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अष्टकवर्ग क्या है?

व्याख्या · सितंबर २०२६ में समीक्षित

अष्टकवर्ग एक गणना पद्धति है। सात ग्रहों में से प्रत्येक के लिए यह राशि-दर-राशि पूछता है कि वह राशि नियमों की एक निश्चित सूची में से कितने पूरे करती है — इससे उसे ० से ८ तक अंक मिलते हैं, जिन्हें बिंदु कहते हैं। ऐसी सात तालिकाएँ जोड़कर सर्वाष्टकवर्ग बनता है, जिसका योग हर कुंडली में सदैव ठीक ३३७ होता है। यही निश्चित योग पूरी पद्धति को जाँचने योग्य बनाता है: यदि आपकी गणना ३३७ पर नहीं आती, तो वह ग़लत है।

इस पृष्ठ पर
  1. बिंदु वास्तव में क्या गिनता है
  2. योग सदैव ३३७ क्यों होता है
  3. एक उदाहरण जिसे आप जाँच सकते हैं
  4. इन अंकों का उपयोग क्या है, और क्या नहीं
  5. हम क्या गणना करते हैं और क्या नहीं

बिंदु वास्तव में क्या गिनता है

प्रत्येक ग्रह की अपनी आठ योगदाताओं की तालिका होती है — सात ग्रह और लग्न। हर योगदाता उन स्थानों की सूची देता है, जो उसकी अपनी स्थिति से गिने जाते हैं, जहाँ वह एक अंक देता है।

अतः बिंदु केवल पूरे हुए नियमों की गिनती है। यह ग्रह-स्थितियों पर की गई गणित है — न कोई श्रेणी, न संभावना, और न व्यक्ति का अंक।

योग सदैव ३३७ क्यों होता है

हर ग्रह की तालिका कितने अंक दे सकती है यह तालिका से तय है, कुंडली से नहीं: सूर्य ४८, चंद्र ४९, मंगल ३९, बुध ५४, गुरु ५६, शुक्र ५२ और शनि ३९। इनका योग ३३७ है। ग्रहों के स्थान बदलने से अंक राशियों के बीच घूमते हैं; बनते या मिटते नहीं।

यह गुण इस विद्या में असामान्य है और यही इस पृष्ठ का कारण है। इसे पाठक किसी भी स्वतंत्र सॉफ़्टवेयर से जाँच सकता है।

एक उदाहरण जिसे आप जाँच सकते हैं

नीचे दी गई कुंडली एक निश्चित उदाहरण है, किसी की नहीं। लग्न सिंह; सूर्य और गुरु कर्क में; चंद्र कुंभ में; मंगल, बुध और शुक्र सिंह में; शनि मकर में।

मेष से आरंभ कर राशि-अनुसार सर्वाष्टकवर्ग: ३३, ४०, ३७, २२, २५, २२, २७, २९, २९, २९, २१, २३। इन बारह का योग ३३७ है।

यही तालिका दूसरी दिशा में — प्रत्येक ग्रह का बारहों राशियों में कुल — ४८, ४९, ३९, ५४, ५६, ५२, ३९ देती है, जिसका योग भी ३३७ है। सही गणना दोनों दिशाओं में मिलती है।

इन अंकों का उपयोग क्या है, और क्या नहीं

प्रश्न मार्ग इस गणना से गोचर को तौलता है: शनि का वही भ्रमण इस आधार पर भिन्न पढ़ा जाता है कि वह जिस राशि से गुज़र रहा है उसमें आपकी अपनी शनि-तालिका के कितने बिंदु हैं। यही इस पद्धति का सच्चा उपयोग है — यह एक ही गोचर को दो व्यक्तियों के लिए भिन्न बना देती है।

यह आपके भावों की श्रेणी नहीं है और न कोई निर्णय। किसी एक स्थान पर कम अंक कई कारकों में से एक है; ग्रंथ स्वयं कहता है कि अकेला एक कम आँकड़ा एक सामान्य शिकायत बताता है, कोई परिणाम नहीं। हम बिंदुओं को भविष्यवाणी, तिथि, या कुछ ख़रीदने की सलाह में नहीं बदलते।

हम क्या गणना करते हैं और क्या नहीं

हम आठों तालिकाएँ और सर्वाष्टकवर्ग गणना करते हैं, जिन्हें प्रामाणिक ३३७ तथा अध्याय की अपनी ५७–५८ श्लोकों वाली उलटी तालिका — ९६ और शर्तें — दोनों से मिलाकर जाँचा गया है।

हम दो शास्त्रीय शोधन नहीं करते, त्रिकोण और एकाधिपत्य, अतः हमारे सभी आँकड़े अशोधित हैं। हम पूर्ण राशि के स्तर पर काम करते हैं; ३°४५' वाला सूक्ष्म कक्ष्या-विभाजन लागू नहीं है।

एक पारदर्शिता सूचना: चंद्र की तालिका में गुरु की पंक्ति हमारे पास उपलब्ध दोनों संस्करणों में भिन्न छपी है, और कोई भी छपाई अध्याय की अपनी शर्तें पूरी नहीं करती। हम वही पाठ लेते हैं जिसे वे शर्तें बाध्य करती हैं।