ePanditवैदिक ज्योतिष, प्रमाण के साथ

आज का पंचांग: दिल्ली

पंचांग के पाँच अंग हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। यहाँ आपके शहर का आज का पंचांग है, हर अंग के समाप्ति समय के साथ, और सूर्योदय, चंद्रोदय, राहु काल, गुलिक, यमगंड, अभिजित, चौघड़िया और होरा। कुंडली सहेजी हो तो आपका आज का तारा बल और चंद्र बल भी।

स्रोत: धर्मसिंधु · उज्जैन के सूर्योदय से तिथि-निर्णय

4 मई 2028 · विक्रम संवत 2085 · वैशाख मास

‹ पिछला दिन आज अगला दिन ›

पंचांग के पाँच अंग

तिथिदशमी (शुक्ल)14:13 तक
नक्षत्रपूर्वा फाल्गुनी01:02 तक
योगध्रुव13:43 तक
करणगर14:13 तक
वारगुरुवार
सूर्योदय05:37
सूर्यास्त18:58
चंद्रोदय14:21
चंद्रास्त02:15

दिन के काल

राहु काल
13:58–15:38
गुलिक काल
08:58–10:38
यमगंड
05:37–07:17
अभिजित मुहूर्त
11:51–12:44

राहु काल दिन का लगभग डेढ़ घंटे का एक हिस्सा है जो हर वार के लिए तय क्रम से आता है। परंपरा, खासकर दक्षिण भारत में, इस समय नया काम शुरू करना टालती है। हम यह समय बताते हैं; मानना या न मानना आपका और आपके परिवार का निर्णय है।

चौघड़िया · दिन

शुभ ★05:37–07:17
रोग07:17–08:58
उद्वेग08:58–10:38
चर10:38–12:18
लाभ ★12:18–13:58
अमृत ★13:58–15:38
काल15:38–17:18
शुभ ★17:18–18:58

चौघड़िया · रात

अमृत ★18:58–20:18
चर20:18–21:38
रोग21:38–22:57
काल22:57–00:17
लाभ ★00:17–01:37
उद्वेग01:37–02:57
शुभ ★02:57–04:17
अमृत ★04:17–05:37

★ अमृत, शुभ, लाभ · ये नाम परंपरा के हैं। उद्वेग, काल और रोग में परंपरा बस नया काम शुरू करना टालती है; बाकी सब काम सामान्य चलते हैं।

होरा
गुरु (बृहस्पति)05:37–06:44
मंगल06:44–07:51
सूर्य07:51–08:58
शुक्र08:58–10:04
बुध10:04–11:11
चंद्र11:11–12:18
शनि12:18–13:24
गुरु13:24–14:31
मंगल14:31–15:38
सूर्य15:38–16:44
शुक्र16:44–17:51
बुध17:51–18:58
चंद्र18:58–19:51
शनि19:51–20:44
गुरु20:44–21:38
मंगल21:38–22:31
सूर्य22:31–23:24
शुक्र23:24–00:17
बुध00:17–01:10
चंद्र01:10–02:04
शनि02:04–02:57
गुरु02:57–03:50
मंगल03:50–04:43
सूर्य04:43–05:37

होरा दिन का एक 'घंटा' है: एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समय का 24वाँ हिस्सा, और हर होरा का एक स्वामी ग्रह होता है।

समय लगभग हैं; अलग-अलग पंचांगों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

आपके लिए आज

अपनी कुंडली जोड़िए, आज का तारा बल और चंद्र बल यहाँ दिखेगा। जोड़ें

व्रत और त्योहार → · पंचांग के अंग समझें →