चैत्र नवरात्रि: वसंत में देवी की नौ रातें
चैत्र नवरात्रि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक देवी की नौ रातें हैं, और नवमी राम नवमी है। धर्मसिंधु कहता है कि इसी प्रतिपदा से देवी-नवरात्र का आरंभ होता है और बाकी निर्णय शारदीय नवरात्रि की तरह जानने चाहिए। यही प्रतिपदा हिंदू नववर्ष (नव संवत्सर) का पहला दिन भी है।
हिंदू नववर्ष के साथ आने वाली देवी की नौ रातें, जो राम नवमी पर पूरी होती हैं।
चैत्र नवरात्रि क्या है
साल में दो बड़ी नवरात्रि होती हैं: शरद में शारदीय नवरात्रि (आश्विन) और वसंत में चैत्र नवरात्रि। चैत्र नवरात्रि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी को पूरी होती है, और यही नवमी राम नवमी है। इसलिए इन नौ दिनों में देवी की उपासना के साथ श्रीराम का स्मरण भी जुड़ जाता है; कई घरों में रामचरितमानस या रामायण का नवाह पाठ होता है।
विधि लगभग वही है जो शारदीय नवरात्रि की: घटस्थापना, जौ बोना, दीया, देवी का पाठ और कन्या पूजन। विस्तार के लिए हमारा नवरात्रि पेज देखें; यह पेज उसी की बात आगे बढ़ाता है, उससे अलग कोई नियम नहीं देता।
तारीख कैसे तय होती है
शास्त्र (धर्मसिंधु): चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही देवी-नवरात्र का आरंभ होता है, और पारणा आदि का विशेष निर्णय आश्विन के नवरात्रों के समान जानना चाहिए। इसलिए आरंभ का नियम वही है जो शारदीय नवरात्रि का: वह प्रतिपदा जो सूर्योदय के बाद तीन मुहूर्त (लगभग 2 घंटे 24 मिनट) रहे, न मिले तो दो मुहूर्त वाली; और अमावस्या से जुड़ी प्रतिपदा में आरंभ नहीं।
चैत्र के प्रसंग में धर्मसिंधु यह भी कहता है कि यहाँ आगे की तिथि (द्वितीया) से जुड़ी प्रतिपदा ली जाए, भले वह थोड़ी ही देर हो। ज़्यादातर सालों में दोनों बातें एक ही दिन देती हैं; हमारा कैलेंडर शारदीय नवरात्रि वाला नियम लगाता है।
नवरात्रि तिथियों से गिनी जाती है, तारीखों से नहीं, इसलिए किसी तिथि के घटने-बढ़ने से कभी आठ या दस दिन हो सकते हैं। नवमी (राम नवमी) का दिन अपने नियम से तय होता है, जो हमारे राम नवमी पेज पर है।
नववर्ष के साथ
शास्त्र (धर्मसिंधु): चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को वर्ष का प्रारंभ होता है। उसी दिन के लिए ग्रंथ घर-घर ध्वजा बाँधने, नीम के पत्ते खाने, नए वर्ष का फल सुनने और नवरात्र के आरंभ की बात करता है।
यही आज अलग-अलग नामों से मनता है (परंपरा): महाराष्ट्र और गोवा में गुड़ी पड़वा (घर के बाहर गुड़ी खड़ी की जाती है), कर्नाटक, आंध्र और तेलंगाना में उगादि (नीम-गुड़ वाली ‘पच्चड़ि’), सिंधी समाज में चेटी चंड, कश्मीरी पंडितों में नवरेह, और उत्तर भारत में नव संवत्सर। नीम और गुड़ साथ खाने को परंपरा जीवन के कड़वे-मीठे दोनों अनुभवों को स्वीकार करने का भाव मानती है।
कथा: परंपरा / पुराण कथा
देवी की कथाएँ वही हैं जो शारदीय नवरात्रि की: देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) में देवी दुर्गा का महिषासुर आदि असुरों को हराना, जिसका पाठ इन दिनों बहुत होता है। नौ दिनों में देवी के नौ रूप (शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक) पूजने की रीति भी परंपरा की है।
चैत्र नवरात्रि की अपनी विशेष कथा श्रीराम के जन्म की है: परंपरा के अनुसार चैत्र शुक्ल नवमी को अयोध्या में राम का जन्म हुआ। इसलिए कई परिवार नवरात्रि को रामनवमी तक की तैयारी की तरह देखते हैं। जम्मू, हिमाचल और उत्तराखंड के देवी-मंदिरों में इन दिनों बड़े मेले लगते हैं।
परिवार कैसे मनाते हैं
