, किसान और नागिन की लोक कथा; कालिय और आस्तीक की कथाएँ; हल न चलाना; बाँबी पूजा; झूले और सावन गीत