दिवाली: अमावस्या की रात, दीयों की कतार
दिवाली अमावस्या की रात है: अमांत पंचांग में आश्विन की आखिरी रात, पूर्णिमांत में कार्तिक की। दीये और लक्ष्मी पूजा प्रदोष में होते हैं, इसलिए तारीख इससे तय होती है कि अमावस्या किस शाम रहती है। 2026 में यह रविवार, 8 नवंबर है।
अमावस्या की रात दीयों की कतार और प्रदोष में लक्ष्मी पूजा; घर की सफ़ाई इसका सबसे पुराना हिस्सा।
आपके शहर में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त
अमावस्या 8 नवंबर सुबह 11:28 से 9 नवंबर दोपहर 12:32 तक (IST)
| शहर | दिवाली मुहूर्त | धनतेरस मुहूर्त |
|---|---|---|
| पटना | 5:29 – 7:25 PM | 5:37 – 7:33 PM |
| चंडीगढ़ | 5:53 – 7:47 PM | 6:01 – 7:55 PM |
| दिल्ली | 5:55 – 7:50 PM | 6:03 – 7:58 PM |
| अहमदाबाद | 6:23 – 8:21 PM | 6:31 – 8:29 PM |
| सूरत | 6:25 – 8:23 PM | 6:33 – 8:31 PM |
| वडोदरा | 6:22 – 8:20 PM | 6:30 – 8:28 PM |
| रांची | 5:32 – 7:29 PM | 5:40 – 7:37 PM |
| बेंगलुरु | 6:19 – 8:20 PM | 6:27 – 8:20 PM |
| कोच्चि | 6:28 – 8:27 PM | 6:36 – 8:27 PM |
| तिरुवनंतपुरम | 6:28 – 8:26 PM | 6:35 – 8:26 PM |
| भोपाल | 6:04 – 8:01 PM | 6:12 – 8:09 PM |
| इंदौर | 6:11 – 8:08 PM | 6:19 – 8:16 PM |
| उज्जैन | 6:10 – 8:07 PM | 6:18 – 8:15 PM |
| मुंबई | 6:28 – 8:27 PM | 6:36 – 8:34 PM |
| नागपुर | 6:00 – 7:58 PM | 6:08 – 8:06 PM |
| पुणे | 6:25 – 8:25 PM | 6:33 – 8:31 PM |
| भुवनेश्वर | 5:35 – 7:33 PM | 5:43 – 7:41 PM |
| अमृतसर | 5:59 – 7:52 PM | 6:07 – 8:00 PM |
| लुधियाना | 5:57 – 7:50 PM | 6:04 – 7:58 PM |
| जयपुर | 6:04 – 8:00 PM | 6:12 – 8:07 PM |
| जोधपुर | 6:16 – 8:12 PM | 6:24 – 8:20 PM |
| उदयपुर | 6:16 – 8:13 PM | 6:24 – 8:21 PM |
| चेन्नई | 6:08 – 8:09 PM | 6:16 – 8:09 PM |
| हैदराबाद | 6:09 – 8:08 PM | 6:16 – 8:13 PM |
| आगरा | 5:55 – 7:50 PM | 6:03 – 7:58 PM |
| कानपुर | 5:47 – 7:42 PM | 5:55 – 7:50 PM |
| लखनऊ | 5:44 – 7:39 PM | 5:51 – 7:47 PM |
| वाराणसी | 5:38 – 7:34 PM | 5:46 – 7:42 PM |
| देहरादून | 5:49 – 7:43 PM | 5:57 – 7:51 PM |
| कोलकाता | 5:21 – 7:19 PM | 5:29 – 7:26 PM |
समय लगभग हैं; अलग-अलग पंचांगों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
दिवाली क्या है
दिवाली, यानी दीपावली, ‘दीपों की कतार’। यह अमावस्या की रात है, जब चाँद नहीं दिखता और घर-घर दीये जलते हैं। जो पंचांग महीना पूर्णिमा पर खत्म करते हैं (ज़्यादातर उत्तर भारत), वे इसे कार्तिक की अमावस्या कहते हैं; जो महीना अमावस्या पर खत्म करते हैं (महाराष्ट्र, गुजरात, दक्षिण), वे आश्विन की आखिरी रात। नाम दो हैं, रात एक ही है।
