ePanditवैदिक ज्योतिष, प्रमाण के साथ

आज का पंचांग: दिल्ली

पंचांग के पाँच अंग हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। यहाँ आपके शहर का आज का पंचांग है, हर अंग के समाप्ति समय के साथ, और सूर्योदय, चंद्रोदय, राहु काल, गुलिक, यमगंड, अभिजित, चौघड़िया और होरा। कुंडली सहेजी हो तो आपका आज का तारा बल और चंद्र बल भी।

स्रोत: धर्मसिंधु · उज्जैन के सूर्योदय से तिथि-निर्णय

22 दिसंबर 2025 · विक्रम संवत 2082 · पौष मास

‹ पिछला दिन आज अगला दिन ›

पंचांग के पाँच अंग

तिथिद्वितीया (शुक्ल)10:52 तक
नक्षत्रउत्तराषाढ़ा05:32 तक
योगध्रुव16:40 तक
करणकौलव10:52 तक
वारसोमवार
सूर्योदय07:10
सूर्यास्त17:29
चंद्रोदय09:01
चंद्रास्त19:27

दिन के काल

राहु काल
08:27–09:44
गुलिक काल
13:37–14:54
यमगंड
11:02–12:19
अभिजित मुहूर्त
11:59–12:40

राहु काल दिन का लगभग डेढ़ घंटे का एक हिस्सा है जो हर वार के लिए तय क्रम से आता है। परंपरा, खासकर दक्षिण भारत में, इस समय नया काम शुरू करना टालती है। हम यह समय बताते हैं; मानना या न मानना आपका और आपके परिवार का निर्णय है।

चौघड़िया · दिन

अमृत ★07:10–08:27
काल08:27–09:44
शुभ ★09:44–11:02
रोग11:02–12:19
उद्वेग12:19–13:37
चर13:37–14:54
लाभ ★14:54–16:11
अमृत ★16:11–17:29

चौघड़िया · रात

चर17:29–19:11
रोग19:11–20:54
काल20:54–22:37
लाभ ★22:37–00:19
उद्वेग00:19–02:02
शुभ ★02:02–03:45
अमृत ★03:45–05:28
चर05:28–07:10

★ अमृत, शुभ, लाभ · ये नाम परंपरा के हैं। उद्वेग, काल और रोग में परंपरा बस नया काम शुरू करना टालती है; बाकी सब काम सामान्य चलते हैं।

होरा
चंद्र07:10–08:01
शनि08:01–08:53
गुरु (बृहस्पति)08:53–09:44
मंगल09:44–10:36
सूर्य10:36–11:28
शुक्र11:28–12:19
बुध12:19–13:11
चंद्र13:11–14:02
शनि14:02–14:54
गुरु14:54–15:46
मंगल15:46–16:37
सूर्य16:37–17:29
शुक्र17:29–18:37
बुध18:37–19:46
चंद्र19:46–20:54
शनि20:54–22:03
गुरु22:03–23:11
मंगल23:11–00:19
सूर्य00:19–01:28
शुक्र01:28–02:36
बुध02:36–03:45
चंद्र03:45–04:53
शनि04:53–06:02
गुरु06:02–07:10

होरा दिन का एक 'घंटा' है: एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समय का 24वाँ हिस्सा, और हर होरा का एक स्वामी ग्रह होता है।

समय लगभग हैं; अलग-अलग पंचांगों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

आपके लिए आज

अपनी कुंडली जोड़िए, आज का तारा बल और चंद्र बल यहाँ दिखेगा। जोड़ें

व्रत और त्योहार → · पंचांग के अंग समझें →