छठ पूजा: डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य

छठ कार्तिक शुक्ल षष्ठी का सूर्य और छठी मैया का व्रत है: चार दिन, नहाय-खाय से उषा-अर्घ्य तक। षष्ठी की शाम डूबते सूर्य को और सप्तमी की भोर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह नियम परंपरा का है; हमारी लाइब्रेरी के ग्रंथों में इस नाम से नहीं मिला।

बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्र का सूर्य और छठी मैया का व्रत; नदी या तालाब के घाट पर अर्घ्य।

छठ क्या है

छठ बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्र का सबसे बड़ा लोक-पर्व है, और आज देश-विदेश में जहाँ भी ये परिवार रहते हैं, वहाँ मनाया जाता है। ‘छठ’ षष्ठी का बोलचाल का रूप है। इसमें सूर्य देव और छठी मैया की पूजा होती है, नदी या तालाब के घाट पर, पानी में खड़े होकर।

यह दिवाली के छह दिन बाद आता है और चार दिन चलता है। इसकी खासियत है सादगी और शुद्धता: मिट्टी के चूल्हे, बाँस के सूप, घर का बना ठेकुआ, और कोई पुरोहित ज़रूरी नहीं।

तारीख कैसे तय होती है

परंपरा: हमारी लाइब्रेरी (धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु, मुहूर्त चिंतामणि) में ‘छठ’ नाम का व्रत नहीं मिला, इसलिए नियम परंपरा के रूप में दिया जा रहा है। प्रचलित पंचांग इस तरह गिनते हैं:

दिन तिथि क्या होता है
पहला कार्तिक शुक्ल चतुर्थी नहाय-खाय: स्नान, फिर कद्दू-भात-चने की दाल
दूसरा पंचमी खरना: दिन भर व्रत, शाम को गुड़ की खीर और रोटी
तीसरा षष्ठी संध्या-अर्घ्य: डूबते सूर्य को
चौथा सप्तमी उषा-अर्घ्य: उगते सूर्य को, फिर पारण

मुख्य दिन वह है जिसकी शाम (सूर्यास्त) पर षष्ठी हो। तुलना के लिए, धर्मसिंधु भाद्रपद शुक्ल षष्ठी पर स्नान और सूर्य-पूजा की बात करता है; षष्ठी पर सूर्य-पूजा की यह पुरानी रीति है, पर वह छठ नहीं है। यह नियम वैदिक टीम की जाँच के लिए चिह्नित है।

कथा: परंपरा / लोक कथा

छठ की कथाएँ लोक-परंपरा में कई हैं। एक मान्यता है कि छठी मैया सूर्य की बहन हैं और बच्चों की रक्षा करने वाली षष्ठी देवी हैं। एक कथा माता सीता से जुड़ी है: अयोध्या लौटने के बाद उन्होंने मुंगेर में गंगा किनारे सूर्य की उपासना की। दूसरी कथा कर्ण से जुड़ी है, जो सूर्य के पुत्र थे और रोज़ पानी में खड़े होकर अर्घ्य देते थे। एक और कथा द्रौपदी के इस व्रत की है।

ये कथाएँ लोक-परंपरा की हैं; हम किसी पुराण के अध्याय का दावा नहीं करते। सबमें एक बात साझा है: सूर्य के प्रति आभार, जो हर दिन रोशनी और अन्न देता है।

परिवार कैसे मनाते हैं

घर की सफ़ाई, व्रती (व्रत रखने वाले, ज़्यादातर माताएँ, पर पुरुष भी) के लिए अलग शुद्ध रसोई। बाँस के सूप और दउरा में ठेकुआ, केला, नारियल, गन्ना, नींबू, सिंघाड़ा। शाम को पूरा परिवार घाट जाता है, व्रती कमर तक पानी में खड़े होकर सूप उठाते हैं और बाकी लोग दूध या जल से अर्घ्य देते हैं। रात में कोसी भरी जाती है, गीत गाए जाते हैं। भोर में फिर घाट, उगते सूर्य को अर्घ्य, और प्रसाद बाँटकर व्रत खुलता है।