धर्मसिंधु चतुर्दशी, अमावस्या और प्रतिपदा, इन तीन दिनों को ‘दीपावली’ कहता है। आज यह पाँच दिनों का उत्सव है: धनतेरस, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजा, गोवर्धन पूजा और भाई दूज।
तारीख कैसे तय होती है
तिथि घड़ी के हिसाब से नहीं चलती; अमावस्या एक दिन के बीच शुरू होकर अगले दिन के बीच खत्म हो सकती है। शास्त्र (धर्मसिंधु): अगर अमावस्या केवल पहले दिन प्रदोष (सूर्यास्त के बाद का पहला हिस्सा) में रहे, तो लक्ष्मी पूजा उसी दिन; अगर दोनों शाम रहे, या केवल दूसरी शाम, तो दूसरे दिन।
2026 में अमावस्या 8 नवंबर सुबह 11:28 से 9 नवंबर दोपहर 12:32 तक है, इसलिए केवल 8 तारीख की शाम में अमावस्या है।
| दिन | 2026 | कैसे तय होता है |
|---|---|---|
| धनतेरस | शुक्र 6 नवंबर | त्रयोदशी, प्रदोष में |
| नरक चतुर्दशी | रवि 8 नवंबर, भोर | भोर में चतुर्दशी |
| लक्ष्मी पूजा | रवि 8 नवंबर, शाम | अमावस्या, प्रदोष में |
| गोवर्धन पूजा | मंगल 10 नवंबर | सूर्योदय पर प्रतिपदा |
| भाई दूज | बुध 11 नवंबर | अपराह्न में द्वितीया |
उज्जैन के लिए गणना; इस साल दिन पूरे भारत में एक ही है।
कथा: परंपरा और ग्रंथ
परंपरा / पुराण कथा: उत्तर भारत में दिवाली श्रीराम के चौदह वर्ष बाद अयोध्या लौटने से जुड़ी है; लोगों ने घर-घर दीये जलाकर स्वागत किया। कई घरों में यह लक्ष्मी के स्वागत की रात है, और दक्षिण में नरकासुर पर श्रीकृष्ण की विजय से भी जोड़ी जाती है।
ग्रंथ में एक और जड़: धर्मसिंधु बताता है कि तुला के सूर्य में चतुर्दशी और अमावस्या की शाम लोग हाथ में मशाल लेकर पितरों को रास्ता दिखाएँ: “तुलासंस्थे सहस्रांशौ प्रदोषे भूतदर्शयोः। उल्काहस्ता नराः कुर्युः पितॄणां मार्गदर्शनम्॥” साथ का मंत्र कहता है: हमारे कुल के जो लोग चले गए, वे इस उज्ज्वल ज्योति से अपना मार्ग देखें। दीयों की कतार की एक जड़ यही है: रोशनी का दान।
परिवार कैसे मनाते हैं
हफ़्तों पहले से घर की सफ़ाई, रंगोली और नए कपड़े। उत्तर भारत में लक्ष्मी-गणेश की पूजा और मिठाई का आदान-प्रदान; बंगाल और ओडिशा में इसी रात काली पूजा; महाराष्ट्र में सुबह अभ्यंग स्नान और फराळ; गुजरात में अगले दिन नया साल; दक्षिण में चतुर्दशी की भोर ‘दीपावली स्नान’ मुख्य है। व्यापारी परिवार नए बही-खाते की पूजा करते हैं।
धर्मसिंधु कहता है कि आधी रात के बाद घर की स्त्रियाँ आँगन से अलक्ष्मी, यानी दरिद्रता और उपेक्षा, को बाहर करती हैं। साफ़ घर इस त्योहार का सबसे पुराना हिस्सा है।
सरल पूजा
धर्मसिंधु अमावस्या के दिन का क्रम देता है: सुबह स्नान और घर के देवताओं की पूजा, दोपहर बाद पितरों का स्मरण, और प्रदोष में दीपदान, मशाल और लक्ष्मी पूजा; भोजन उसके बाद। बच्चों और बुज़ुर्गों को रुकने की ज़रूरत नहीं।
घर पर सरल रूप:
