ePanditवैदिक ज्योतिष, प्रमाण के साथ

आज का पंचांग: दिल्ली

पंचांग के पाँच अंग हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। यहाँ आपके शहर का आज का पंचांग है, हर अंग के समाप्ति समय के साथ, और सूर्योदय, चंद्रोदय, राहु काल, गुलिक, यमगंड, अभिजित, चौघड़िया और होरा। कुंडली सहेजी हो तो आपका आज का तारा बल और चंद्र बल भी।

स्रोत: धर्मसिंधु · उज्जैन के सूर्योदय से तिथि-निर्णय

15 मई 2027 · विक्रम संवत 2084 · वैशाख मास

‹ पिछला दिन आज अगला दिन ›

पंचांग के पाँच अंग

तिथिदशमी (शुक्ल)18:18 तक
नक्षत्रपूर्वा फाल्गुनी12:00 तक
योगव्याघात06:33 तक
करणतैतिल06:56 तक
वारशनिवार
सूर्योदय05:30
सूर्यास्त19:04
चंद्रोदय14:16
चंद्रास्त02:00

दिन के काल

राहु काल
08:54–10:35
गुलिक काल
05:30–07:12
यमगंड
13:59–15:41
अभिजित मुहूर्त
11:50–12:44

राहु काल दिन का लगभग डेढ़ घंटे का एक हिस्सा है जो हर वार के लिए तय क्रम से आता है। परंपरा, खासकर दक्षिण भारत में, इस समय नया काम शुरू करना टालती है। हम यह समय बताते हैं; मानना या न मानना आपका और आपके परिवार का निर्णय है।

चौघड़िया · दिन

काल05:30–07:12
शुभ ★07:12–08:54
रोग08:54–10:35
उद्वेग10:35–12:17
चर12:17–13:59
लाभ ★13:59–15:41
अमृत ★15:41–17:22
काल17:22–19:04

चौघड़िया · रात

लाभ ★19:04–20:22
उद्वेग20:22–21:40
शुभ ★21:40–22:59
अमृत ★22:59–00:17
चर00:17–01:35
रोग01:35–02:53
काल02:53–04:12
लाभ ★04:12–05:30

★ अमृत, शुभ, लाभ · ये नाम परंपरा के हैं। उद्वेग, काल और रोग में परंपरा बस नया काम शुरू करना टालती है; बाकी सब काम सामान्य चलते हैं।

होरा
शनि05:30–06:38
गुरु (बृहस्पति)06:38–07:46
मंगल07:46–08:54
सूर्य08:54–10:02
शुक्र10:02–11:09
बुध11:09–12:17
चंद्र12:17–13:25
शनि13:25–14:33
गुरु14:33–15:41
मंगल15:41–16:48
सूर्य16:48–17:56
शुक्र17:56–19:04
बुध19:04–19:56
चंद्र19:56–20:48
शनि20:48–21:40
गुरु21:40–22:33
मंगल22:33–23:25
सूर्य23:25–00:17
शुक्र00:17–01:09
बुध01:09–02:01
चंद्र02:01–02:53
शनि02:53–03:45
गुरु03:45–04:38
मंगल04:38–05:30

होरा दिन का एक 'घंटा' है: एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समय का 24वाँ हिस्सा, और हर होरा का एक स्वामी ग्रह होता है।

समय लगभग हैं; अलग-अलग पंचांगों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

आपके लिए आज

अपनी कुंडली जोड़िए, आज का तारा बल और चंद्र बल यहाँ दिखेगा। जोड़ें

व्रत और त्योहार → · पंचांग के अंग समझें →