शहरों में कई परिवार छत पर पानी का छोटा कुंड बनाकर अर्घ्य देते हैं; यह भी उतना ही पूरा माना जाता है।

सरल पूजा

  1. चतुर्थी को स्नान और सादा सात्विक भोजन (लौकी/कद्दू, चने की दाल, चावल)।
  2. पंचमी को दिन भर व्रत, शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद (खरना)।
  3. षष्ठी की शाम सूप में फल-ठेकुआ रखकर डूबते सूर्य को जल या दूध का अर्घ्य।
  4. सप्तमी की भोर उगते सूर्य को अर्घ्य, फिर अदरक-गुड़ या प्रसाद से पारण।

कोई पैसे वाली पूजा ज़रूरी नहीं; छठ अपने हाथ से की जाने वाली पूजा है।

सुरक्षा: व्रत, ठंड और पानी

छठ का व्रत लंबा होता है: खरना के बाद से उषा-अर्घ्य तक लगभग 36 घंटे बिना पानी के। यह शरीर पर भारी पड़ सकता है। उपवास और सेहत: उपवास अपनी सेहत के हिसाब से रखें। डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर, गर्भावस्था, स्तनपान, बुज़ुर्ग उम्र या नियमित दवा हो तो फल, दूध या एक समय के सादे भोजन वाला हल्का रूप भी परंपरा में है। दवा का समय न बदलें। सेहत के लिए डॉक्टर ही पहला सहारा है; कोई व्रत इसकी जगह नहीं लेता। बहुत से परिवारों में घर का एक ही सदस्य व्रत रखता है और बाकी सहयोग करते हैं; यह भी पूरी परंपरा है।

घाट पर: गहरे पानी और तेज़ बहाव से दूर रहें, बच्चों का हाथ थामें, फिसलन वाली सीढ़ियों पर सावधान रहें। कार्तिक की भोर ठंडी होती है: ठंडे पानी में ज़्यादा देर न खड़े हों, सूखे कपड़े साथ रखें। भीड़ में प्रशासन के निर्देश मानें, और नदी में प्लास्टिक या पूजा-सामग्री न डालें।

ePandit में

ePandit में: त्योहार का दिन हमारा कैलेंडर आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से दिखाता है। दिन एक बार उज्जैन के हिसाब से तय होता है, आपके शहर का समय अलग दिखता है। हम अभी मुहूर्त नहीं निकालते, और किसी त्योहार को किसी के लिए अच्छा या बुरा नहीं बताते।

लंबा निर्जला व्रत शरीर पर भारी हो सकता है; उपवास अपनी सेहत के हिसाब से रखें। डायबिटीज़, गर्भावस्था, बुज़ुर्ग या नियमित दवा लेने वाले लोग फल, दूध या एक समय के भोजन वाला हल्का रूप चुन सकते हैं; सेहत के लिए डॉक्टर ही पहला सहारा। घाट पर गहरे पानी और तेज़ बहाव से बचें, बच्चों का हाथ थामें, ठंडे पानी में ज़्यादा देर न रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या धर्मशास्त्र के ग्रंथ छठ की तिथि देते हैं?

हमारी लाइब्रेरी (धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु, मुहूर्त चिंतामणि) में छठ नाम का व्रत नहीं मिला। तिथि और विधि यहाँ परंपरा के रूप में दी गई है।

घर पर अर्घ्य दे सकते हैं?

हाँ, कई परिवार छत पर या आँगन में पानी का छोटा कुंड बनाकर अर्घ्य देते हैं।

क्या हर कोई निर्जला व्रत रखे?

नहीं। आमतौर पर परिवार में एक या दो लोग व्रत रखते हैं, बाकी सहयोग करते हैं। सेहत के हिसाब से फल-पानी वाला हल्का रूप भी चुना जाता है।

छठी मैया कौन हैं?

लोक-परंपरा में वे षष्ठी देवी हैं, बच्चों की रक्षा करने वाली, और सूर्य की बहन मानी जाती हैं।

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