- पूजा-स्थान साफ़ करें, एक चौकी पर लक्ष्मी और गणेश का चित्र या मूर्ति।
- दीया जलाएँ, गणेश का स्मरण करें।
- फूल, अक्षत, रोली और घर की बनी मिठाई अर्पित करें।
- लक्ष्मी का नाम लें, आरती करें।
- दरवाज़े, आँगन, खिड़कियों और तुलसी के पास दीये रखें।
कोई पैसे वाली पूजा ज़रूरी नहीं; घर में किया गया सादा स्मरण पूरा है।
सुरक्षा: दीये, पटाखे और हवा
दीयों को परदों, कपड़ों और रंगोली के सूखे रंगों से दूर रखें; पास में पानी या रेत की बाल्टी रखें। बच्चों के पास एक बड़ा व्यक्ति रहे, और ढीले, सिंथेटिक कपड़े न पहनें।
पटाखे कम, खुली जगह में और बड़ों की देखरेख में चलाएँ। दिवाली के आसपास कई शहरों की हवा पहले से भारी होती है; बुज़ुर्गों, छोटे बच्चों, दमा या सांस की तकलीफ़ वाले लोगों और पशु-पक्षियों का ध्यान रखें। स्थानीय नियम मानें। जलने पर ठंडा बहता पानी डालें और डॉक्टर को दिखाएँ। मिठाई ज़्यादा हो तो डायबिटीज़ वाले लोग अपना संतुलन रखें।
यह पन्ना क्या नहीं करता
ePandit में: त्योहार का दिन हमारा कैलेंडर आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से दिखाता है। दिन एक बार उज्जैन के हिसाब से तय होता है, आपके शहर का समय अलग दिखता है। हम अभी मुहूर्त नहीं निकालते, और किसी त्योहार को किसी के लिए अच्छा या बुरा नहीं बताते। परंपरा जिस समय का नाम लेती है (प्रदोष) वह दिया गया है, और अमावस्या के शुरू-खत्म होने का समय।
दीयों को परदों और कपड़ों से दूर रखें, बच्चों के पास बड़ा व्यक्ति रहे, और पास में पानी या रेत की बाल्टी रखें। पटाखे कम, खुली जगह में और बड़ों की देखरेख में; हवा की गुणवत्ता, बुज़ुर्गों, सांस के मरीज़ों और पशु-पक्षियों का ध्यान रखें। स्थानीय नियम मानें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अमावस्या 9 तारीख तक है, तो दिवाली 8 नवंबर को क्यों?
क्योंकि लक्ष्मी पूजा शाम की है, और केवल 8 तारीख की शाम अमावस्या है। 9 तारीख को यह दोपहर 12:32 पर, सूर्यास्त से पहले, खत्म हो जाती है।
इस साल नरक चतुर्दशी और दिवाली एक ही दिन क्यों?
इसका स्नान भोर में होता है, जब चतुर्दशी चल रही हो। 2026 में 8 तारीख की भोर में भी चतुर्दशी है, जो सुबह 11:28 पर खत्म होती है, इसलिए सुबह का स्नान और शाम की पूजा एक ही दिन पड़ते हैं।
लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त क्या है?
हम अभी मुहूर्त नहीं निकालते, इसलिए मुहूर्त नहीं देते। परंपरा का समय प्रदोष है, यानी सूर्यास्त के बाद रात का पहला हिस्सा।
देवउठनी एकादशी कब है?
स्मार्त परिवार शुक्रवार 20 नवंबर को रखते हैं, वैष्णव शनिवार 21 नवंबर को, क्योंकि एकादशी 20 तारीख को सूर्योदय के कुछ देर बाद शुरू होती है।
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