उत्तर भारत: घटस्थापना, जौ के ज्वारे, दुर्गा सप्तशती या रामायण का पाठ, अष्टमी-नवमी को कन्या पूजन और रामनवमी पर राम जन्मोत्सव। महाराष्ट्र: गुड़ी पड़वा से नए साल का स्वागत। दक्षिण भारत: उगादि और श्रीराम नवमी के उत्सव, कई जगह ‘वसंत नवरात्रि’ के नाम से। बंगाल: कई घरों में बासंती पूजा। राजस्थान: गणगौर का उत्सव भी इसी समय के आस-पास।
हर क्षेत्र की रीति अलग है; कोई एक तरीका सबके लिए ज़रूरी नहीं।
सरल पूजा
- घटस्थापना: प्रतिपदा की सुबह मिट्टी के पात्र में जौ बोएँ, उस पर जल से भरा कलश, आम के पत्ते और नारियल।
- देवी का चित्र या मूर्ति, दीया (रोज़ या अखंड, अपनी सुविधा से)।
- रोज़ फूल, रोली, अक्षत, और देवी के नाम का जप या कोई स्तुति; चाहें तो रामायण का थोड़ा पाठ।
- नववर्ष के दिन नीम के कुछ कोमल पत्ते और गुड़।
- अष्टमी या नवमी को छोटी बच्चियों को आदर से भोजन (कन्या पूजन), जो कुल-रीति हो।
- नवमी को राम जन्मोत्सव; ज्वारे बहते पानी में नहीं, पौधों की मिट्टी में।
कोई पैसे वाली पूजा ज़रूरी नहीं।
सेहत और सुरक्षा
उपवास और सेहत: उपवास अपनी सेहत के हिसाब से रखें। डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर, गर्भावस्था, स्तनपान, बुज़ुर्ग उम्र, तबीयत ठीक न हो या नियमित दवा चलती हो, तो फल, दूध या एक समय के सादे भोजन वाला हल्का रूप चुनें, या पहले डॉक्टर से पूछ लें। दवा का समय न बदलें। सेहत के लिए डॉक्टर ही पहला सहारा है; कोई व्रत इसकी जगह नहीं लेता। पूरे नौ दिन व्रत ज़रूरी नहीं; कम दिनों के विकल्प भी परंपरा में हैं (हमारा नवरात्रि पेज देखें)।
चैत्र में गर्मी शुरू हो जाती है: व्रत में भी पानी, नींबू-पानी, छाछ या नारियल पानी लेते रहें, धूप में लंबी कतारों से बचें, और चक्कर लगे तो व्रत खोल दें। धर्मसिंधु इसी प्रतिपदा पर प्याऊ (प्रपा) के दान की बात करता है: गर्मी में राहगीरों और पशु-पक्षियों के लिए पानी रखना इस समय की सुंदर परंपरा है। अखंड दीये को अकेला न छोड़ें।
ePandit में
ePandit में: त्योहार का दिन हमारा कैलेंडर आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से दिखाता है। दिन एक बार उज्जैन के हिसाब से तय होता है, आपके शहर का समय अलग दिखता है। हम अभी मुहूर्त नहीं निकालते, और किसी त्योहार को किसी के लिए अच्छा या बुरा नहीं बताते।
उपवास अपनी सेहत के हिसाब से रखें। डायबिटीज़, गर्भावस्था, बुज़ुर्ग या नियमित दवा लेने वाले लोग फल, दूध या एक समय के भोजन वाला हल्का रूप चुन सकते हैं; सेहत के लिए डॉक्टर ही पहला सहारा। गर्मी शुरू हो रही होती है; पानी और नमक-चीनी का ध्यान रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शारदीय नवरात्रि से क्या अंतर है?
विधि लगभग वही है। चैत्र नवरात्रि वसंत में नववर्ष के साथ आती है और राम नवमी पर पूरी होती है। धर्मसिंधु इसके निर्णय शारदीय नवरात्रि की तरह जानने को कहता है।
घटस्थापना किस दिन होती है?
उस चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर जो सूर्योदय के बाद तीन मुहूर्त रहे (न मिले तो दो), अमावस्या से जुड़ी प्रतिपदा में नहीं। मुहूर्त हम नहीं निकालते।
नववर्ष कब शुरू होता है?
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को: गुड़ी पड़वा, उगादि, चेटी चंड, नवरेह, नव संवत्सर।
गर्मी में नौ दिन व्रत कैसे रखें?
अपनी सेहत के हिसाब से: पानी और तरल लेते रहें, फल या एक समय का भोजन भी परंपरा में है। तबीयत ठीक न हो, गर्भावस्था, डायबिटीज़ या दवा हो तो हल्का रूप चुनें या डॉक्टर से पूछें।
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