कालसर्प दोष क्या है?
व्याख्या · समीक्षा अगस्त २०२६
कालसर्प वह कुंडली स्थिति है जब सातों मुख्य ग्रह राहु और केतु की धुरी के एक तरफ स्थित होते हैं। आधुनिक चर्चाओं में इसे चाहे जो कहा जाए, शास्त्रीय दृष्टिकोण दशा स्वामियों और शुभ ग्रहों के संतुलन पर बल देता है।
यह स्थिति कैसे बनती है?
जब सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि सभी राहु-केतु के मध्य आ जाते हैं, तब यह योग माना जाता है। यदि एक भी ग्रह इस परिधि से बाहर हो तो योग भंग हो जाता है।
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सामान्य प्रश्न
क्या कालसर्प कोई स्थायी दोष है?
नहीं। वैदिक ज्योतिष समय-आधारित दशाओं पर चलता है; कोई भी ग्रह स्थिति स्थायी रुकावट नहीं होती।
यदि एक ग्रह बाहर हो तो क्या होता है?
यदि एक भी ग्रह बाहर हो तो यह योग पूर्ण नहीं माना जाता।