अक्षय तृतीया: दान और नई शुरुआत का दिन
अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल तृतीया है। निर्णय सिंधु के अनुसार वह तृतीया ली जाती है जो पूर्वाह्न में हो, और दोनों दिन हो तो दूसरा दिन; यह युगादि तिथियों में भी गिनी जाती है। ग्रंथ इस दिन स्नान, जौ का होम और दान की बात करते हैं; सोना खरीदना आधुनिक चलन है, ज़रूरी नहीं।
वैशाख शुक्ल तृतीया: युगादि तिथि, दान, स्नान और नई शुरुआत का दिन।
अक्षय तृतीया क्या है
‘अक्षय’ का अर्थ है जो कभी कम न हो। वैशाख शुक्ल तृतीया को परंपरा ऐसा दिन मानती है जिसमें किया गया दान, जप और अच्छा काम ‘अक्षय’ रहता है। इसे ‘आखा तीज’ भी कहते हैं। यह अप्रैल-मई में, भरी गर्मी की शुरुआत में आती है।
निर्णय सिंधु इसे युगादि तिथियों में गिनता है: उन चार तिथियों में जिन पर परंपरा युगों का आरंभ मानती है।
तारीख कैसे तय होती है
शास्त्र (निर्णय सिंधु): वैशाख शुक्ल तृतीया अक्षय तृतीया है, और वह पूर्वाह्न-व्यापिनी ली जाती है (दिन का पहला हिस्सा)। अगर दोनों दिन पूर्वाह्न में हो, तो दूसरा दिन।
निर्णय सिंधु नारद पुराण के वचन से यह भी कहता है कि रोहिणी नक्षत्र या बुधवार-सोमवार के साथ यह तृतीया और विशेष है, और चतुर्थी-युक्त तृतीया अच्छी मानी गई है। हमारा कैलेंडर पूर्वाह्न-नियम से दिन दिखाता है। हम इस दिन का कोई ‘खरीदारी मुहूर्त’ नहीं देते।
कथा: परंपरा / पुराण कथा
परंपरा इस दिन से कई कथाएँ जोड़ती है: भगवान परशुराम का जन्म (इसीलिए परशुराम जयंती इसी के आसपास); त्रेता युग का आरंभ; गंगा का धरती पर अवतरण (कुछ परंपराओं में); और महाभारत की परंपरा में पांडवों को अक्षय पात्र मिलना, जिससे वनवास में भोजन कभी कम नहीं हुआ। एक कथा सुदामा की है, जो इसी दिन मुट्ठी भर चावल लेकर मित्र कृष्ण से मिलने गए।
इन कथाओं को हम परंपरा के रूप में रखते हैं। ग्रंथ में जो हमें मिला, वह है युगादि और दान-स्नान के कृत्य।
परिवार कैसे मनाते हैं
उत्तर भारत: गंगा-स्नान, जल से भरे घड़े, पंखे, सत्तू और खरबूज़े का दान। राजस्थान, मध्य प्रदेश: ‘आखा तीज’, कई समुदायों में सामूहिक विवाह। ओडिशा: पुरी की रथयात्रा के रथों का निर्माण इसी दिन शुरू होता है, और किसान बीज बोने की शुरुआत करते हैं। जैन परंपरा: भगवान ऋषभदेव के वर्षीतप के पारण (गन्ने के रस से) का दिन। उत्तराखंड: गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट परंपरा से इसी दिन खुलते हैं।
पिछले कुछ दशकों में सोना-चाँदी खरीदने का चलन बहुत बढ़ा है। यह ग्रंथ में नहीं है; बिना कुछ खरीदे भी यह दिन पूरा है।
सरल पूजा
धर्मसिंधु इस दिन गंगा-स्नान, जौ का होम, जौ का दान और जौ खाने की बात करता है, और श्रीकृष्ण को चंदन लगाने की भी। घर पर सरल रूप:
- सुबह स्नान (पानी में थोड़ा गंगाजल हो तो)।
- विष्णु या लक्ष्मी-नारायण का स्मरण, चंदन, तुलसी, फूल।
- जौ या सत्तू का भोग।
- दान: पानी से भरा मिट्टी का घड़ा, पंखा, छाता, सत्तू, फल, या किसी ज़रूरतमंद की मदद।
- कोई अच्छी आदत या नया काम शुरू करना, जो आप सच में चलाना चाहें।
सुरक्षा: गर्मी
वैशाख में लू का समय होता है। दोपहर की धूप से बचें, पानी, नींबू-पानी या छाछ पीते रहें; बुज़ुर्गों और बच्चों का खास ध्यान रखें। घर के बाहर राहगीरों और पशु-पक्षियों के लिए पानी रखें; यह इस दिन का सबसे सुंदर दान है। सामूहिक विवाह या मेलों में भीड़ और गर्मी दोनों से सावधानी। व्रत रखें तो अपनी सेहत के हिसाब से; सेहत के लिए डॉक्टर ही पहला सहारा।
ePandit में
ePandit में: त्योहार का दिन हमारा कैलेंडर आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से दिखाता है। दिन एक बार उज्जैन के हिसाब से तय होता है, आपके शहर का समय अलग दिखता है। हम अभी मुहूर्त नहीं निकालते, और किसी त्योहार को किसी के लिए अच्छा या बुरा नहीं बताते।
भरी गर्मी का समय: राहगीरों के लिए पानी रखें; दोपहर की धूप से बचें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना ज़रूरी है?
नहीं। ग्रंथ इस दिन स्नान, जौ का होम और दान की बात करते हैं; सोना खरीदना आधुनिक चलन है। बिना खरीदे भी दिन पूरा है।
युगादि का क्या अर्थ है?
निर्णय सिंधु इसे उन चार तिथियों में गिनता है जिन पर परंपरा युगों का आरंभ मानती है।
तारीख कैसे तय होती है?
वैशाख शुक्ल तृतीया जो पूर्वाह्न में हो; दोनों दिन हो तो दूसरा दिन (निर्णय सिंधु)।
क्या इस दिन बिना मुहूर्त देखे शादी हो सकती है?
परंपरा में कई समुदाय इसे ‘अबूझ’ दिन मानते हैं। हम किसी काम का मुहूर्त नहीं निकालते; विवाह के लिए अपने परिवार के पंडित जी से बात करें।
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